
- उत्तराखंड में करीब 7 हजार बीघा सरकारी जमीन को लेकर सियासत गरमा गई है। यशपाल आर्य ने धामी सरकार से पूछा- सरकारी जमीन के व्यावसायिक उपयोग के पीछे किसका हित है?
देहरादून | 3 सितंबर 2026 । उत्तराखंड में करीब 7 हजार बीघा सरकारी जमीन को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने धामी सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि UIIDB के माध्यम से इतनी बड़ी सरकारी भूमि को व्यावसायिक उपयोग और नीलामी की दिशा में ले जाने की तैयारी की जा रही है। आर्य ने सरकार से पूछा है कि आखिर इस पूरी कवायद से किसके हित साधे जा रहे हैं?
‘जनता की जमीन किसी की निजी संपत्ति नहीं’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकारी जमीन भाजपा या किसी सत्ताधारी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की जनता की साझा धरोहर है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि के इस्तेमाल से जुड़ा फैसला बंद कमरों में चुनिंदा लोगों के हित में नहीं होना चाहिए।
आर्य ने कहा कि 7 हजार बीघा जमीन कोई मामूली संपत्ति नहीं है। उत्तराखंड जैसे सीमित भू-संसाधनों वाले राज्य में इतनी बड़ी सरकारी भूमि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सवाल उठाया कि इस जमीन का इस्तेमाल स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, विश्वविद्यालय, खेल सुविधाओं, सरकारी संस्थानों, रोजगारपरक परियोजनाओं और अन्य जनहितकारी योजनाओं के लिए क्यों नहीं किया जा सकता?
रोजगार-पलायन से लेकर जमीन तक सरकार को घेरा
यशपाल आर्य ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन, महंगाई और मूलभूत सुविधाओं जैसे मुद्दे पहले से गंभीर हैं। ऐसे समय में हजारों बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी पर सरकार को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
उन्होंने आशंका जताई कि जमीन के व्यावसायीकरण के नाम पर सत्ता के करीबियों और चुनिंदा पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की पटकथा तो तैयार नहीं की जा रही है?
‘उत्तराखंड की जमीन पर पहला अधिकार जनता का’
आर्य ने कहा कि “उत्तराखंड की जमीन पर पहला अधिकार उत्तराखंड की जनता का” है। उन्होंने कहा कि राज्य की जमीन, जंगल, जल और प्राकृतिक संसाधन केवल वर्तमान पीढ़ी की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पूंजी भी हैं।
उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में स्थानीय लोग जमीन, रोजगार और पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहां हजारों बीघा सरकारी जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल का फैसला स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस सड़क से सदन तक उठाएगी मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर सरकारी संपत्ति की संभावित बंदरबांट नहीं होने देगी। यदि सरकार ने जनता की जमीन को निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की तो कांग्रेस हर स्तर पर इसका विरोध करेगी।
आर्य ने सरकार से सवाल किया कि “7 हजार बीघा सरकारी जमीन के पीछे आखिर किसका हित छिपा है?”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता की जमीन की चौकीदार है और इस मुद्दे को सड़क से सदन तक पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा।
सरकार से प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग
यशपाल आर्य ने सरकार से मांग की कि इस मामले में पूरी प्रक्रिया तत्काल सार्वजनिक की जाए और जनता के सामने स्थिति स्पष्ट की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की तो कांग्रेस प्रदेशव्यापी स्तर पर इस मुद्दे को लेकर जनआंदोलन खड़ा करेगी।
आर्य ने कहा कि उत्तराखंड की बेशकीमती सरकारी जमीन को किसी भी कीमत पर ‘बिकाऊ माल’ नहीं बनने दिया जाएगा।
यहाँ पढ़िए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का प्रेस बयान हुबहू –
7 हजार बीघा सरकारी जमीन पर धामी सरकार को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य
की खुली चुनौती
“जनता की जमीन को सत्ता के करीबियों की जागीर नहीं बनने देंगे, सरकार बताए किसके हित में हो रहा है खेल?”-यशपाल आर्य
नेता प्रतिपक्ष श्री यशपाल आर्य ने प्रदेश की लगभग 7 हजार बीघा सरकारी जमीन को UIIDB के माध्यम से व्यावसायिक उपयोग और नीलामी की दिशा में ले जाने को लेकर धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन को किसके हित में व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।
श्री आर्य ने कहा कि सरकारी जमीन भाजपा या किसी सत्ताधारी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है। यह उत्तराखंड की जनता की साझा धरोहर है। जनता की जमीन पर फैसला बंद कमरों में बैठकर कुछ चुनिंदा लोगों के हित में नहीं किया जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में एक ओर सरकार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन, महंगाई और मूलभूत सुविधाओं जैसे गंभीर सवालों पर जनता को जवाब देने में विफल है, वहीं दूसरी ओर हजारों बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा जमीन के व्यावसायीकरण के नाम पर सत्ता के करीबियों और चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की पटकथा तैयार की जा रही है? उन्होंने कहा कि 7 हजार बीघा जमीन कोई मामूली संपत्ति नहीं है। उत्तराखंड जैसे सीमित भू-संसाधनों वाले राज्य में इतनी बड़ी सरकारी भूमि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस जमीन का उपयोग स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, विश्वविद्यालय, खेल सुविधाओं, सरकारी संस्थानों, रोजगारपरक परियोजनाओं और जनहित की अन्य योजनाओं के लिए किया जा सकता है।
श्री आर्य ने कहा की “उत्तराखंड की जमीन पर पहला अधिकार उत्तराखंड की जनता का” है। भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि उत्तराखंड केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है। यहां की जमीन, जंगल, जल और प्राकृतिक संसाधन इस प्रदेश की पहचान और आने वाली पीढ़ियों की पूंजी हैं।
उन्होंने कहा कि जिस राज्य में स्थानीय लोग जमीन, रोजगार और पलायन की समस्या से जूझ रहे हैं, वहां हजारों बीघा सरकारी जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल का फैसला स्वीकार नहीं किया जा सकता।
श्री आर्य ने कहा कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर सरकारी संपत्ति की संभावित बंदरबांट नहीं होने देगी। यदि सरकार ने जनता की जमीन को निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की तो कांग्रेस पार्टी इसका हर स्तर पर विरोध करेगी। भाजपा सरकार को बताना होगा कि 7 हजार बीघा सरकारी जमीन के पीछे आखिर किसका हित छिपा है। कांग्रेस जनता की जमीन की चैकीदार है और इस मुद्दे को सड़क से सदन तक पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा।”
नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि सरकार को इस मामले में तत्काल पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करनी होगी और जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी होगी, अन्यथा कांग्रेस पार्टी प्रदेशव्यापी स्तर पर इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ जनआंदोलन खड़ा करेगी।
श्री यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड की बेशकीमती सरकारी जमीन को किसी भी कीमत पर ‘बिकाऊ माल’ नहीं बनने दिया जाएगा। जनता की संपत्ति की रक्षा करना कांग्रेस की जिम्मेदारी है और इसके लिए सड़क से सदन तक निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।




