थैंक्यू! मेघालय, अरुणाचल: आप न होते तो PGI में उत्तराखंड नीचे से टॉपर होता, मोदी सरकार से मिले इस तमगे पर गौर करेंगे धन दा?

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Performance Grading Index (PGI) 2020-21: केन्द्र की मोदी सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को शिक्षा क्षेत्र में राज्यों की परफार्मेंस को लेकर एक खास तरह का इंडेक्स यानी सूचकांक जारी किया है। इसे नाम दिया गया है Performance Grading Index (PGI) 2020-21 यानी प्रदर्शन श्रेणी सूचकांक 2020-21,जिसे आप हमारी शिक्षा व्यवस्था और उसे लेकर किए जा रहे सरकारी तंत्र के प्रयासों का निचोड़ कहा जा सकता है।

स्वाभाविक ही आपको यह जानने की उत्सुकता हो रही होगी कि भला इस राष्ट्रीय इंडेक्स में उत्तराखंड के शिक्षा विभाग के लिए गर्व करने वाली भी कोई बात निकल कर सामने आई है क्या? तो हां बिलकुल एक उपलब्धि ही कहिए अब इसे कि उत्तराखंड 37 राज्यों व केंद्र शासित राज्यों की कतार में अंतिम आते आते मामूली अंतर से रह गया और 37 के इंडेक्स में 35वाँ स्थान पाकर मेघालय और अरुणाचल प्रदेश से बाजी मार गया है।

भूल जाइए कि इस राष्ट्रीय मानक तालिका में साथ साथ बने राज्य झारखंड और छत्तीसगढ़ के भी आसपास ठहर पाया है उत्तराखंड! पड़ोसी पर्वतीय राज्य हिमाचल की तो बात ही मत करिए वह तो टॉप 11 में शुमार है। यूपी से भी तुलना करना फिजूल है क्योंकि वह भी शिक्षा के मोर्चे पर उत्तराखंड से कहीं बेहतर परफॉर्म कर गया है।

अब आप बलिहारी जाइए अपने एजुकेशन सिस्टम पर और यहां के पिछले और अब वाले शिक्षा मंत्री पर कि राष्ट्रीय औसत की रेस में राज्य को कहां खड़ा कर दिया गया है। कहने को सरकारी फाइलों और शिक्षा मंत्री/मंत्रियों के दावों में उत्तराखंड एजुकेशन हब बनता जा रहा है। लेकिन ताज्जुब ही कर सकते हैं क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार के डेटा को विरोधी दल की सरकार वाला सियासी रंग देकर तो ताला नहीं जा सकता। यह हाल तब है जब देश के प्रधानमंत्री का खास फोकस उत्तराखंड पर है। इस हालत के लिए हमें अपने चौबीस घंटे मेहनत कर दुबला हुए जा रही अफसरशाही को भी ग्यारह तोपों की सलामी देने से नहीं चूकना चाहिए।

इस इंडेक्स में नवोदित केंद्र शासित राज्य लद्दाख ने पिछली रिपोर्ट से करीब तीन सौ अंक अधिक लेकर स्तर आठ से स्तर चार हासिल कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केरल, महाराष्ट्र और पंजाब ने मोदी सरकार के performance Grading Index में सबसे बेहतर प्रदर्शन कर टॉप रैंक हासिल की है। इसी तरह चंडीगढ़, गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश भी स्तर एक यानी लेवल 1 में जगह हासिल की है।

उत्तराखंड की बात करें तो 2019-20 के 752 पॉइंट्स के मुकाबले 2020-21 में राज्य को और घटकर 719 पॉइंट्स ही हासिल हुए हैं। जबकि 2017-18 में आई पहली PGI रिपोर्ट में राज्य को 704 और 2018-19, में आई दूसरी रिपोर्ट में उसे 712 पॉइंट्स मिले थे।

अनूप नौटियाल, संस्थापक, एसडीसी फाउंडेशन

उत्तराखंड शिक्षा विभाग की पीजीआई रिपोर्ट में खुली पोल पर देहरादून स्थित SDC Foundation के संस्थापक अध्यक्ष अनूप नौटियाल दुख जाहिर करते हुए कहते हैं कि 37 राज्यों/केंद्र शासित राज्यों में उत्तराखंड जैसे युवा राज्य का 35वें पायदान पर महज मेघालय और अरुणाचल प्रदेश से ऊपर दिखाना दर्शाता है कि जहां एक तरफ हम विश्व प्रसिद्ध दून स्कूल से लेकर वेल्हम्स गर्ल्स स्कूल जैसी संस्थाओं के दम पर खुद के एजुकेशन हब होने के झूठे दावे करते हैं लेकिन असल में हालात दिए तले अंधेरे जैसे हैं। जहां विश्व स्तरीय स्कूल के दावों के बीच स्कूली शिक्षा के मोर्चे पर खुद मोदी सरकार की पीजीआई रिपोर्ट हमारे शिक्षा तंत्र की पोल खोल देती है।

