
- उत्तराखंड में 11 लाख वोटर घटे, देहरादून में सबसे बड़ा झटका
- वोटर लिस्ट में इतनी बड़ी गिरावट क्यों? उत्तराखंड में 2027 से पहले उठे सवाल
- देहरादून की 3 सीटों पर वोटरों की भारी कमी, राजपुर रोड में 32.64% गिरावट
- देहरादून कैंट, राजपुर रोड, धर्मपुर में सबसे ज्यादा गिरावट; क्या है वजह?
- राजपुर रोड में अब बद्रीनाथ-केदारनाथ से भी कम वोटर, आंकड़ों ने चौंकाया
- उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में महिला मतदाताओं का गणित बदला, जांच की मांग
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले SIR के बाद मतदाता सूची में बड़े बदलाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक व सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल तथा प्रवीण उप्रेती की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के विधानसभा चुनावों और 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के बीच प्रदेश में 11,07,695 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट में इसे 13.40 प्रतिशत की गिरावट बताया गया है। सबसे ज्यादा चर्चा देहरादून की विधानसभा सीटों में मतदाताओं की संख्या में आई कमी को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून कैंट में 34.19 प्रतिशत, राजपुर रोड में 32.64 प्रतिशत और धर्मपुर में 27.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
शनिवार को प्रेस क्लब में ‘एसआईआर (SIR) और 2022 से 2027 के विधानसभा चुनावों के बीच उत्तराखंड का बदलता मतदाता परिदृश्य’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की गई। इसमें मतदाता सूची में हुए बदलावों, विभिन्न राज्यों के आंकड़ों और महिला-पुरुष मतदाताओं की संख्या में आए अंतर का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट तैयार करने वालों ने निर्वाचन आयोग से मतदाताओं की संख्या में आई कमी का विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र के स्तर पर विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
11.07 लाख मतदाता कम, 2027 से पहले उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 के विधानसभा चुनाव के समय उत्तराखंड में 82,66,644 मतदाता थे। 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर लगभग 71.59 लाख रह गई। इस तरह कुल 11,07,695 मतदाताओं की कमी बताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि 2012 से 2022 के बीच प्रदेश में लगभग 18.89 लाख मतदाता जुड़े थे। इसके उलट, 2022 के बाद मतदाताओं की संख्या में आई गिरावट ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और उसके नतीजों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, मतदाताओं की संख्या में कमी आने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि सभी नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं। मृत्यु, स्थायी पलायन, दोहरी प्रविष्टियां और अन्य कारणों से भी मतदाता सूची में बदलाव हो सकता है। ऐसे में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए नाम हटाए जाने के कारणों और आंकड़ों का विस्तृत विवरण जरूरी है।
देहरादून में सबसे ज्यादा गिरावट, कैंट और राजपुर रोड के आंकड़े चौंकाने वाले
रिपोर्ट में जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक, देहरादून में लगभग 3.03 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई, जो 20.22 प्रतिशत है। रिपोर्ट में शामिल जिलों में प्रतिशत के लिहाज से यह सबसे अधिक गिरावट बताई गई है।
प्रदेश के बाक़ी जिलों की बात करें तो पौड़ी गढ़वाल में 14.89 प्रतिशत, पिथौरागढ़ में 13.61 प्रतिशत और टिहरी गढ़वाल में 13.14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़े और भी महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट के मुताबिक:
* देहरादून कैंट: 34.19 प्रतिशत की गिरावट
* राजपुर रोड: 32.64 प्रतिशत की गिरावट
* धर्मपुर: 27.59 प्रतिशत की गिरावट
इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में आई कमी के कारणों की विस्तृत समीक्षा की मांग की गई है।
राजपुर रोड में बद्रीनाथ और केदारनाथ से भी कम मतदाता
रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र की तुलना बद्रीनाथ और केदारनाथ से करना है। 2022 में राजपुर रोड में 1,19,615 मतदाता थे। इसी अवधि में बद्रीनाथ में 1,04,795 और केदारनाथ में 93,016 मतदाता दर्ज थे।
लेकिन 3 अक्टूबर 2026 की अंतिम मतदाता सूची में राजपुर रोड के मतदाताओं की संख्या घटकर 80,569 रह गई। इसके मुकाबले बद्रीनाथ में 91,555 और केदारनाथ में 85,924 मतदाता दर्ज किए गए। यानी अब राजपुर रोड में इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों से भी कम मतदाता हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के बाद राजपुर रोड में 39,046 मतदाताओं की कमी आई, जबकि बद्रीनाथ में 13,240 और केदारनाथ में 7,092 मतदाता कम हुए। रिपोर्ट में इन क्षेत्रों के एसडीडी और नो मैपिंग संबंधी आंकड़ों का मिलान कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की गई है।
70 में से 36 सीटों पर महिला मतदाताओं की ज्यादा गिरावट
मतदाता सूची में बदलाव का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू महिला मतदाताओं से जुड़ा है। रिपोर्ट के लिंग आधारित विश्लेषण के मुताबिक, प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों में से 36 पर महिला मतदाताओं की संख्या में प्रतिशत के लिहाज से गिरावट पुरुष मतदाताओं की तुलना में अधिक रही।
