
राष्ट्रपति एवं सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने परेड की सलामी लेने के बाद इसे महिला सशक्तिकरण और बदलते भारत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश की प्रगतिशील सोच और समान अवसरों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
515 कैडेट बने सैन्य अधिकारी
पासिंग आउट परेड में 481 भारतीय कैडेटों के अलावा 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट भी शामिल थे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कुल 515 कैडेट सैन्य अधिकारी के रूप में सेना का हिस्सा बने। राष्ट्रपति ने इसे भारत की वैश्विक मित्रता और रक्षा सहयोग की मजबूत होती साझेदारी का उदाहरण बताया।
युवा अधिकारियों को दिया नेतृत्व का संदेश
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने नव नियुक्त अधिकारियों से कहा कि वे केवल देश की सीमाओं के रक्षक नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, सम्मान और आकांक्षाओं के भी संरक्षक हैं। उन्होंने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, आधुनिक तकनीक और नई सैन्य चुनौतियों के बीच नवाचार तथा पेशेवर उत्कृष्टता को अपनाने का आह्वान किया।
आईएमए के इतिहास में दर्ज हुआ नया अध्याय
आईएमए की स्थापना के बाद यह पहला अवसर है जब महिला कैडेटों को अकादमी से सीधे कमीशन मिला है। सैन्य विशेषज्ञ इसे भारतीय सेना में लैंगिक समानता और महिला नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मान रहे हैं। नौ महिला अधिकारियों का यह पहला बैच आने वाले वर्षों में सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का संकेत भी माना जा रहा है।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईएमए के समादेशक लेफ्टिनेंट जनरल नागेन्द्र सिंह सहित सेना और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



