
- निर्माण श्रमिकों के लिए उत्तराखंड का हेल्थ मॉडल, 60 हजार की जांच के बाद यूपी की टीम ने किया अध्ययन
- श्रमिकों की सेहत पर धामी सरकार का फोकस, मोबाइल मेडिकल वैन से हो रहीं 44 तरह की जांच
- उत्तराखंड के श्रमिक स्वास्थ्य मॉडल को यूपी ने परखा, अब अपने राज्य में लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा
देहरादून। उत्तराखंड में निर्माण श्रमिकों को कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत अब तक करीब 60 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। योजना के तहत श्रमिकों को एक्स-रे, ईसीजी समेत 44 प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श की सुविधा दी जा रही है। उत्तराखंड की इसी व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश के अधिकारियों की एक टीम देहरादून पहुंची।
उत्तर प्रदेश के अपर श्रमायुक्त जुनैद अहमद के नेतृत्व में आई टीम ने योजना की कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्था और इसके क्रियान्वयन के तौर-तरीकों की जानकारी ली। बैठक में उत्तराखंड के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए निर्माण श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
जुलाई में शुरू हुई थी योजना, दो मोबाइल मेडिकल वैन को दिखाई थी हरी झंडी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में श्रमिक कल्याण योजनाओं का शुभारंभ किया था। इसी दौरान उन्होंने श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए दो मोबाइल मेडिकल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
इस पहल का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल और आवास स्थल पर ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें जांच के लिए अलग से स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने की परेशानी न उठानी पड़े। योजना के तहत 44 प्रकार की मुफ्त जांच के साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
गंभीर बीमारी मिलने पर इलाज और रेफरल की व्यवस्था
योजना के तहत केवल स्वास्थ्य जांच तक सीमित रहने के बजाय गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान और जरूरत पड़ने पर बेहतर चिकित्सा संस्थानों तक श्रमिकों को पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
उत्तराखंड के श्रमायुक्त एवं उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव प्रकाश चन्द्र दुम्का ने उत्तर प्रदेश की टीम को योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके पात्र आश्रितों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा देने के साथ चिकित्सकीय परामर्श तथा आवश्यकता के अनुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफरल की व्यवस्था की गई है।
बिना अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के 60 हजार श्रमिकों तक पहुंची सुविधा
श्रमायुक्त के अनुसार, राज्य में उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं के प्रभावी उपयोग से अब तक करीब 60 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा दी जा चुकी है। योजना के संचालन में तकनीकी नवाचार, बेहतर प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की भूमिका अहम रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि जांच में किसी बीमारी की पहचान होने पर संबंधित श्रमिक के समुचित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पात्र श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर भी जोर दिया था।
यूपी की टीम ने किन व्यवस्थाओं की जानकारी ली?
उत्तर प्रदेश से आए अधिकारियों ने योजना के तहत श्रमिकों के पंजीकरण और सत्यापन, स्वास्थ्य जांच शिविरों के संचालन, जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने, गंभीर बीमारियों की पहचान तथा उपचार के लिए रेफरल की प्रक्रिया को समझा। इस अध्ययन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में भी इसी प्रकार की व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं का आकलन करना रहा।
उत्तराखंड सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। उत्तर प्रदेश की टीम का यह दौरा श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में दोनों राज्यों के बीच अनुभव साझा करने और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक में उप श्रमायुक्त विपिन कुमार और वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ दुर्गा चमोली भी मौजूद रहीं।



