
उत्तराखंड की सबसे बड़ी रेल परियोजनाओं में शामिल ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के आसपास रहने वाले हजारों लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने 400 मीटर फ्रीज जोन की समीक्षा शुरू कर दी है। यदि तकनीकी रिपोर्ट अनुकूल रही तो कई इलाकों में वर्षों से रुके होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट और अन्य निर्माण कार्य फिर शुरू हो सकते हैं।

देहरादून। उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना (Rishikesh-Karnaprayag Rail Project) के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रेलवे कॉरिडोर के आसपास लागू 400 मीटर फ्रीज जोन की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
आवास एवं शहरी विकास विभाग ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है कि किन स्थानों पर रेलवे निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और जहां सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना विकास गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है।
यदि रिपोर्ट सकारात्मक रहती है तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास वर्षों से रुकी कई विकास परियोजनाओं को फिर से मंजूरी मिल सकती है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी प्रकार का नया निर्माण रेलवे परियोजना की सुरक्षा या सुरंगों की स्थिरता पर असर न डाले।
किन क्षेत्रों में लागू था प्रतिबंध?
फ्रीज जोन के दायरे में शामिल प्रमुख क्षेत्र—
* योगनगरी ऋषिकेश
* शिवपुरी
* व्यासी
* सिराला
* तिलवाड़ मल्ला
* मलेथा
* श्रीनगर
* धारीदेवी
* तिलनी
* घोलतीर
* गौचर
इन इलाकों में होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, मकान और कई व्यावसायिक परियोजनाएं लंबे समय से प्रभावित हैं।
अब सरकार क्या करने जा रही है?
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि—
* जहां रेल निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, वहां की रिपोर्ट तैयार करें।
* तकनीकी रूप से सुरक्षित क्षेत्रों की पहचान करें।
* रेलवे और भूगर्भीय विशेषज्ञों की राय लें।
* चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में राहत देने की संभावना पर सुझाव दें।
किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?
अगर सरकार प्रतिबंधों में आंशिक राहत देती है तो—
* होटल उद्योग
* होमस्टे संचालक
* पर्यटन व्यवसाय
* स्थानीय व्यापारी
* छोटे निवेशक
* मकान बनाने वाले लोग
सबसे अधिक लाभान्वित हो सकते हैं।
क्यों अहम है यह फैसला?
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड की सबसे बड़ी आधारभूत परियोजनाओं में शामिल है।
इसके शुरू होने के बाद—
* चारधाम यात्रा आसान होगी।
* गढ़वाल में पर्यटन बढ़ेगा।
* निवेश आने की संभावना बढ़ेगी।
* स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
* पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
इसी वजह से फ्रीज जोन की समीक्षा को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने क्या कहा?
आवास एवं शहरी विकास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि समीक्षा का उद्देश्य केवल प्रतिबंध हटाना नहीं, बल्कि रेलवे सुरक्षा और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाना है। जहां तकनीकी दृष्टि से सुरक्षित होगा, वहीं विकास गतिविधियों पर निर्णय लिया जाएगा।
डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव आवास एवं शहरी विकास-
“मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रेलवे फ्रीज जोन में लागू प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही है। जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, वहां तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर स्थिति का आकलन कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से समझौता किए बिना स्थानीय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। जनहित और परियोजना हित दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे।”
FAQ.
सवाल: क्या ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का फ्रीज जोन हटाया जा रहा है?
जवाब: अभी नहीं। सरकार ने केवल समीक्षा शुरू की है। अंतिम निर्णय तकनीकी रिपोर्ट के बाद होगा।
सवाल: क्या अब निर्माण कार्य तुरंत शुरू हो जाएंगे?
जवाब: नहीं। पहले तकनीकी और प्रशासनिक रिपोर्ट आएगी। उसके बाद सरकार निर्णय लेगी।
सवाल: फ्रीज जोन कितने मीटर का है?
जवाब: रेलवे कॉरिडोर के आसपास 400 मीटर तक।
सवाल: सबसे अधिक फायदा किसे मिलेगा?
जवाब: होटल, होमस्टे, पर्यटन कारोबार, स्थानीय व्यापारियों और संपत्ति मालिकों को।
सवाल: क्या सभी क्षेत्रों को राहत मिलेगी?
जवाब: जरूरी नहीं। जिन स्थानों पर रेलवे निर्माण पूरा हो चुका होगा और सुरक्षा मानक अनुमति देंगे, वहीं चरणबद्ध राहत पर विचार किया जाएगा।
सवाल: सरकार ने समीक्षा क्यों शुरू की?
जवाब: कई हिस्सों में रेलवे निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है और स्थानीय स्तर पर विकास गतिविधियों को लेकर लगातार मांग उठ रही थी।
क्यों महत्वपूर्ण है ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना?
* उत्तराखंड की सबसे बड़ी रेल परियोजनाओं में शामिल।
* चारधाम यात्रा की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
* पहाड़ी क्षेत्रों तक रेल पहुंचने से यात्रा समय कम होगा।
* पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
* भविष्य में लॉजिस्टिक्स और निवेश के लिए भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
(समाप्त)



