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अप्रैल में फरवरी जैसी ठंड: उत्तराखंड समेत उत्तर भारत में मौसम का उलटफेर, जानिए कब लौटेगी गर्मी

11 अप्रैल के बाद एक और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना

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देहरादून। अप्रैल का महीना आमतौर पर गर्मी की दस्तक का संकेत देता है, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल उलट है। उत्तराखंड सहित पूरे उत्तर भारत में मौसम ने ऐसा करवट ली है कि अप्रैल में फरवरी जैसी ठंड महसूस की जा रही है। सुबह-शाम ठंडी हवाएं, दिन में बादल और बीच-बीच में बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने लोगों को फिर से हल्की सर्दी का एहसास करा दिया है।

उत्तराखंड के देहरादून, मसूरी, नैनीताल और ऊंचाई वाले पहाड़ी जिलों में तापमान सामान्य से 8 से 15 डिग्री सेल्सियस तक नीचे दर्ज किया गया है। कई इलाकों में तेज गर्जना के साथ बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। पर्यटन स्थलों पर पहुंचे सैलानियों के लिए मौसम सुहावना जरूर बना है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह असामान्य बदलाव परेशानी का कारण बन रहा है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस बदलाव की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ ( Western Disturbance) है। 7 और 8 अप्रैल को यह सिस्टम अपने चरम पर रहा, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में व्यापक असर देखने को मिला।

पश्चिमी विक्षोभ: क्या है वजह? समझिए पूरा सिस्टम
पश्चिमी विक्षोभ एक कम दबाव वाला चक्रवाती तंत्र होता है, जो भूमध्यसागर क्षेत्र से उत्पन्न होकर पाकिस्तान के रास्ते उत्तर भारत तक पहुंचता है। आमतौर पर यह सर्दियों में सक्रिय रहता है, लेकिन इस बार मार्च और अप्रैल में भी इसकी असामान्य सक्रियता देखने को मिली है। सिर्फ दो महीनों में करीब 8 पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे हैं, जो इस बदलाव की बड़ी वजह हैं।

उत्तराखंड में इसका असर और भी ज्यादा इसलिए दिख रहा है क्योंकि पहाड़ी इलाकों में ठंडी हवाएं तेजी से असर डालती हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी जैसी स्थितियां भी बन रही हैं, जबकि निचले इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है।

अरब सागर से मिल रही “ऊर्जा

इस बार मौसम की तीव्रता बढ़ने के पीछे एक और अहम कारण है—अरब सागर से आ रही नमी। राजस्थान के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र ने समुद्र से नम हवाओं को खींचा, जो पश्चिमी विक्षोभ के साथ मिलकर भारी बादल और गरज-चमक वाले तूफान का कारण बने। यही वजह है कि सामान्य बारिश की जगह ओलावृष्टि और अचानक तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है।

जलवायु परिवर्तन का असर भी साफ

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऊपरी वायुमंडल की जेट स्ट्रीम में बदलाव आ रहा है। आर्कटिक क्षेत्र के तेजी से गर्म होने से यह हवाएं अब ज्यादा लहरदार हो गई हैं, जिससे पश्चिमी विक्षोभ बार-बार और ज्यादा गहराई तक भारत में प्रवेश कर रहे हैं। यही कारण है कि अब अप्रैल-मई जैसे महीनों में भी यह सक्रिय बने हुए हैं।

उत्तराखंड के लिए खास असर

* पहाड़ी जिलों में ठंड और बारिश से जनजीवन प्रभावित
* फलों और गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका
* पर्यटन को मिला बढ़ावा, लेकिन मौसम अनिश्चित
* भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बढ़ा

कब आएगी गर्मी?

 

IMD के अनुसार, 9–10 अप्रैल के बाद बारिश और ओलावृष्टि का दौर खत्म होगा और 11 अप्रैल के बाद एक और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे मौसम सामान्य होने और तापमान बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। यानी असली गर्मी की शुरुआत अब थोड़ी देरी से होगी।

बहरहाल अब तक उत्तराखंड समेत पूरे उत्तर भारत में इस बार अप्रैल का मौसम एक असामान्य ट्रेंड दिखा रहा है। यह केवल एक मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि बदलते जलवायु पैटर्न का संकेत भी हो सकता है जिसे नजरअंदाज करना अब मुश्किल होता जा रहा है।

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