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उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के मुकदमों का बढ़ता बोझ: तीन साल में विशेष अदालतों में 368 से 506 हुए लंबित केस

RTI से खुलासा: 2023-25 के बीच नए मामलों की तुलना में निस्तारण बेहद धीमा, हाईकोर्ट में भी 290 केस लंबित

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काशीपुर/देहरादून। उत्तराखंड सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का लगातार दावा करती रही है, लेकिन न्यायालयों में लंबित भ्रष्टाचार के मामलों के आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उत्तराखंड हाईकोर्ट से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य की तीन विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालतों में लंबित मामलों की संख्या तीन वर्षों में लगातार बढ़ी है। वर्ष 2023 की शुरुआत में जहां ऐसे 368 मामले लंबित थे, वहीं 31 दिसंबर 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 506 हो गई।

यह खुलासा काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी से हुआ है।

नदीम उद्दीन ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की स्थिति जानने के लिए आरटीआई आवेदन दाखिल किया था। इसके जवाब में वर्ष 2026 में राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं ज्वाइंट रजिस्ट्रार एच.एस. जीना ने विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई। इससे पहले वर्ष 2024 और 2025 में भी इसी विषय पर आंकड़े उपलब्ध कराए गए थे।
एडवोकेट नदीम उद्दीन, आरटीआई कार्यकर्ता

तीन विशेष अदालतों में 506 केस लंबित

31 दिसंबर 2025 तक राज्य की तीन विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालतों में कुल 506 मामले लंबित पाए गए।

इनमें—

* सीबीआई विशेष न्यायालय, देहरादून– 64 मामले

* विजिलेंस विशेष न्यायालय, देहरादून– 248 मामले
* विशेष न्यायालय, हल्द्वानी– 194 मामले
सबसे अधिक लंबित मामले विजिलेंस कोर्ट, देहरादून में दर्ज किए गए।2023 से लगातार बढ़ा बैकलॉग

आरटीआई के अनुसार वर्ष 2023 की शुरुआत में तीनों अदालतों में कुल 368 मामले लंबित थे।तब स्थिति इस प्रकार थी—

* सीबीआई कोर्ट देहरादून – 48
* विजिलेंस कोर्ट देहरादून – 192
* हल्द्वानी – 128

यानी तीन वर्षों में लंबित मामलों में 138 मामलों की वृद्धि दर्ज की गई।

नए केस ज्यादा, निस्तारण कम

उपलब्ध आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि हर वर्ष नए मामले दर्ज होने की तुलना में उनका निस्तारण काफी कम हुआ।

| वर्ष | नए केस | निस्तारित | वर्ष अंत में लंबित |
| —- | —–: | —–: | —–: |
| 2023 | 98 | 33 | 433 |
| 2024 | 79 | 32 | 480 |
| 2025 | 48 | 22 | 506 |

यानी तीन वर्षों में कुल 225 नए मामले दर्ज हुए, जबकि केवल 87 मामलों का निस्तारण हो सका।

 हाईकोर्ट में भी सैकड़ों मामले लंबित

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों का बोझ केवल निचली अदालतों तक सीमित नहीं है। हाईकोर्ट में भी इन मामलों की बड़ी संख्या लंबित है।

 वर्ष 2023 की शुरुआत

* कुल लंबित केस – 226
* अपील – 183
* रिवीजन – 16
* धारा 482 के विविध प्रार्थना पत्र – 27

वर्ष 2023 के अंत

* कुल लंबित – 249
* अपील – 199
* रिवीजन – 16
* धारा 482 के प्रार्थना पत्र – 34

वर्ष 2024 के अंत

* कुल लंबित – 294
* अपील – 200
* रिवीजन – 40
* धारा 482 – 36
* धारा 528 – 8
* जमानत प्रार्थना पत्र – 10

वर्ष 2025 के अंत

* कुल लंबित – 290
* अपील – 201
* रिवीजन – 23
* धारा 482 – 34
* धारा 528 – 29
* जमानत प्रार्थना पत्र – 3

हालांकि वर्ष 2025 के अंत में हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 294 से घटकर 290 हुई, लेकिन यह अभी भी वर्ष 2023 की तुलना में काफी अधिक है।

रिपोर्ट क्या संकेत देती है?

आंकड़े बताते हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एजेंसियां नए मुकदमे दर्ज कर रही हैं, लेकिन अदालतों में उनका निस्तारण अपेक्षाकृत धीमी गति से हो रहा है। इसका परिणाम यह है कि लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध सुनवाई और विशेष अदालतों की क्षमता बढ़ाए बिना इस बैकलॉग को कम करना चुनौतीपूर्ण है।

 

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