Adda स्पेशलNews Buzzन्यूज़ 360

Haridwar Land Scam: धामी सरकार का सबसे बड़ा एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त पर बर्खास्तगी की तलवार; DM कर्मेंद्र सिंह पर मेजर पनिशमेंट

54 करोड़ के हरिद्वार भूमि घोटाले में धामी सरकार का बड़ा प्रहार, IAS अधिकारियों पर कार्रवाई, पूर्व नगर आयुक्त और DM पर गिरी गाज

Share now

उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। हरिद्वार नगर निगम के चर्चित 54 करोड़ रुपये भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराने की मंजूरी दे दी है। पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की संस्तुति और तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह पर मेजर पनिशमेंट की अनुशंसा ने नौकरशाही में हलचल मचा दी है।

  • क्या है हरिद्वार भूमि खरीद घोटाला?
  • विजिलेंस जांच में क्या-क्या सामने आया?
  •  किन 10 लोगों पर दर्ज होगा मुकदमा?
  • पूर्व नगर आयुक्त और DM पर क्या कार्रवाई हुई?
  • क्यों मानी जा रही है यह राज्य की सबसे बड़ी कार्रवाई?
  • धामी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की बड़ी परीक्षा

  • हरिद्वार भूमि घोटाला: 5 बड़ी बातें* 15 करोड़ की जमीन 54 करोड़ में खरीदने का आरोप
    * विजिलेंस जांच में अनियमितताएं प्रथम दृष्टया प्रमाणित
    * 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी
    * पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी की संस्तुति
    * तत्कालीन DM पर मेजर पनिशमेंट

Uttarakhand Land Scam News। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने हरिद्वार भूमि घोटाले में बड़ा प्रहार किया है। 15 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को 54 करोड़ रुपये में खरीदने के आरोपों से जुड़े मामले में विजिलेंस जांच के बाद सरकार ने 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराने की मंजूरी दे दी है। साथ ही तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की संस्तुति और तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह पर मेजर पनिशमेंट की कार्रवाई का फैसला लिया गया है।

यह कार्रवाई इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि राज्य गठन के बाद पहली बार किसी चर्चित भ्रष्टाचार मामले में एक साथ इतने बड़े स्तर पर आईएएस, पीसीएस अधिकारियों और निजी पक्षों पर कानूनी शिकंजा कसा गया है।

15 करोड़ की जमीन, 54 करोड़ का भुगतान और करोड़ों के खेल का आरोप

हरिद्वार नगर निगम ने सराय गांव में कूड़ा निस्तारण केंद्र के विस्तार के लिए लगभग 33 बीघा जमीन खरीदी थी। आरोप है कि जमीन का लैंड यूज बदलवाकर उसका सर्किल रेट कई गुना बढ़ाया गया और फिर नगर निगम को बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर भूमि बेची गई। इसी कथित खेल में सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाने का आरोप है।

विजिलेंस की विस्तृत जांच में भूमि खरीद प्रक्रिया में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और पद के दुरुपयोग के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं।

Screenshot

पहली बड़ी पोस्टिंग और करियर पर बड़ा दाग

इस पूरे प्रकरण का सबसे चर्चित पहलू यह है कि जिन दो आईएएस अधिकारियों को पहली बार फील्ड में बड़ी जिम्मेदारी मिली थी, उन्हीं के कार्यकाल में यह विवाद सामने आया।

तत्कालीन हरिद्वार डीएम कर्मेंद्र सिंह और तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी दोनों ही अपने प्रशासनिक करियर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में थे। लेकिन हरिद्वार भूमि प्रकरण ने उनके रिकॉर्ड पर ऐसा दाग लगा दिया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी।

सरकार ने कर्मेंद्र सिंह को अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ दीर्घ शास्ति (Major Penalty) की संस्तुति की है, जबकि वरुण चौधरी के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की अनुशंसा की गई है।

डीएम पर उत्तराखंड में दूसरी बार हुई है कार्रवाई

ज्ञात हो कि राज्य बनने के बाद 2002 के आखिर में तिवारी सरकार में पटवारी भर्ती कराई गई थी। भर्ती पौड़ी के तत्कालीन सीडीओ कुंवर राज कुमार और तत्कालीन डीएम एसके लाम्बा की निगरानी में हो रही थी। लेकिन भर्ती में भारी अनियमितता पाई गई थीं जिसके बाद पहले डीएम लाम्बा को सस्पेंड किया गया और बाद में उनकी बर्खास्त कर दिया गया था।

