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Badrinath Dham: वसंत पंचमी पर हुई घोषणा, 23 अप्रैल को खुलेंगे कपाट, जानें समय और पूरी रस्म

उत्तराखंड: बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2024 को सुबह 6:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में खुलेंगे। वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर नरेंद्रनगर राजदरबार में गाडू घड़ा पूजन के बाद तिथि की घोषणा की गई।

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Chardham Yatra 2026: बदरीनाथ धाम के पवित्र कपाट इस वर्ष 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। वसंत पंचमी के पावन पर्व पर शुक्रवार को नरेंद्रनगर राजदरबार में गाडू घड़ा पूजन के बाद आधिकारिक रूप से इस तिथि की घोषणा की गई। गत वर्ष 2025 के मुकाबले इस वर्ष 11 दिन पहले भगवान बदरी विशाल के मंदिर के कपाट खुल रहे हैं।

भगवान बदरी विशाल के मंदिर के कपाट सुबह 6:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में पूरे विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। इससे पहले, गाडू घड़ा की पारंपरिक यात्रा 7 अप्रैल से शुरू होगी, जो कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गत बृहस्पतिवार को डिम्मर गाँव के डिमरी पुजारियों ने भगवान बदरीविशाल की विशेष पूजा-अर्चना की। श्रीलक्ष्मी-नारायण मंदिर डिम्मर में पुजारी टीका प्रसाद डिमरी और आचार्यों ने भगवान और गाडू घड़ा की विष्णु सहस्त्रनाम और नामावलियों से महाभिषेक पूजा कर बाल भोग अर्पित किया। इसके बाद बदरीनाथ धाम के डिमरी पुजारियों ने गाडू घड़ा लेकर मंदिर की परिक्रमा की। फिर भगवान श्रीबदरी विशाल के जयकारों के साथ यात्रा रात्रि प्रवास के लिए ऋषिकेश रवाना हुई।

वसंत पंचमी को सुबह गाडू घड़ा लेकर डिमरी पुजारी ऋषिकेश से नरेंद्र नगर राजदरबार पहुंचें, जहाँ महाराजा मनुजेंद्र शाह की मौजूदगी में पंचांग पूजन के बाद भगवान बदरीविशाल धाम के कपाटोद्घाटन की तिथि, तेल कलश यात्रा और महाभिषेक की तैयारियों से जुड़े कार्यक्रम तय किए गए। बदरीनाथ धाम के कपाट हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में विजयादशमी के बाद बंद होते हैं और छह माह के बाद अगले वसंत में कपाट खुलने की तिथि तय होती है।

 

अक्षय तृतीया पर खुलेंगे गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट

गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट अक्षय तृतीया पर खुलते हैं और इस वर्ष 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया है। इसी के साथ चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो जाता है। जबकि केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि का ऐलान महाशिवरात्रि के दिन किया जाएगा।

अक्षय तृतीया का विशेष महत्व

उत्तराखंड चारधाम यात्रा के शुभारंभ के लिए अक्षय तृतीया का दिन शुभ माना जाता है।इस दिन का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहते हैं। अक्षय का अर्थ होता है, जिसका कभी क्षय यानी नाश न हो। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन दान, जप और पुण्य कार्य करना बहुत फलदायी होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है। कपाट खोलने के लिए अक्षय तृतीया का दिन सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिन नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है।

 

मोबाइल, कैमरे व रीलबाजी पर रहेगी रोक

उत्तराखंड सरकार ने इस बार चारधाम यात्रा को लेकर बड़ा निर्णय लिया है जिसके तहत चारों धामों के मंदिर परिसरों में मोबाइल-कैमरे आदि पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। अब श्रद्धालु केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरा लेकर प्रवेश नहीं कर पाएंगे। सरकार ने तय किया है कि मंदिर समिति और जिला प्रशासन मिलकर मोबाइल, कैमरा आदि जमा कराने की विशेष व्यवस्था करेंगे। शासन-प्रशासन का मत है कि चारों धामों में वीडियो, रील और व्लॉग बनाने को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे थे। इसी कारण बदरीनाथ धाम में सिंहद्वार से आगे मोबाइल ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसी प्रकार से केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी मोबाइल, कैमरा आदि को मंदिर परिसर में प्रतिबंधित किया गया है।

(समाप्त)

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