सचिवालय कूच: उत्तराखंड की महिलाओं के 30% क्षैतिज आरक्षण पर लामबंद होते सामाजिक संगठन, आज परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच

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देहरादून: बुधवार को देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच निकाला गया। उत्तराखंड की राज्याधीन सेवायोजन में उत्तराखंड की महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मार्च निकाला। सचिवालय कूच में उत्तराखंड की छात्राएँ व युवाओं ने पारम्परिक वेशभूषा पहनकर शिरकत की। युवाओं के इस अनूठे विरोध के अंदाज को लोगों ने काफी पसंद किया और आरक्षण को लेकर सरकार की कोशिशों पर सवाल खड़े किए।

सचिवालय पहुंचकर दिया गया ज्ञापन का सूक्ष्म ड्राफ्ट

सेवा में
श्रीमान माननीय मुख्यमंत्री जी उत्तराखंड सरकार।

विषय-: उत्तराखंड की महिलाओं हेतु राज्य सेवायोजन में 30% आरक्षण दिए जाने हेतु अध्यादेश व संवैधानिक एक्ट बनाए जाने के विषयक।

महोदय

आज दिवस बुधवार दिनांक 2 नवंबर 2022 को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास का गवाह रहे ऐतिहासिक परेड ग्राउंड उत्तराखंड से उत्तराखंड सचिवालय तक पहुंचकर हम उत्तराखंड की बेटियां, बहनें, बेरोजगार युवा, उत्तराखंड राज्य निर्माण के सैनानी गण एवं आंदोलनकारी इस निवेदन के साथ आपको यह मांग पत्र सौंप रहे हैं कि उत्तराखंड राज्य के भीतर सभी प्रकार के राज्य सेवायोजन में उत्तराखंड की महिलाओं को 30% आरक्षण दिए जाने पर सरकार संवैधानिक उपाय निर्मित करें।

महोदय हमें बड़े खेदपूर्वक कथन करना पड़ रहा है कि उत्तराखंड के माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा एक निर्णय सुनाकर उत्तराखंड की लाखों माँ बहनों और बेटियों के अधिकार के साथ-साथ उनके और उनके अपनों द्वारा संघर्ष से प्राप्त राज्य उत्तराखंड को संवारने हेतु देखे गए सुनहरे सपनों को समाप्त कर दिया है। न्याय का तकाजा यह है कि उत्तराखंड की बहन और बेटियों के विषम हालात को संवैधानिक होकर समझा जाता और उनको प्रदत्त राज नहीं सेवायोजन में 30% आरक्षण के द्वारा सफल व सशक्तिकरण बनाने के प्रादेशिक नीति को न केवल हरी झंडी दी जाती है बल्कि उसे और कारगर बनाने में सुझाव दिए जाते हैं

महोदय सन 1994 के उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में समूचा विश्व भलीभांति परिचित है कि उत्तराखंड के युवाओं व महिलाओं की दयनीय सामाजिक स्थिति, आर्थिक कमजोरी, लचर शिक्षा व्यवस्था और विषमता भरे जीवनयापन के साधन पलायन की गहरी पीड़ा व असंख्य बेरोजगारी से पूरा उत्तराखंड का समाज उद्वेलित हो उठ खड़ा हुआ था। हमें अपने राज्य के भीतर राज्य सेवा राष्ट्र सेवा के मंत्र के साथ सेवा करने के अवसर मिलेंगे, ऐसी सभी की अभिकल्पना रही है। परंतु हमसे तो अवसर ही छीने जा रहे हैं जिसकी हम कड़े शब्दों से निंदा करते हैं
महोदय उत्तराखंड सरकार बिना एक पल की देरी किए राज्य अधीन सेवायोजन में उत्तराखंड की महिलाओं के लिए 30% महिला आरक्षण पर अध्यादेश लेकर आए। उत्तराखंड सरकार आगामी विधानसभा सत्र में राज्य अधीन सेवा योजन में उत्तराखंड की महिलाओं हेतु 30% से अधिक महिला आरक्षण पर लाए जाने वाले अध्यादेश को को तत्काल प्रभाव से कानून बनाकर लागू करने का काम करे।
माननीय मुख्यमंत्री जी हम आपसे बड़ी उम्मीद के साथ अपनी आवाज को पहुंचाने के लिए ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराना चाहते हैं कि आप इस देवतुल्य जनता के देवभूमि प्रदेश में महिलाओं के साथ अन्याय नहीं होने देंगे एवं हमारी मांगों को जल्द से जल्द पूर्ण किया जाएगा।

कार्यक्रम में ज्ञापन पर हस्ताक्षरकर्ता:- बॉबी पँवार, अध्यक्ष, उत्तराखंड बेरोजगार संघ, “सैनिक शिरोमणि” मनोज ध्यानी, प्रदेश समन्वयक एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रेफॉर्म्स एंड उत्तराखंड इलेक्शन वॉच, प्रमिला रावत, संयोजका अंकिता भंडारी न्याय समिति, आशा नौटियाल, संयोजिका उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी संघ (पंजी0), गणेश धामी, अध्यक्ष, प्राउड पहाड़ी सोसाइटी, आरती राणा, अध्यक्ष, छात्र युवा संघर्ष समिति, लुसून टोडरिया, उत्तराखंड जनमंच, हृदयेश शाही, पर्यावरण बचाओ अभियान व सैकड़ों समाजसेवी रहे।

सचिवालय कूच कार्यक्रम में भागीदारी करने वाले संगठन:-

उत्तराखंड बेरोजगार संगठन, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रेफॉर्म्स, उत्तराखंड इलेक्शन वॉच, उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी संघ (पंजी0), प्राउड पहाड़ी सोसायटी, छात्र युवा संघर्ष समिति, जनमंच संगठन, पर्यावरण बचाओ अभियान, भ्रष्टाचार मिटाओ संघर्ष समिति, जनवादी महिला समिति, स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया, सुराज सेवा दल, उत्तराखंड क्रांति दल, उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच आदि कई जन संगठनों से जुड़े प्रबुद्ध समाज सेवी, भर्ती अभ्यर्थी व युवा भी मौजूद रहे।

ज्ञापन एसडीएम मायादत्त जोशी के माध्यम से मुख्यमंत्री, उत्तराखंड को प्रेषित किया गया जिसको बॉबी पँवार द्वारा पढ़ा गया।

ज्ञापन मे सरकार को कई ठोस सुझाव दिए गए हैं व मांग की गईं कि सरकार अविलम्ब महिला आरक्षण प्रदान करने हेतु अध्यादेश लेकर आये व आगामी विधानसभा सत्र में उसे एक्ट बनाकर पारित करे।

ज्ञापन की प्रति, देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, उत्तराखंड के राज्यपाल, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राज्य के मुख्य सचिव को भी प्रेषित की गईं हैं।

सचिवालय कूच से पूर्व परेड ग्राउंड में जनसभा व सचिवालय के समीप बैरीकेड पर सभा अयोजित की गई जिसे सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सम्बोधित किया।


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