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हरिद्वार कुंभ तक सीमित नहीं कोरोना जांच का फर्जीवाड़ा, सभी निजी लैब जांच के दायरे में तभी सच सामने आएगा, विपक्ष ने शुरू की सरकार की घेराबंदी, हरीश रावत ने सीएम तीरथ से की ये मांग

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देहरादून: हरिद्वार महाकुंभ में कोरोना जाँच के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ ये बात सामने आ चुकी है। एक ही निजी लैब के एक लाख सैंपलों में गड़बड़झाला किया गया ये तथ्य स्थापित हो रहा है।सवाल है कि कुंभ के दौरान नौ लैबों के साथ करार हुआ था उनका क्या हाल है और प्रदेश में जांच में फर्जीवाड़े का खेल कहां कहां हुआ अब तक? पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से आग्रह किया है कि वे इस मामले में तत्परता से कठोर कार्रवाई प्रारम्भ करें।

आखिर जो लोग हरिद्वार कुंभ में आए ही नहीं उनके मोबाइल पर कोविड जांच की रिपोर्ट कैसे पहुंच गई। साथ ही एक ही मोबाइल नंबर पर कई-कई जाँच रिपोर्ट बना दी गई। इतना ही नहीं एक ही पता दर्ज कर उस पर सैंकड़ों जाँच कराई गई। इसी तरीके से एक लाख से ज्यादा सैंपल लेकर जांच रिपोर्ट बना डाली गई।
फर्जीवाड़े का खेल इतनी सफ़ाई से खेला गया कि फ़र्ज़ी तरीके से की गई ज़्यादातर जाँच रिपोर्ट निगेटिव दिखाई गई। नब्बे फीसदी फ़र्ज़ी सैंपल कलेक्शन की एंट्री राजस्थान से की गई है। होता तो ये है कि हर सैंपल के लिए व्यक्ति की अलग आईडी बनती है लेकिन मकान-पते को लेकर ज़बरदस्त गड़बड़ी कर झूठी जांच रिपोर्ट होती रही। एक ही पते से पांच-पांच सौ सेंपल ले लिए गए।
शासन की तरफ से स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने हरिद्वार डीएम को जांच का ज़िम्मा सौंपा है। जांच चल भी रही है लेकिन क्या नौ निजी लैबों में कुंभ के दौरान हुई कुल जाँचों का सच सामने आएगा?

विपक्ष ने जांच के नाम पर कुंभ में चले इस फर्जीवाड़े को लेकर सरकार पर हल्लाबोल दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया है कि कुंभ के दौरान सरकार इन निजी लैब एजेंसियों पर कड़ी नजर रखने में नाकाम रही है। प्रीतम ने कहा कि कोरोना काल में जितनी भी मौतें हुई हैं उसके लिए सरकार ज़िम्मेदार है और कांग्रेस हरिद्वार कुंभ के दौरान हुए जांच के फर्जीवाड़े की सीबीआई जांच की मांग करती है।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि हरिद्वार में विभागीय जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है और इससे पहले रुद्रपुर में भी ऐसा ही फर्जीवाड़ा किया गया था। इस तरह के फर्जीवाड़े उत्तराखंड का स्वभाव नहीं है। रावत ने कहा कि ‘ये कौन लोग हैं, जो हमारे राज्य को कलंकित कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।’


शासकीय प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल खुद देहरादून में ऐसा एक फर्जीवाड़ा पकड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि हरिद्वार मामले के बाद सरकार ने डीजी हेल्थ लेवल से सभी सीएमओ को निर्देश कराए हैं कि जितनी भी आरटीपीसीआर और रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए मान्यता प्राप्त लैब हैं, उनकी सबकी जांच कराएँ उसके बाद ही बिल जारी किए जाएँ।

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