रिपोर्ट में ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा जिलों में भी इसी तरह के ट्रेंड का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 के विधानसभा चुनाव में द्वाराहाट एकमात्र ऐसी सीट थी, जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक थी। अध्ययन में शामिल 2026 की मतदाता सूची में किसी भी विधानसभा क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक नहीं बताई गई है।
हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर महिला मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए निर्वाचन आयोग को पुनरीक्षण से पहले और बाद के लिंगवार आंकड़े, नाम हटाने के कारण तथा मतदान केंद्रवार विवरण सार्वजनिक करना होगा।
दूसरे राज्यों से तुलना में उत्तराखंड की गिरावट सबसे अधिक होने का दावा
रिपोर्ट में विभिन्न राज्यों के आंकड़ों का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। इसमें उत्तराखंड में 13.40 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है, जबकि उत्तर प्रदेश में लगभग 11.4 प्रतिशत, गोवा में 9.18 प्रतिशत, तमिलनाडु में 8.79 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 6.88 प्रतिशत, मणिपुर में 5.28 प्रतिशत और पंजाब में 0.7 प्रतिशत की कमी का उल्लेख है।
केरल में 1.12 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है, जबकि बिहार और असम में संबंधित तुलनाओं के दौरान मतदाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज होने का जिक्र है।
हालांकि, अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, आंकड़ों की संदर्भ तिथियों और प्रक्रियाओं में अंतर हो सकता है। इसलिए इन आंकड़ों की समान आधार पर तुलना के लिए एकरूप मानकों और आधिकारिक आंकड़ों का मिलान जरूरी है।
अनूप नौटियाल ने निर्वाचन आयोग से मांगा विस्तृत ब्योरा
रिपोर्ट जारी करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने मतदाता सूची में हुए बदलावों को पारदर्शिता, जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़ा मुद्दा बताया।
उन्होंने कहा, “जब नागरिकों को यह पता नहीं होता कि उनका नाम मतदाता सूची में बना हुआ है या नहीं, अथवा उन्हें अपने मतदान के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए एक जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, तो इससे लोकतंत्र कमजोर होता है।”
नौटियाल के मुताबिक, निर्वाचन आयोग को सक्रिय होकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूट न जाए। उन्होंने कहा कि सटीक मतदाता सूची तैयार करना महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनावों की विश्वसनीयता और लोकतंत्र के स्वास्थ्य का मूल आधार है।
निर्वाचन आयोग से क्या मांगें की गईं?
रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग से प्रमुख रूप से निम्न कदम उठाने की मांग की गई है:
1. 11,07,695 मतदाताओं की कमी का विधानसभा क्षेत्रवार और मतदान केंद्रवार विवरण सार्वजनिक किया जाए।
2. नाम हटाने के कारणों को मृत्यु, पलायन, दोहरी प्रविष्टि और अन्य श्रेणियों में अलग-अलग बताया जाए।
3. देहरादून कैंट, राजपुर रोड और धर्मपुर में मतदाताओं की संख्या में आई असाधारण गिरावट की विस्तृत समीक्षा की जाए।
4. सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में महिला और पुरुष मतदाताओं के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण जारी किया जाए, विशेष रूप से उन 36 सीटों पर जहां महिला मतदाताओं की प्रतिशत गिरावट अधिक बताई गई है।
5. राजपुर रोड, बद्रीनाथ और केदारनाथ समेत संबंधित क्षेत्रों में एसडीडी तथा नो मैपिंग के आंकड़ों का मिलान कर स्पष्टीकरण दिया जाए।
6. विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान पात्र नागरिकों को नाम जुड़वाने, रिकॉर्ड में सुधार कराने और शिकायतों की स्थिति जानने की सुलभ सुविधा दी जाए।
2027 से पहले मतदाता सूची पर निगाहें
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में हुए बदलाव चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट ने मतदाताओं की संख्या में कमी, क्षेत्रवार असमानता और महिला मतदाताओं से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि निर्वाचन आयोग इन आंकड़ों के पीछे के कारणों को किस तरह स्पष्ट करता है और मतदाता सूची की जांच तथा सुधार के लिए क्या कदम उठाता है। अंतिम स्थिति का आकलन आधिकारिक आंकड़ों, नाम हटाने के कारणों और पुनरीक्षण प्रक्रिया के विस्तृत विवरण के आधार पर ही किया जा सकेगा।
अनूप नौटियाल ने यह भी कहा-“SIR पूरा करने वाले 11 राज्यों में उत्तराखंड में मतदाता सूची में सबसे बड़ी गिरावट: 2022 के विधानसभा चुनावों के मुकाबले 11.07 लाख मतदाता कम, 13.40% की कमी*
आज सुबह हमने “SIR & The Changing Uttarakhand Voter Landscape: From 2022 to 2027 Vidhan Sabha Elections” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की।
रिपोर्ट का प्रमुख निष्कर्ष है कि 2022 के विधानसभा चुनावों के मुकाबले 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उत्तराखंड के मतदाताओं की संख्या में 11,07,695 की कमी आई है। यह 13.40% की गिरावट है। मतदाताओं की संख्या 82,66,644 से घटकर लगभग 71.59 लाख रह गई है। रिपोर्ट में शामिल राज्यों के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में 13.40% की यह गिरावट सबसे अधिक है।
तुलना के लिए, उत्तर प्रदेश में लगभग 11.4%, तमिलनाडु में 8.79%, गोवा में 9.18%, पश्चिम बंगाल में 6.88%, मणिपुर में 5.28% और पंजाब में 0.7% की कमी दर्ज की गई। केरल में 1.12% की गिरावट रही, जबकि बिहार और असम में संबंधित तुलनाओं के दौरान मतदाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई।“



