



राजकमल प्रकाशन के मनीष पांडे का कहना है कि मेले की शुरूआत में पाठकों की संख्या कुछ कम थी, लेकिन अब काफी संख्या में पुस्तक प्रेमी पहुंच रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन, राही मसूम रजा, श्रीलाल शुक्ल, काशीनाथ सिंह की रचनाओं की मांग अधिक है। विनसर प्रकाशन के स्टॉल में उत्तराखण्ड के इतिहास, भूगोल, समसामयिकी सहित गढ़वाली कुमाउंनी के प्रमुख रचनाकारों की पुस्तकें मिल रही हैं।
महोत्सव के अंतिम पड़ाव पर प्रकाशक भी पाठकों को किताबों पर 20 से 25 प्रतिशत की आकर्षक छूट दे रहे हैं, ताकि पाठक भी अपनी पसंदीदा किताबें अपने कलेक्शन में शामिल कर सकें।

देहरादून के पाठकों को पसंद आ रहा है गढ़वाली-कुमाउंनी बाल साहित्य
दून पुस्तक महोत्सव में एन.बी.टी. द्वारा एक अभिनव प्रयोग के तहत हिंदी भाषा की लोकप्रिय कहानियों का गढ़वाली-कुमाउंनी अनूदित संस्करण प्रस्तुत किया गया है। गढ़वाली-कुमाउंनी भाषा में रचित लघु कथाएं, चित्रकथाएं, कहानी संग्रह देहरादून के पुस्तक प्रेमियों की पसंद बना हुआ है।

कुमाउंनी भाषा में कहानी संग्रह- बढ़नै जाणी कान, गज्जू हिटण भैगो, हाथी और कुकुर, काथ द्वी कुकरोंकि, तथा भुलिया झन कका जैसी लंबी कहानी सहित जस कै तस, आम वलि चड़ि, स्यू घ्यटल, धनैशा प्वाथलि उड़न सिखौ नामक चित्र कथाएं पाठकों को काफी पसंद आ रही हैं।
वहीं गढ़वाली भाषा बाल साहित्य में गुलाब क दगड़ू, अभिमानै हार जैसी लंबी कहानी, जबकि सिमार वाव् उड्यार, छिपाडु हर मेंढकु, हर्यळि की खेज चित्रकथाएं उपलब्ध हैं। कथा संग्रह के अंतर्गत बौड़ि गेनि म्वारी, चखुल्यूं का चौंळ, तथा हैर्याली अर पाणि, एक बियां अजाण सि, नन्हा हैरा चखुला कहानियां खूब बिक रही हैं।

एन.बी.टी के निदेशक युवराज मलिक का कहना है कि क्षेत्रीय भाषा-साहित्य तथा संस्कृति को प्रोत्साहित करते हुए उत्तराखण्ड को देश और दुनिया के साहित्यिक केन्द्र के रूप में विकसित करना दून बुक फेस्टिवल का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव के सफल आयोजन के लिए वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आभारी हैं, जिनके सहयोग से इस आयोजन की कल्पना फलीभूत हुई है।




