गैंगस्टर यशपाल तोमर से उत्तराखंड ब्यूरोक्रेसी का ये रिश्ता क्या कहलाता है? सीएम धामी के ‘ब्लू आईड’IAS के ससुर, चहेते IAS के पिता और IPS की मां पर FIR, योगी की पुलिस ने बनाए भूमाफ़िया के साथ सह-अभियुक्त

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  • Greater Noida चिटहैरा जमीन घोटाला
  • गैंगस्टर यशपाल तोमर से उत्तराखंड ब्यूरोक्रेसी का कनेक्शन
  • दो IAS और एक IPS के परिजनों-रिश्तेदारों पर भी धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े के आरोप में FIR दर्ज
  • योगीराज में दागी नपेंगे क्या धामी पिंड छुड़ाएँगे उन अफसरों से जिनके दामन दाग़दार?

ग्रेटर नोएडा/ देहरादून: उत्तराखंड ब्यूरोक्रेसी के दो ताकतवर आईएएस और एक आईपीएस एक बार फिर चर्चा में हैं। वैसे उत्तराखंड की नौकरशाही और विवादों का चोली-दामन का साथ ठहरा। फिर चाहे कुंभ में फर्जी टेस्टिंग करा देना रहा हो या अब एक गैंगस्टर और भूमाफ़िया के साथ साँठ-गाँठ कर परिजनों-रिश्तेदारों को फर्जीवाड़ा कर ज़मीनें दिलाने का ग्रेटर नोएडा का चिटहैरा Land Scam में संलिप्तता के सबूत मिलना हो।

कल्पना करिए जब आपको पता चले कि आपके प्रदेश के आईएएस जो सचिव मुख्यमंत्री भी हैं उनके ससुर, एक दूसरे आईएएस जो कई अहम विभागों को संभाल रहे हैं उनके रिटायर्ड आईएएस पिता और एक आईपीएस जो डीआईजी रैंक पर तैनात हैं, उनकी माँ को ग्रेटर नोएडा में दर्ज एक एफआईआर में कुख्यात गैंगस्टर और भूमाफ़िया यशपाल तोमर उसकी कंपनी और नौकरों के साथ सह-आरोपी बनाया जाता है।

उत्तराखंड कैडर के इन दो आईएएस और एक आईपीएस के परिजनों-रिश्तेदारों पर भूमाफ़िया के साथ साँठ-गाँठ कर फर्जीवाड़े, फर्जी काग़ज़ात के सहारे अनुसूचित जाति के लिए आवंटित जमीन कब्जाने और किसानों को फर्जी मुक़दमें लगाकर फंसाने जैसे संगीन आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 420, 467, 468, 471 और 506 के तहत कुल नौ आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

IAS-IPS अफ़सरों के परिजनों-रिश्तेदारों पर भूमाफ़िया के साथ मिलकर cheating, forgery, forging fake documents के ज़रिये ज़मीनें हथियाने का आरोप लगने के बाद उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मच गया है।

आपके THE NEWS ADDA ने जब इस बड़ी ख़बर को ब्रेक किया उसके बाद उत्तराखंड सरकार और ब्यूरोक्रेसी के पॉवर कॉरिडोर में हल्ला मचा और चर्चा दिनभर यही रही कि आख़िर ये नौकरशाह हैं कौन! ज़ाहिर है THE NEWS ADDA अब इन चेहरों से नक़ाब हटा रहा है।

ज़रा तस्वीर बनाकर समझिये कि तीनों नौकरशाह समय-समय पर हरिद्वार में डीएम और कप्तान के रूप में तैनात रहे। जबकि इसी दौर में गैंगस्टर-भूमाफ़िया यशपाल तोमर भी हरिद्वार में ज़मीनें क़ब्ज़ाने का अपना अवैध प्रॉपर्टी साम्राज्य खड़ा करता रहा। फिर ग्रेटर नोएडा के चिटहैरा गाँव में सरगना तोमर के ज़रिए ग्रामीणों की ज़मीनों पर डरा-धमकाकर ज़मीन अपने नाम बैनामा कराने का खेल चलता रहा। ( FIR में आरोप)
किसानों की पट्टों की ज़मीन ज़बरन ख़रीदी गई और अगर किसी ने नहीं दी तो उसके ख़िलाफ़ दिल्ली, पंजाब, राजस्थान से लेकर उत्तराखंड के कनखल और लक्ष्मण झूला आदि स्थानों पर फ़र्ज़ी मुक़दमे करा दिए गए।
( FIR में आरोप)
एससी समाज के नाम के पट्टे सरगना तोमर ने अपने नौकरों कर्मवीर, कृष्णपाल और बेलु के चिटहैरा गाँव के फ़र्ज़ी पहचान पत्र बनवाकर ज़मीनें ख़रीदी।
( FIR में आरोप)

अब एफआईआर में दर्ज आरोप झूठे हैं या सच्चे यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा लेकिन हालात क्या बयां करते हैं आप ख़ुद अंदाज़ा लगा सकते हैं।

