मोदी ने की गहलोत की तारीफ तो भड़क गए पायलट! कांग्रेस आलाकमान को याद दिलाया ‘हल्के में ना लें’

फ़ाइल फ़ोटो: सीएम अशोक गहलोत व पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट
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  • ये क्या बोल गए सचिन पायलट अशोक गहलोत को लेकर!
  • पीएम मोदी ने पहले की गुलाम नबी आजाद की तारीफ अब राजस्थान आकर कर गए सीएम अशोक गहलोत की तारीफ।
  • इस पर अब आया पूर्व उप मुख्यमंत्री का तीखा बयान
    क्या सचिन पायलट के सब्र का बांध अब टूट रहा?

Rajasthan News, Crisis in Congress: क्या अब राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के धुर विरोधी सचिन पायलट के सियासी सब्र का बांध अब टूटने लगा है? अगर नहीं तो फिर ऐसा क्या हुआ कि राजस्थान दौरे पर गए पीएम नरेन्द्र मोदी ने सीएम गहलोत की तारीफ क्या कर दी कि आज सचिन पायलट ने बयान देकर कांग्रेस आलाकमान को कह दिया है कि प्रधानमंत्री द्वारा की गई मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तारीफ को हल्के में कतई ना लें।

सचिन पायलट ने साफ संदेश देते हुए कहा है कि इससे पहले पीएम मोदी ने गुलाम नबी आजाद की राज्यसभा के सदन में जमकर तारीफ की थी और नतीजा क्या निकला सबके सामने है। अब सचिन ने गहलोत पर सीधा अटैक करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले विधाकमंडल दल की बैठक बुलाने के बावजूद गहलोत समर्थक विधायकों के अलग बैठक करने वाले एपिसोड की याद दिलाकर कहा है कि अनुशासनहीनता का डंडा सब पर समान रूप से चलना चाहिए। पायलट ने साफ कहा है कि अगर सीएम गहलोत के करीबी तीन लोगों को अनुशासनहीनता को लेकर नोटिस दिया गया है तो उनके खिलाफ कार्रवाई भू होनी चाहिए।

पायलट भड़के तो सुलगते हुए सीएम गहलोत ने कहा है कि संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल ने बयानबाजी से बचने की एडवाइजरी जारी की है लिहाजा पायलट को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। वहीं सीएम अशोक गहलोत के OSD लोकेश शर्मा ने एक ट्वीट कर मानो पायलट को नसीहत दी है कि वे ठहरे हुए पानी ने कंकर न मारें वरना हलचल मच जाएगी।

सवाल है की क्या अब जब राजस्थान विधानसभा चुनाव को सिर्फ साल भर का वक्त बचा है और अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले ही बड़ी ही चतुराई से जादूगर गहलोत ने विधायक दल की बैठक से पहले ही 92 विधायकों की अलग बैठक का बवाल कराकर एक तीर से दो निशाने साध गए (पार्टी अध्यक्ष की सिरदर्दी से बचे और सीएम कुर्सी भी बचा ले गए) सीएम गहलोत का गेम अब पायलट समझ पाए इसलिए भड़क गए हैं?

अब अगर पायलट को लेकर पार्टी कोई ठोस फैसला नहीं ले पाती है तो क्या राजस्थान के चुनावी रण से पहले ही कांग्रेस अंदरूनी रण से लहूलुहान हो जाएगी? या फिर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही मल्लिकार्जुन खड़गे रेगिस्तान की तपती सियासी जमीन पर नजीर पेश करने लायक दौड़ का दम दिखा पाएंगे?


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