‘..कब होंगे टेंडर?.. आत्महत्या कर लूं। तेल छिड़कर आग लगा दूं आप दोनों पर भी अपने पर भी। कब होंगे ये टेंडर?’डबल इंजन सरकार में PWD की नाकामी के सबूत पेश करते बीजेपी विधायक को क्यों धरने पर ये धमकी देनी पड़ी?

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रुद्रपुर: डबल इंजन सरकार में चार साल से कैसे सत्ताधारी बीजेपी के विधायक ही कैसे अधिकारियों के आगे बेबस और लाचार नजर आ रहे शुक्रवार को इसकी एक बानगी रुद्रपुर में देखने को मिली। बीजेपी के विधायक राजकुमार ठुकराल न PWD अधिकारियों को दफ़्तर में घेरकर धरना-प्रदर्शन का ऐसा हाइवोल्टेज ड्रामा पेश किया कि PWD विभाग के सर्वेसर्वा खुद मुख्यमंत्री तीरथ रावत भी अचंभित रह जाएंगे कि आखिर ऐसा कैसे हो रहा! ठुकराल के हाइवोल्टेज ड्रामा का आईना तो पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को भी देखना चाहिए क्योंकि बीजेपी विधायक तीन साल से 30 सड़कोें के लिए दर-दर धक्के खा रहे लेकिन सड़कें बनकर नहीं दे रही। थक-हारकर बीजेपी विधायक अधिशासी अभियंता के दफ्तर पर एक दिवसीय धरने पर बैठ गए।
माजरा ये था कि 30 से अधिक सड़कों के टेंडर होने के बावजूद ढाई-तीन साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो पाया है जिससे आक्रोशित रुद्रपुर विधायक राजकुमार ठुकराल PWD के अधिशासी अभियंता के कार्यालय पहुंच गए और धरना शुरू कर दिया। सत्ताधारी दल के विधायक को धरने पर देखकर अधिकारी बाहर चले गये। बाद में लौटे तो विधायक ठुकराल आपे से बाहर हो गये और अफसरों को सरकार का आईना बताते अपना दुखड़ा मीडिया के सामने रोने लगे। विधायक ने अधिकारियों से यहाँ तक कह डाला, ‘तेल छिड़ककर आग लगा दूं आप दोनों पर और अपने पर भी?’ बाद में विधायक ने एक सप्ताह के भीतर सड़कों का काम शुरू करने की चेतावनी भी दी और धरना खत्म किया।

दरअसल, बीजेपी विधायक राजकुमार ठुकराल शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे लोनिवि के प्रांतीय खंड रुद्रपुर में अधिशासी अभियंता कार्यालय में कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। विधायक ने ढाई साल से 30 सड़कें नहीं बनने को लेकर अधिशासी अभियंता मनोज दास से कड़ी आपत्ति जताई। विधायक के कड़े तेवर देख अधिशासी अभियंता अपना कार्यालय छोड़कर दूसरे कमरे में चले गए। इससे नाराज विधायक ईई कार्यालय के फर्श पर ही धरने पर बैठ गए। इसी बीच अधीक्षण अभियंता एमएस रावत भी वहां आ गए। ईई मनोज दास भी लौटकर आ गए तो बीजेपी विधायक राजकुमार ठुकराल आग-बबूला हो गए। विधायक ने कहा कि जनता परेशान है और उनसे सवाल पूछ रही है। कहा कि सड़कों के टेंडर के बावजूद काम नहीं होने पर वह क्या जवाब दें?

अधीक्षण अभियंता एमएस रावत ने कहा कि 34 सड़कों के 11 करोड़ 61 लाख के एस्टिमेट भेजे जा चुके हैं। इस पर विधायक से पलट कर कहा कि ‘कब गए हैं? कब होंगे टेंडर? कब काम चालू होगा। आत्महत्या कर लूं। तेल छिड़कर आग लगा दूं आप दोनों पर भी अपने पर भी। कब होंगे ये टेंडर?’ इसके बाद अधिकारियों ने किसी तरह उन्हें मनाया।


चुनाव नज़दीक है और विधायक ने कहा जनता परेशान होकर सड़कों पर सवाल पूछ रही है और मैं खुद बिलख रहा हूँ, उपवास पर हूं लेकिन अधिकारी सुन नहीं रहे, वे एसी दफ्तर, एसी गाड़ी और एसी कोठी में मस्त हैं।


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