
- Uttarakhand Congress Nyay Yatra: बदरीनाथ से गोल्ज्यू और टपकेश्वर तक कांग्रेस, 27 अक्टूबर को गैरसैंण घेराव

कांग्रेस द्वारा जारी न्याय यात्रा कार्यक्रम के तहत हरिद्वार क्षेत्र के लिए भी अलग दल शामिल है, जिसकी अगुवाई चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत और अन्य वरिष्ठ नेता कर रहे हैं। इस तरह पार्टी ने एक ही स्थान पर शक्ति प्रदर्शन करने के बजाय प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में एक साथ राजनीतिक गतिविधियां आयोजित करने का रास्ता चुना है।
कांग्रेस की इस रणनीति में दो बातें महत्वपूर्ण हैं। पहली, पार्टी स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय नेतृत्व को आगे रखकर व्यापक जनसंपर्क करना चाहती है। दूसरी, यात्रा के जरिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में उठ रहे सवालों को एक साझा राजनीतिक अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
बदरीनाथ से गणेश गोदियाल ने उठाया चढ़ावे की सुरक्षा का सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में बदरीनाथ धाम से शुरू हुई यात्रा जोशीमठ, पीपलकोटी और चमोली तक पहुंची। गोदियाल ने मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा और पारदर्शी प्रबंधन का सवाल उठाते हुए बदरीनाथ धाम तथा राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे में कथित चोरी या अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
गोदियाल ने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित धन किसी व्यक्ति या संस्था की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि आस्था की अमानत है। यदि किसी स्तर पर अनियमितता, लापरवाही या मिलीभगत हुई है तो उसकी जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। दरअसल, यह मुद्दा कांग्रेस की यात्रा को धार्मिक आस्था और सार्वजनिक जवाबदेही के सवालों से जोड़ता है।
गोदियाल ने पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोगों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है, जबकि जंगली जानवरों के बढ़ते हमले ग्रामीणों के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं।
उन्होंने जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा, भू-माफिया की गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकारों को भी यात्रा के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया। कांग्रेस का कहना है कि पर्वतीय राज्य की मूल समस्याओं का समाधान किए बिना विकास के दावों को पूरा नहीं माना जा सकता।
गोल्ज्यू मंदिर से कुमाऊं में उतरे यशपाल आर्य
कुमाऊं क्षेत्र में न्याय यात्रा की शुरुआत अल्मोड़ा स्थित गोल्ज्यू मंदिर से हुई। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रकाश जोशी, करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और विधायक तिलकराज बेहड़ सहित अन्य नेता अभियान में शामिल हुए।
इस दल ने रानीखेत, खैरना, भवाली और भीमताल होते हुए हल्द्वानी तक जनसंपर्क किया। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नेताओं का स्वागत किया और पदयात्राओं तथा रैलियों के माध्यम से पार्टी ने अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाई।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तराखंड के स्वाभिमान, युवाओं के भविष्य, महिलाओं की सुरक्षा और प्रदेश के विकास से जुड़े सवालों का चुनाव होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी रोजगार, पलायन और बुनियादी सुविधाओं जैसी समस्याएं पूरी तरह दूर नहीं हो पाई हैं।
यशपाल आर्य ने सरकारी भर्तियों में कथित घोटालों और पेपर लीक की घटनाओं को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल बताया। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की मेहनत और भविष्य भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं से प्रभावित होते हैं।
उन्होंने किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और कर्मचारियों की समस्याओं के साथ विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने का आरोप भी लगाया। कांग्रेस का दावा है कि न्याय यात्रा के जरिए इन सवालों को गांवों और शहरों तक ले जाकर सरकार की जवाबदेही तय करने का प्रयास किया जाएगा।
टपकेश्वर महादेव से प्रीतम सिंह का हमला, अंकिता भंडारी प्रकरण पर फिर घिरी सरकार
देहरादून में चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और अन्य पार्टी नेताओं ने टपकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ न्याय यात्रा का शुभारंभ किया। इसके बाद राजपुर और मसूरी विधानसभा क्षेत्रों में पदयात्राएं आयोजित की गईं। देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांधी पार्क, घंटाघर और पलटन बाजार होते हुए राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स तक जनसंपर्क किया। मसूरी क्षेत्र में भी पदयात्रा निकाली गई। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी न्याय यात्रा में शामिल हुए।
प्रीतम सिंह ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी भर्तियों में पेपर लीक और अनियमितताओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है तथा आम लोगों को अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