खैर अब जान लीजिए ये PGI यानी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स या प्रदर्शन श्रेणी सूचकांक आखिर किस उड़ती चिड़िया का नाम है जिसके सहारे मोदी सरकार ने राज्यों को एजुकेशन के मोर्चे पर आइना दिखाया है।

दरअसल करीब 14.9 लाख स्कूलों, 95 लाख शिक्षकों और विभिन्न सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि के करीब साढ़े 26 करोड़ छात्रों के साथ भारतीय शिक्षा तंत्र दुनिया के चुनिंदा सबसे बड़े शिक्षा तंत्रों में से एक हैं। इसी बड़े तंत्र के भीतर शिक्षा और साक्षरता विभाग ने तमाम राज्यों और केंद्र शासित राज्यों में स्कूली शिक्षा की सफलता के प्रदर्शन और उपलब्धियों की तस्वीर तैयार करने के उद्देश्य से एक डेटा आधारित संचालन व्यवस्था के लिए PGI यानी प्रदर्शन श्रेणी सूचकांक (Performance Grading Index) तैयार किया है।

मोदी सरकार के इस PGI का उद्देश्य तथ्य आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देना और सभी के लिए क्वालिटी आधारित शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाठ्यक्रम सुधार को रेखांकित करना है। गुरुवार को सरकार ने वर्ष 2020-21की PGI रिपोर्ट रिलीज की है। ज्ञात हो कि इससे पहले 2017-18, 2018-19, 2019-20 की रिपोर्ट जारी हो चुकी हैं।

यह भी जान लीजिए कि PGI रिपोर्ट तैयार करने के लिए 70 संकेतकों (Indicators) में 1000 अंक शामिल किये गये हैं। इन इंडिकेटर्स को 2 श्रेणियों (Categories) में बांटा गया है, परिणाम (Result) और शासन प्रबंधन (Governance Management- GM)।

इन दो कैटेगरीज को आगे 5 sub categories में विभाजित किया गया है; सीखने के परिणाम ( Learning Outcome), पहुँच (Access ), अवसंरचना और सुविधाएं (Infrastructure & Facilities), समानता (Equity ) और शासन प्रक्रिया (Governance Process)।

जैसा कि पिछले वर्षों में किया गया था, पीजीआई 2020-21 ने राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को दस श्रेणियों में वर्गीकृत किया है, उच्चतम श्रेणी स्तर 1 है, जो कुल 1000 अंकों में से 950 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए है। निम्नतम श्रेणी स्तर 10 है, जो 551 से कम अंक के लिए है।

पीजीआई का अंतिम उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बहु-आयामी हस्तक्षेप (Multi Prolonged Interventions) करने के लिए बढ़ावा देना है, जो सभी आयामों को शामिल करते हुए वांछित इष्टतम शिक्षा परिणाम प्राप्त करने में सहायता करेगा।

उम्मीद है कि पीजीआई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कमियों की पहचान करने में मदद करेगा, जिससे हस्तक्षेप के लिए क्षेत्रों की प्राथमिकता तय की जा सकेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्कूली शिक्षा प्रणाली हर स्तर पर मजबूत है।

कुल 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों – केरल, पंजाब, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश ने 2020-21 में स्तर II (स्कोर 901-950) हासिल किया है।

जबकि 2017-18 में इस स्तर में कोई भी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश शामिल नहीं था।

2019-20 में इस स्तर में 4 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश थे। गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश अब तक किसी भी राज्य द्वारा प्राप्त उच्चतम स्तर को हासिल करने वाले नए राज्य हैं।

नवगठित केंद्र शासित प्रदेश, लद्दाख ने 2020-21 में पीजीआई के सन्दर्भ में स्तर 8 से स्तर 4 हासिल करके महत्वपूर्ण सुधार किया है। अर्थात 2019-20 की तुलना में 2020-21 में लद्दाख ने अपने अंकों में 299 अंकों का सुधार किया है। जो एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक सुधार है।

2020-21 में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्राप्त पीजीआई अंक और श्रेणी, पीजीआई प्रणाली के प्रभावी होने के प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। संकेतक-वार पीजीआई अंक उन क्षेत्रों को दर्शाते हैं, जिनमें किसी राज्य को सुधार करने की आवश्यकता है। पीजीआई सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सन्दर्भ में प्रदर्शन को एकसमान पैमाने पर दिखाएगा, जो उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने वालों द्वारा अपनाए गए सर्वोत्तम तौर-तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।


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