अब इन दो आईएएस अफसरों की पहली बड़ी फील्ड पोस्टिंग में ही दामन पर दाग लग गया है। आईएएस कर्मेन्द्र को बतौर डीएम और आईएएस वरुण चौधरी को बतौर नगर आयुक्त पहली बार बड़ी जिम्मेदारी मिली थीं। 2011 बैच के आईएएस कर्मेन्द्र वर्ष 2020 में यूपी से उत्तराखंड आए थे। कर्मेन्द्र सिंह इससे पहले लंबे समय तक उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में बतौर सचिव तैनात थे। फिर वर्ष 2022 में अपर सचिव कार्मिक की जिम्मेदारी भी संभाली। बतौर डीएम उनकी पहली और उत्तराखंड में उनकी तीसरी तैनाती थी। मूलरूप से गोरखपुर निवासी कर्मेन्द्र को सरकार ने पहली ही बार में बड़े हरिद्वार जिले की जिम्मेदारी सौंपी थीं।

वहीं, 2017 बैच के आईएएस वरुण चौधरी वर्ष 2023 में सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार और फिर एसडीएम ऋषिकेश के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। इससे पहले वे मुख्य विकास अधिकारी पिथौरागढ़ व चमोली में भी रहे हैं। वरुण चौधरी के नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार रहते हुए ही यह जमीन खरीदी गई थी। वे दिल्ली निवासी हैं।

उधर, एसडीएम अजयवीर सिंह 2017 बैच के पीसीएस अफसर हैं। वे इससे पहले एसडीएम श्रीनगर, कीर्तिनगर के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। हरिद्वार एसडीएम के पद पर रहते हुए घोटाला हुआ।

अभियोग दर्ज किए जाने वाले व्यक्तियों में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों में सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी अभियोग दर्ज किया जाएगा।

SDM की तीन वेतनवृद्धियां रोकने के आदेश

तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उनके खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं। साफ है कि सरकार इस मामले में किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटना चाहती।

10 लोगों पर दर्ज होगा मुकदमा

विजिलेंस जांच के आधार पर जिन लोगों के खिलाफ अभियोग दर्ज किए जाएंगे, उनमें छह अधिकारी-कर्मचारी और चार भूमि विक्रेता शामिल हैं।

* पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी
* रविंद्र कुमार दयाल
* लक्ष्मीकांत भट्ट
* आनंद सिंह मिश्राण
* वेदपाल
* दिनेश काण्डपाल
* सुमन देवी
* जितेंद्र कुमार
* अभिषेक यादव
* सुजीत कुमार सिंह

इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई होगी।

धामी का संदेश: ‘भ्रष्टाचारियों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरुआत से ही इस मामले में सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ियों के संकेत मिलते ही डीएम, नगर आयुक्त समेत कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। अब विजिलेंस जांच पूरी होने के बाद सरकार ने कानूनी और विभागीय कार्रवाई का रास्ता खोल दिया है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को धामी सरकार की जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन नीति की सबसे बड़ी परीक्षा और सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है।

एक नजर में: धामी सरकार का बड़ा एक्शन

🔹 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी
🔹 पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी की संस्तुति
🔹 तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट
🔹 एसडीएम की तीन वेतनवृद्धियां रोकी जाएंगी
🔹 विजिलेंस जांच में षड्यंत्र और धोखाधड़ी के आरोप प्रमाणित
🔹 BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
🔹 राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में शामिल

संदेश साफ है—उत्तराखंड में अब भ्रष्टाचार सिर्फ जांच का विषय नहीं, कार्रवाई का कारण भी बनेगा। वैसे भी चुनावी साल ने विपक्ष इस घोटाले को मुद्दा बनाए, उससे पहले सख़्त कार्रवाई का संदेश देकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जीरो टॉलरेंस का अपना संकल्प दोहराने से भला क्यों चूकना चाहेंगे।

Show More

The News Adda

The News अड्डा एक प्रयास है बिना किसी पूर्वाग्रह के बेबाक़ी से ख़बर को ख़बर की तरह कहने का आख़िर खबर जब किसी के लिये अचार और किसी के सामने लाचार बनती दिखे तब कोई तो अड्डा हो जहां से ख़बर का सही रास्ता भी दिखे और विमर्श का मज़बूत मंच भी मिले. आख़िर ख़बर ही जीवन है.

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!