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उत्तराखंड में ट्राउट फार्मिंग प्रोत्साहन के लिए मंत्री सौरभ बहुगुणा ने लांच की सीबीडीसी की नई प्रणाली

15 महीनों में आईटीबीपी को 30.70 टन ट्राउट मछली की आपूर्ति हो चुकी: मत्स्य पालन मंत्री

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देहरादून। देश के फ़िशरीज सेक्टर में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा की अगुआई में उत्तराखंड के मत्स्य पालन विभाग ने एक और बड़ी पहल शुरू कर दी है। मत्स्य पालन मंत्री बहुगुणा प्रदेश में ट्राउट फार्मिंग को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने ट्राउट प्रोत्साहन योजना के तहत सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के माध्यम से लाभ हस्तांतरण की नई प्रणाली लॉचिंग की। ट्राउट फार्मिंग के विकास के लिए लांच की गई इस नई प्रणाली की लागत 170 करोड़ रुपए बताई जा रही है। ज्ञात हो कि भारत में फिशरीज सेक्टर के अन्तर्गत CBDC के माध्यम से संचालित होने वाली यह पहली योजना हो गई है। साथ ही, मत्स्य विभाग तथा नेशनल बिल्डिंग कन्स्ट्रक्शन कोरपोरेशन लिमिटेड के बीच राज्य में नमामि गंगे एक्वेरियम-कम-डिस्कवरी लर्निंग सेन्टर परियोजना की डी०पी०आर० तैयार करने के लिए एम०ओ०यू० साइन किए गए हैं। इसकी अनुमानित लागत  250-300 करोड़ रुपए होगी।

कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि उत्तराखण्ड में ट्राउट फार्मिंग सेक्टर में बीते वर्षों में कई बड़े कार्य हुए हैं जिसके फलस्वरूप राज्य में वर्ष 2020-21 के वार्षिक ट्राउट उत्पादन 148 मीट्रिक टन के मुक़ाबले 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आज उत्पादन बढ़कर 710 मीट्रिक टन हो गया है। उन्होंने कहा कि ट्राउट उत्पादन को बढ़ाने के साथ ही मार्केटिंग के लिए सरकार के प्रयास से मछलियों की सप्लाई को लेकर अनुबंध किया गया है। बहुगुणा ने कहा कि पिछले 15 महीनों में आई०टी०बी०पी० को 30.70 टन ट्राउट मछली की आपूर्ति हो चुकी है।

बहुगुणा ने बताया कि 170 करोड़ रुपए की लागत से “ट्राउट प्रोत्साहन योजना” प्रारम्भ की गई है। योजना के माध्यम से इण्टीग्रेटेड रेसवेज यूनिट, मिनी हैचरी, कोल्ड चेन डेवलपमेंट के कार्य किए जाएंगे तथा मत्स्य पालकों को पांच वर्षों तक इनपुट एवं हैण्डहोल्डिंग स्पॉट दिया जाएगा। योजना आने वाले वर्षों में ट्राउट फार्मिंग सेक्टर को मजबूती देगी और पर्वतीय क्षेत्र में पलायन को कम करने में भी कारगर सिद्ध होगी।
मत्स्य पालन मंत्री ने यह भी बताया कि अब तक हम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुँचाते थे। यह व्यवस्था बिचौलियों को हटाने और लीकेज कम करने में कारगर सिद्ध हुई है। उन्होंने कहा कि अब इसी यात्रा को एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) की नई प्रणाली प्रारम्भ की गई है। CBDC पूरी तरह सुरक्षित, भरोसेमंद और कानूनी मान्यता प्राप्त माध्यम है। इस नई व्यवस्था के तहत योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में तुरंत, सटीक और बिना किसी देरी के पहुँच सकेगा। मंत्री बहुगुणा ने  आगे कहा कि यह पहल सरकार की डिजिटल राज्य, वित्तीय समावेशन और सुशासन के संकल्प को और सुदृढ़ करती है। इस दौरान विभिन्न जिलों के प्रगतिशील मत्स्य पालकों को पुरूस्कृत किया गया तथा आपदा से हुए नुकसान के सापेक्ष बीमा राशि के चेक भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में राजपुर रोड विधायक खजान दास, उत्तराखण्ड राज्य मत्स्य पालक विकास अभिकरण के उपाध्यक्ष उत्तम दत्ता,
मत्स्य पालन सचिव डॉ. बी०वी०आर०सी० पुरूषोत्तम, निदेशक मत्स्य चन्द्र सिंह धर्मशक्तू सहित अधिकारी एवं मछली पालक मौजूद थे।
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