
यह फैसला ऐसे समय आया है जब शुक्रवार रात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी देहरादून पहुंचे थे। एयरपोर्ट जाते समय उन्होंने प्रदर्शन कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों से मुलाकात की थी तथा संसद में यह मुद्दा उठाने का भरोसा दिया था। इसके बाद शनिवार को मुख्यमंत्री धामी के इस फैसले को राजनीतिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
क्या बोले मुख्यमंत्री?
मुख्यमंत्री धामी ने अपने बयान में कहा कि देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों द्वारा व्यक्त चिंताओं का उन्होंने गंभीरता से संज्ञान लिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजना है, जिस पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों तथा सभी वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियों का पालन करते हुए कार्यवाही की जा रही थी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना में वन्यजीव संरक्षण के लिए करीब 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास तथा छोटे वन्यजीवों के आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट बनाए जाने का भी प्रावधान है, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष और सड़क हादसों में वन्यजीवों की मौत कम करने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास राज्य के लिए आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परियोजना से जुड़े सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ पुनः विस्तृत संवाद स्थापित किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों का पूरा सम्मान करेगी, लेकिन सभी पक्षों में सहमति बनने तक पेड़ों की कटाई नहीं होगी।
लगातार बढ़ रहा था विरोध
पिछले कई दिनों से देहरादून और ऋषिकेश के बीच प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का स्थानीय लोग, पर्यावरणविद और सामाजिक संगठन विरोध कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क निर्माण के वैकल्पिक मॉडल तलाशे जाएं ताकि पर्यावरणीय नुकसान कम हो।
इसी विरोध के बीच राहुल गांधी ने भी प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनके पक्ष को संसद में उठाने का आश्वासन दिया था। इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री धामी का यह निर्णय सामने आया।
अब आगे क्या?
सरकार के फैसले के बाद फिलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लग गई है। अब परियोजना को लेकर सरकार सभी पक्षों से दोबारा संवाद करेगी। यदि सहमति बनती है तो आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप होगी।
देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पिछले कुछ दिनों से अनेक नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों एवं स्थानीय लोगों द्वारा व्यक्त की जा रही चिंताओं और सुझावों का मैंने गंभीरता से संज्ञान लिया है। यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजना है, जिस पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा सभी आवश्यक वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्यवाही की जा रही थी। परियोजना में वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे हाथी अंडरपास तथा छोटे वन्यजीवों के आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रावधान किया गया है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मृत्यु की घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिलेगी, जो अक्सर इस रास्ते में देखा जाता है। विकास हमारे लिए आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसी उद्देश्य से प्रमुख सचिव एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों से पुनः विस्तृत संवाद स्थापित किया जाए। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों एवं निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हुए आगे की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही, जब तक सभी पक्षों के साथ संतोषजनक सहमति एवं विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले पेड़ों का कटान स्थगित रखा जाएगा। मेरे लिए उत्तराखण्ड की प्रकृति, जनभावनाएँ और प्रदेश का विकास—तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार संवाद, सहमति और व्यापक जनहित के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।