महिला सुरक्षा के सवाल पर प्रीतम सिंह ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में न्याय की मांग आज भी प्रदेश की जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल बनी हुई है। उन्होंने महिला अपराधों को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
जैसा कि विदित है कि अंकिता भंडारी प्रकरण उत्तराखंड की राजनीति में लगातार संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। कांग्रेस इसे महिला सुरक्षा, न्याय और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर उठा रही है। इस मुद्दे को न्याय यात्रा में प्रमुखता देना पार्टी की राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा है।
प्रीतम सिंह ने बढ़ती महंगाई से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ने वाले असर का मुद्दा भी उठाया। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की।
गैरसैंण में 27 अक्टूबर को विधानसभा घेराव, सड़क से सदन तक सरकार की घेराबंदी की तैयारी
उत्तराखंड कांग्रेस की न्याय यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव गैरसैंण है। कांग्रेस ने 27 अक्टूबर को विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित किया है। पार्टी की योजना है कि यात्रा के दौरान उठाए जा रहे मुद्दों को सड़क पर जनसंपर्क और विरोध-प्रदर्शनों के साथ विधानसभा के भीतर भी उठाया जाए।
प्रदेश कांग्रेस के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में यात्रा और जनसंपर्क अभियान के बाद पार्टी के नेता तथा कार्यकर्ता भारी संख्या में गैरसैंण में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। इस कार्यक्रम को अंकिता भंडारी प्रकरण, भ्रष्टाचार, भर्ती अनियमितताओं और जनहित से जुड़े सवालों पर सरकार को घेरने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के गैरसैंण का राजनीतिक और भावनात्मक महत्व भी है। उत्तराखंड की राजधानी और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े सवालों पर यहां होने वाली राजनीतिक गतिविधियों को विशेष महत्व मिलता रहा है। ऐसे में विधानसभा घेराव कांग्रेस को अपने मुद्दे प्रदेशव्यापी स्तर पर उठाने का अवसर देगा।
हालांकि, इस कार्यक्रम की असल राजनीतिक ताकत का आकलन इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या, नेताओं द्वारा उठाए जाने वाले सवालों और फिर उस पर भाजपा सरकार की प्रतिक्रिया के आधार पर हो सकेगा।
भाजपा के खिलाफ लगातार हमलावर होती कांग्रेस
न्याय यात्रा में कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पलायन और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को एक साथ उठाया है। ये ऐसे विषय हैं जिनका संबंध प्रदेश के अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों से है।
जाहिर है यह सब साफ संदेश दे रहा है कि चुनाव सामने देखकर कांग्रेस पहले से कहीं अधिक हमलावर होकर भाजपा सरकार की घेराबंदी में जुट गई है। कांग्रेस की न्याय यात्रा और विधानसभा घेराव अभियान को देखते हुए अब भाजपा सरकार पर भारी दबाव है कि वह अपनी नीतियों तथा उपलब्धियों को न केवल जनता के सामने पेश करे बल्कि विपक्षी हमलों का जवाब भी देकर दिखाए। खासकर रोजगार, महिला सुरक्षा, भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और पर्वतीय क्षेत्रों में सुविधाओं जैसे मुद्दों पर जनता के सवाल चुनावी बहस को प्रभावित करने का असर रखते हैं। लिहाजा भाजपा को कांग्रेस के हर हमले का उसी अंदाज़ में जवाब देना होगा।
2027 के सियासी संग्राम का ट्रेलर!
उत्तराखंड में अगले साल के शुरू में ही विधानसभा चुनाव होने हैं लिहाजा अब ज़्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में सत्ताधारी भाजपा को अपनी हर छोटी बड़ी उपलब्धि को जनता के सामने लाना होगा तो वहीं विपक्ष के लिए चुनौती है कि वह सरकार की नाकामियों को उजागर करने में बिल्कुल भी न चूके। कांग्रेस अपनी न्याय यात्रा के जरिए जहां प्रदेशव्यापी जनसंपर्क और सरकार विरोधी मुद्दों को धार देने में लगी है, वहीं यात्रा में अपने सभी वरिष्ठ नेताओं को उतारकर एकजुटता का संदेश भी देना चाह रही है।
इतना ही नहीं धार्मिक स्थलों से यात्रा की शुरुआत कर कांग्रेस ने अपने इस सरकार विरोधी अभियान को एक ख़ास राजनीतिक पहचान देने की कोशिश भी की है। अंकिता भंडारी प्रकरण, रोजगार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाकर वह सरकार को घेरने की रणनीति पर चल रही है।
अब सबसे अहम सवाल यह होगा कि क्या कांग्रेस इस यात्रा के जरिए इन मुद्दों को व्यापक जनसमर्थन में बदल पाएगी? क्या विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ चल रहा अभियान पार्टी संगठन में नई ऊर्जा भर पाएगा? और क्या 27 अक्टूबर का गैरसैंण विधानसभा घेराव इस राजनीतिक मुहिम को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा?
ज़ाहिर है कि इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। फिलहाल, उत्तराखंड न्याय यात्रा के जरिए कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार को घेरने की दिशा में अपनी राजनीतिक रफ्तार और तेज कर दी है।



