
- देहरादून में 10 हजार युवाओं ने ली नशामुक्ति की शपथ, डीएम आशीष चौहान ने की अपील
देहरादून। नशे के खिलाफ अभियान को युवाओं तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन देहरादून ने बुधवार को ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में नशामुक्ति जागरूकता कार्यशाला आयोजित की। इस दौरान 10 हजार युवाओं को नशे से दूर रहने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ दिलाई गई। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने युवाओं से सकारात्मक एवं रचनात्मक गतिविधियां अपनाने की अपील की, जबकि शिक्षाविद् ललित मोहन जोशी ने कहा कि नशामुक्त समाज की नींव परिवार, संस्कार और शिक्षा से मजबूत होती है।
नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपनी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
नशे से व्यक्ति ही नहीं, पूरा परिवार होता है प्रभावित: डीएम
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि जीवन में सही विकल्पों का चुनाव व्यक्ति के भविष्य की दिशा तय करता है। युवाओं को अपने जीवन में सकारात्मक और रचनात्मक गतिविधियों को प्राथमिकता देनी चाहिए तथा नशे से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करती, बल्कि उसके परिवार और पूरे समाज पर भी प्रतिकूल असर डालती है। इससे बचने के लिए आत्म-अनुशासन, आत्म-नियंत्रण और अपने व्यवहार के प्रति सजग रहना जरूरी है।
जिलाधिकारी ने कहा कि नशे जैसी गंभीर सामाजिक चुनौती से निपटने के लिए सरकार, प्रशासन, पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, अभिभावकों और आम नागरिकों को मिलकर लगातार प्रयास करने होंगे। युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से जिले के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि उन्हें नशे से दूर रखकर सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।
संस्कारयुक्त शिक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारी पर जोर
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सजग इंडिया के संस्थापक एवं CIMS & UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के अध्यक्ष शिक्षाविद् ललित मोहन जोशी ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने की शुरुआत परिवार और संस्कारों से होती है। माता-पिता का सम्मान, परिवार के प्रति जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों की समझ और संस्कारयुक्त शिक्षा युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है और स्वस्थ, शिक्षित, संस्कारवान एवं जागरूक युवा ही राष्ट्र को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। इसके लिए युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल विकास, खेल, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता जैसे सकारात्मक अवसरों से जोड़ना जरूरी है।
ललित मोहन जोशी ने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ उसकी शिक्षा, व्यवहार, करियर और पारिवारिक जीवन को भी प्रभावित करता है। कई परिस्थितियों में यह हिंसा और अपराध जैसी सामाजिक समस्याओं से भी जुड़ सकता है। ऐसे में युवाओं को नशे से बचाना केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने युवाओं से खुद नशे से दूर रहने के साथ अपने मित्रों, परिवारजनों और आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा, “नशामुक्त युवा ही स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत की मजबूत नींव हैं।”
प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों के साझा प्रयासों पर जोर
कार्यक्रम में एडीएम स्मिता परमार और जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित अन्य अधिकारी, विशेषज्ञ एवं वक्ता उपस्थित रहे। एडीएम स्मिता परमार सहित अन्य अधिकारियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।



