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West Bengal New CM Shubhendu Adhikari: अविवाहित हैं शुभेंदु अधिकारी, जानिए कितनी है संपत्ति और कैसे बने बंगाल के पहले BJP मुख्यमंत्री

शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में PM Narendra Modi समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली।

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Kolkata: कभी Mamata Banerjee के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाने वाले Shubhendu Adhikari ने आखिरकार पश्चिम बंगाल की राजनीति में वह कर दिखाया, जिसकी कुछ साल पहले तक भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी कल्पना नहीं करते थे। 15 साल तक सत्ता पर काबिज ‘दीदी’ को भवानीपुर में हराकर शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बन गए हैं।

शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में PM Narendra Modi समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली।

 कौन हैं शुभेंदु अधिकारी?

57 वर्षीय शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। उन्होंने भवानीपुर के अलावा नंदीग्राम सीट से भी चुनाव जीता है। नंदीग्राम वही सीट है, जहां 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस से होते हुए भाजपा तक का राजनीतिक सफर तय करने वाले शुभेंदु अधिकारी ने खुद को एक मजबूत संगठनकर्ता और जमीनी नेता के रूप में स्थापित किया है।

शुभेंदु अधिकारी की शिक्षा और निजी जीवन

शुभेंदु अधिकारी अविवाहित हैं। दिलचस्प बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अविवाहित रही हैं।

शुभेंदु अधिकारी, वरिष्ठ नेता Sisir Kumar Adhikari के बेटे हैं। उन्होंने Rabindra Bharati University से वर्ष 2011 में एमए की डिग्री हासिल की थी।

Shubhendu Adhikari Net Worth: कितनी है संपत्ति?

चुनावी हलफनामे के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी ने अपनी कुल संपत्ति 85,87,600 रुपये घोषित की थी। खास बात यह है कि उन पर किसी प्रकार का कर्ज नहीं है।

हलफनामे के अनुसार:

* कुल घोषित संपत्ति: 85.87 लाख रुपये
* कोई कर्ज नहीं
* पेशा: कारोबारी और राजनेता
* निजी वाहन: कोई गाड़ी नहीं

कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

शुभेंदु अधिकारी ने महज 31 साल की उम्र में पहला चुनाव जीता था। वह कांग्रेस के टिकट पर कोंटाई नगर परिषद के पार्षद चुने गए थे।

इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और 2006 में पहली बार कोंटाई साउथ विधानसभा सीट से विधायक बने।

नंदीग्राम आंदोलन से बढ़ा राजनीतिक कद

2007 में वाम मोर्चा सरकार के दौरान नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। उस आंदोलन को धार देने में शुभेंदु अधिकारी की अहम भूमिका मानी जाती है।

उस समय ममता बनर्जी आंदोलन का चेहरा थीं, जबकि संगठनात्मक स्तर पर आंदोलन को मजबूत बनाने का श्रेय शुभेंदु अधिकारी को दिया जाता है। इसी आंदोलन के बाद टीएमसी में उनका कद तेजी से बढ़ा।

सांसद से मंत्री तक का सफर

टीएमसी नेतृत्व ने 2009 में शुभेंदु अधिकारी को तामलुक लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा और वह सांसद चुने गए।

इसके बाद 2016 में नंदीग्राम सीट से विधायक बनने के बाद उन्हें ममता सरकार में मंत्री बनाया गया।

भाजपा में शामिल होकर रचा इतिहास

साल 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी से नाराज होकर भाजपा जॉइन कर ली।

2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें सीधे ममता बनर्जी के खिलाफ नंदीग्राम सीट से उतारा। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में शुभेंदु अधिकारी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश में राजनीतिक हलचल मचा दी।

इसके बाद वह बंगाल में भाजपा के सबसे मजबूत चेहरे के रूप में उभरे।

भवानीपुर से ममता को हराकर बने बंगाल के पहले BJP CM

2026 विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने एक बार फिर ममता बनर्जी को चुनौती दी, इस बार उनके गढ़ भवानीपुर में।

चुनाव परिणामों में इतिहास दोहराया गया और शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर पश्चिम बंगाल में भाजपा का पहला मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

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