UKSSSC Paper Leak Scam: यशपाल आर्य ने क्यों कहा नकल सिंडिकेट के सत्ता से सीधे संबंध, गिरफ्तारियां आंखों में धूल झोंकना मकसद नकल गिरोह को बचाना

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जांच के नाम पर चूहे-बिल्ली का खेल खेल रही धामी सरकार: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य

Paper Leak कांड के आरोपी पा रहे जमानत, विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

Uttarakhand News Yashpal Arya attacks Dhami Govt on UKSSSC paper leak matter: UKSSSC PAPER LEAK SCAM को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एसटीएफ लगाकर नकल माफिया की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां कराई लेकिन अब अदालत पहुंचकर धामी सरकार की सारी मेहनत पर वकीलों की कमजोर पैरवी से पानी फिरने लगा है। अब तक एसटीएफ द्वारा अरेस्ट किए गए 41 आरोपियों में से 18 आरोपी अदालत के रास्ते जमानत पाकर खुले आसमान तले सांस ले रहे हैं जिनमें नौ पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन अदालत में एक झटके में आरोपियों को धड़ाधड़ जमानत मिल रही जिसे लेकर अब विपक्ष खासकर कांग्रेस आक्रामक हो धामी सरकार पर हमला बोल रही है।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने एक लिखित प्रेस बयान जारी कर गंभीर आरोप लगाया है कि चूंकि राज्य में सक्रिय नकल सिंडिकेट के सीधे संबंध सत्ताधारी दल और उच्च अधिकारियों से हैं इसलिए गिरफ्तारियां सिर्फ जनता और बेरोजगार युवाओं की आंखों में धूल झोंकने के लिए की गई थी। असल एजेंडा कानूनी पेचीदगियों में मामले को उलझाकर आरोपियों को बचाने का है और अब ये तमाम आशंकाएं आरोपियों को एक के बाद एक मिल रही जमानत से सच साबित हो रही हैं।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा है कि स्नातक स्तर की परीक्षा के पेपर लीक मामले में एसटीएफ द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजे गए आधे से अधिक अभियुक्तों के जमानत पर छूटने से इस मामले में संघर्ष कर रहे बेरोजगार युवाओं और कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों की आशंकाएं सत्य सिद्ध हो रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया है, “नकल सिंडिकेट का सीधा संबंध सत्ताधारी दल और राज्य के उच्च अधिकारियों से निकला था। मामला खुलने के बाद ही उनमें से कुछ का सत्ता दल से निष्कासन भी किया गया था। इसलिए राज्य के हर जागरूक नागरिक का मानना था कि देर-सबेर कानूनी पेचीदगियों में फंसा कर इस नकल गिरोह को बचा लिया जाएगा।”

यशपाल आर्य ने कहा, “राज्य के इतिहास में पकड़े गए सबसे बड़े नकल के इस मामले के अभियुक्तों की जमानत साधारण मामलों से भी आसानी और जल्दी होने के बाद विपक्ष के आरोपों और जनता की आशंकाओं की पुष्टि हुई है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनता और बेरोजगार सब जानते थे कि जांच और गिरफ्तारियों के नाम पर उनकी आंखों में धूल झोंकी जा रही है। इसलिए मामला खुलने के बाद से ही नकल और पेपर लीक के सभी मामलों की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की जा रही थी। यशपाल आर्य ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि इस पेपर लीक घोटाले में सरकार असली गिरोह और उसे राजनीतिक संरक्षण देने वालों को बचाना चाहती थी, इसलिए सरकार ने बेरोजगारों और विपक्ष की इस मांग को अनसुना कर दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने जिलों से लेकर नैनीताल उच्च न्यायालय और दिल्ली तक सरकारी वकीलों की एक बड़ी फौज पालीu हुई है। इसके अलावा सरकार, पुलिस और अभियोजन इस संवेदनशील मामले में देश के नामी- गिरामी वकीलों की राय भी ले सकते थे। आर्य ने पूछा कि अब सरकार को बताना चाहिए कि नकल जैसे सनसनीखेज मामले में सरकार, पुलिस और अभियोजन की कार्यप्रणाली ने क्या सिद्ध नहीं किया है कि वे जांच के नाम पर सिर्फ दिखावा कर रहे थे?

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि सैकड़ों करोड़ के इन भर्ती घोटालों में पुलिस केवल कुछ लाख रुपयों की ही बरामदगी कर पाई है और अभी तक पुलिस नकल करा कर कमाए धन से अर्जित किसी भी सम्पति को सील नही कर पाई है। उन्होंने सवाल पूछा कि देश में विपक्ष की सरकारों वाले राज्यों में किसी भी छोटे मामले में पहुंचने वाली सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां इतने बड़े मामले में अभी तक क्यों नहीं पहुंची हैं? जबकि हर दिन राज्य में आने वाले केंद्रीय मंत्रियों द्वारा डबल इंजन सरकार का ढोल पीटा जाता रहा है। उन्होंने कहा कि हाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उत्तराखंड के दौरे में नकल सहित हर महत्वपूर्ण मामले के संज्ञान न लेने से भी सिद्ध होता है कि सत्ताधारी दल किसी न किसी को बचाने के लिए जांच के नाम पर चूहे-बिल्ली का खेल कर रहा है।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार को ये भी साफ करना चाहिए कि इन हालातों में वह राज्य के बेरोजगारों को भविष्य में आयोजित होने वाली परीक्षाओं में निष्पक्षता की क्या गारंटी देगी ?


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