बड़ा सवाल अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने खड़ा हो गया है कि वे किस तरह का स्टैंड लेते हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लाइन तो बिलकुल स्पष्ट है कि माफिया, भूमाफ़िया, गैंगस्टर पर हर हाल में एक्शन का बुलडोज़र चलता रहेगा। योगी की देखादेखी धामी भी बुलडोज़र की वकालत करते और कहते दिखे हैं, सवाल है कि जिनको योगी की पुलिस नाप रही उनको बचाने की कोशिश तो नहीं न होगी? उत्तराखंड एसटीएफ़ तो ख़ुद गैंगस्टर यशपाल तोमर पर एक्शन कर रहा लेकिन गौतमबुद्धनगर में 20 मई को रात्रि 10:45 बजे दर्ज एफ़आइआर ने असल तस्वीर अब करप्शन पर सख़्त और पारदर्शी सरकार के हिमायती मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने नया अवसर दे दिया है। देखना होगा धामी की धमक इस मामले में कैसा असर दिखाती है।

योगी राज में अपराधियों और भू माफिया की खैर नहीं। गैंगस्टर और भूमाफ़िया यशपाल तोमर का नाम इस कड़ी में नया जुड़ चुका है जिनकी करोड़ों की अवैध संपत्ति कुर्क हो चुकी है और एक्शन लगातार जारी है। गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने भूमाफ़िया यशपाल तोमर से जुड़े चिटहैरा लैंड स्कैम में अब बड़ी कार्रवाई की है। चिटहैरा के ग्रामीणों की फर्जी तरीके से जमीन हड़पने और फर्जी मुक़दमें कर ग्रामीणों को जेल में ठूँसने के मामले में गैंगस्टर यशपाल तोमर को मास्टरमाइंड करार देते हुए FIR दर्ज की गई है जिसमें कई IAS, IPS और नेताओं के रिश्तेदारों को सह आरोपी बनाया गया है।

चिटहैरा गांव के लेखपाल शीतला प्रसाद की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर में मुख्य आरोपी गैंगस्टर तोमर के साथ उत्तराखंड के दो आईएएस अफसरोें व एक आईपीएस अफसर के परिजनों-रिश्तेदारों को भी कुल नौ आरोपियों में सह आरोपी बनाया गया है। इन लोगों पर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा करने और फर्जी दस्तावेज़ प्रस्तुत कर जमीन हथियाने और झूठे मुक़दमों में ग्रामीणों को जेल भेजने जैसे बेहद संगीन आरोप लगे हैं।

उत्तराखंड काडर के इन आईएएस और आईपीएस के रिश्तेदारों पर एफआईआर

एम भास्करन उत्तराखंड काडर के आईएएस के ससुर हैं जिन पर एफआईआर दर्ज हुई है। मूल रूप से चेन्नई तमिलनाडु के रहने वाले ये ताकतवर आईएएस आजकल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘ब्लू आईड’ यानी मोस्ट भरोसेमंद आईएएस अफसर बने हुए हैं।
दूसरे आईएएस भी अहम विभागों को सम्भालते हुए मुख्यमंत्री धामी के चहेतों में शुमार करते हैं। एफआईआर में यूपी कैडर के रिटायर्ड आईएएस केएम संत को भी सह आरोपी बनाया गया है। यूपी के अलीगढ़ के रहने वाले संत के पुत्र उत्तराखंड काडर के आईएएस अफसर हैं।

एफआईआर में बिहार के गया के पूर्व कांग्रेस सांसद रामस्वरूप राम की पत्नी सरस्वती देवी को भी सह आरोपी बनाया गया है। सरस्वती देवी उत्तराखंड काडर के एक आईपीएस की माँ हैं।

खास बात यह है कि ये तीनों उत्तराखंड के नौकरशाह हरिद्वार जिले में डीएम और कप्तान के रूप में तैनात रहे। इसका मतलब यही कि गैंगस्टर और भू-माफिया यशपाल तोमर का गढ़ हरिद्वार रहा और इन अफसरों ने कितना फायदा उठाया या भू-माफिया पर एक्शन लिया होगा अंदाज़ा लगा सकते हैं।

एफआईआर में गिरीश वर्मा का नाम भी सह आरोपी के रूप में दर्ज है, जो इस जमीन घोटाले के समय यूपी के तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी का खास रहा और अनुसूचित जाति के जमीन पट्टों के लैंड यूज चेंज कराने में अहम रोल इसी का रहा था।

जाहिर है नौकरशाही में बड़े संपर्क बनाकर और सुरा-सुंदरियों का सहारा लेकर ही भू-माफिया और गैंगस्टर यशपाल तोमर ने अवैध जमीन कब्जाने का ऐसा तिलिस्म बनाया कि करोड़ों का काला साम्राज्य खड़ा कर लिया। अब योगी राज में आगाज तो ज़बरदस्त हुआ है लेकिन क्या यशपाल तोमर के साथ साथ ये रसूखदार भी सलाखों के पीछे भेजे जा सकेंगे? बड़ा सवाल यह भी कि क्या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नौकरशाही के घड़ियालों की घेराबंदी कर पाएंगे?


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