
- उत्तराखंड इन्वेस्टर समिट पर राहुल गांधी का हमला, धामी सरकार ने दिया ₹1.01 लाख करोड़ के निवेश का हिसाब
- 3,300 निवेशकों की सूची पर क्यों मचा है घमासान?
देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार के ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दावों पर सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को न्यूज़लॉन्ड्री की एक पुरानी खोजी रिपोर्ट साझा करते हुए सरकार पर निवेश के आंकड़ों में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। इसके जवाब में उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय ने कहा कि उत्तराखंड में अब तक ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है और परियोजनाओं का विवरण सरकारी पोर्टलों पर सार्वजनिक है।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से करीब 3,300 निवेशकों की पूरी सूची और उनसे जुड़ी परियोजनाओं का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि निवेश की स्थिति को लेकर आंकड़े उपलब्ध हैं और तथ्यों की पूरी जानकारी के बिना भ्रामक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
राहुल गांधी ने इन्वेस्टर समिट पर क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने 18 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर न्यूज़लॉन्ड्री की 8 जुलाई 2026 को प्रकाशित पड़ताल साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर 2023 में आयोजित उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान 1,779 एमओयू के जरिए ₹3.56 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों का दावा किया गया था। इन निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आयोजित रोड शो पर करीब ₹100 करोड़ खर्च किए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि सरकार जिस निवेश को धरातल पर उतरा बता रही है, उसकी सूची में किन संस्थानों और कारोबारियों को शामिल किया गया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ आटा चक्कियों, खाद-बीज की दुकानों और छोटे क्लीनिकों को भी निवेशकों में गिना गया, जबकि कुछ कारोबारियों को सूची में अपना नाम शामिल होने की जानकारी तक नहीं थी।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकारी बिजली कंपनियों से जुड़ी परियोजनाओं के बड़े हिस्से को निवेश के आंकड़ों में शामिल करने का आधार क्या है। राहुल गांधी ने इन दावों को भाजपा के डबल इंजन मॉडल पर सवाल बताते हुए निवेश और रोजगार के वास्तविक नतीजों का हिसाब मांगा।
हालांकि, न्यूज़लॉन्ड्री की पड़ताल में सामने आए मामलों को पूरी निवेश सूची का ऑडिट नहीं बताया गया था। रिपोर्ट ने कुछ परियोजनाओं और निवेशकों के उदाहरणों के आधार पर सरकारी ग्राउंडिंग के दावों की जांच की थी।
उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय ने क्या दिया जवाब?
उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय ने कहा कि उत्तराखंड में निवेश से संबंधित आंकड़े उद्योग विभाग, यूके स्पाइस और सिंगल विंडो सिस्टम के पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इनमें परियोजनाओं, संबंधित विभागों और उनके स्थान का विवरण दर्ज है।
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में आयोजित समिट के दौरान करीब ₹3.56 लाख करोड़ के निवेश समझौते हुए थे। इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए समय-समय पर ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की गईं। सरकार के अनुसार, अब तक ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है।
सचिव पांडेय ने कहा कि यह मुद्दा पहले भी सोशल मीडिया पर उठाया गया था और सरकार ने सदन में भी निवेश की स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि परियोजनाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाए और उद्यमियों से बातचीत के बाद तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाए।
आटा चक्की और छोटी दुकानों को निवेश मानने पर क्या बोले सचिव?
निवेश सूची में छोटे कारोबारियों को शामिल करने पर उठ रहे सवालों के बीच पांडेय ने कहा कि निवेश का महत्व केवल उसकी रकम से नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाले रोजगार और आजीविका के अवसरों से भी तय होता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई स्थानीय व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से ₹10 हजार लगाकर छोटा कारोबार शुरू करता है और उससे दो लोगों को रोजगार मिलता है, तो यह भी राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है।
उनके मुताबिक, आटा चक्की, मोबाइल दुकान या दूसरे छोटे व्यवसाय को निवेश की श्रेणी में शामिल किए जाने पर सवाल उठाना स्थानीय उद्यमियों के परिश्रम और आत्मनिर्भर बनने की भावना को कमतर आंकने जैसा है। सरकार का उद्देश्य बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों और स्थानीय निवेशकों को भी प्रोत्साहित करना है।
24 हजार करोड़ के निवेश की अगली ग्राउंडिंग की तैयारी
उद्योग सचिव ने बताया कि उत्तराखंड सरकार करीब 24 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की ग्राउंडिंग की तैयारी कर रही है। इससे संबंधित विवरण सिंगल विंडो सिस्टम पर उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही चौथी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की जाएगी।
सरकार का दावा है कि निवेशकों की सहायता के लिए निवेश मित्रों की व्यवस्था की गई है, जो परियोजनाओं को आगे बढ़ाने, सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराने और निवेशकों के साथ संवाद बनाए रखने में मदद करते हैं।
अब निवेश के आंकड़ों की पारदर्शिता पर निगाहें
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट को लेकर उठा विवाद अब केवल एमओयू की कुल रकम तक सीमित नहीं है। बहस इस बात पर है कि घोषित निवेश प्रस्तावों में से वास्तव में कितना निवेश आया, ग्राउंडिंग की सरकारी सूची में शामिल परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति क्या है और उनसे कितने रोजगार पैदा हुए हैं।
सरकार ने निवेश के आंकड़े सार्वजनिक पोर्टलों पर उपलब्ध होने की बात कही है। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने सभी निवेशकों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। ऐसे में परियोजनावार निवेश, वास्तविक पूंजीगत खर्च, शुरू हुए उद्योगों और रोजगार सृजन के सत्यापन योग्य आंकड़े इस विवाद को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की सफलता का अंतिम पैमाना केवल एमओयू की रकम नहीं, बल्कि धरातल पर उतरा निवेश, शुरू हुई परियोजनाएं और उनसे पैदा हुए रोजगार होंगे। फिलहाल धामी सरकार ने पुराने निवेश और 24 हज़ार करोड़ रुपये के नए निवेश को लेकर जोरदार प्रतिक्रिया दी है। देखना होगा इस मुद्दे पर छिड़ा विवाद यही खत्म होता है या फिर विपक्ष की ओर से फिर हमला बोला जाता है।



