
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित एलयूसीसी (LUCC) चिटफंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 आरोपियों और एक संस्था के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है। सीबीआई के अनुसार, इस बहुचर्चित घोटाले में एक लाख से अधिक निवेशकों से करीब 800 करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि 400 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी सामने आई है। एजेंसी ने जांच में इसे आम जनता को झांसे में लेकर चलाई गई पोंजी स्कीम बताया है।
सीबीआई ने बताया कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2025 में एलयूसीसी घोटाले से जुड़ी सभी एफआईआर सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे। इसके बाद 26 नवंबर 2025 को एजेंसी ने मामला दर्ज कर उत्तराखंड के विभिन्न थानों में दर्ज 18 एफआईआर की जांच अपने हाथ में ली।
2016 से बिना वैध अनुमति चल रहा था कारोबार
जांच में सामने आया कि वाजिद खान ने वर्ष 2012 में एलयूसीसी को मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में पंजीकृत कराया था। बाद में वर्ष 2016 में समीर अग्रवाल ने इसका पूरा प्रबंधन अपने हाथ में लेकर नया निदेशक मंडल बनाया और उत्तराखंड में 50 से अधिक शाखाओं के जरिए निवेश योजनाएं शुरू कर दीं।
सीबीआई के मुताबिक, उत्तराखंड में संचालन के लिए एनओसी वर्ष 2017 में मिली, लेकिन उससे पहले ही वर्ष 2016 से संस्था का संचालन शुरू कर दिया गया था।
नई जमा राशि से पुराने निवेशकों को भुगतान
जांच एजेंसी के अनुसार एलयूसीसी का कोई वास्तविक कारोबार या आय का स्रोत नहीं था। पुराने निवेशकों को परिपक्वता राशि नए निवेशकों से जुटाए गए पैसे से चुकाई जाती थी। इसी वजह से सीबीआई ने इसे पोंजी स्कीम करार दिया है।
एक लाख से ज्यादा लोग बने शिकार
सीबीआई के अनुसार उत्तराखंड में एक लाख से अधिक लोगों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर विभिन्न जमा योजनाओं में निवेश कराया गया। कुल मिलाकर करीब 800 करोड़ रुपये जमा कराए गए, जबकि कुछ निवेशकों को आंशिक भुगतान के बावजूद 400 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी सामने आई है।
मुंबई से चलता था पूरा नेटवर्क, मास्टरमाइंड विदेश फरार
जांच में मुंबई निवासी समीर अग्रवाल को पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया गया है। सीबीआई का दावा है कि वही संस्था के संचालन और सभी महत्वपूर्ण निर्णयों को नियंत्रित करता था।
जांच में यह भी सामने आया कि समीर अग्रवाल ने किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर 10 शेल कंपनियों के बैंक खाते खुलवाए और निवेशकों का पैसा इनमें ट्रांसफर कराया। बाद में इन रकमों को लेयर्ड बैंकिंग ट्रांजैक्शन के जरिए सैकड़ों खातों में भेजा गया।
चार्जशीट के अनुसार संस्था के चेस्ट मैनेजर तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी विभिन्न शाखाओं से जुटाई गई नकदी को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाते थे, ताकि बैंकिंग प्रणाली के जरिए लेनदेन का रिकॉर्ड न बन सके।
39 संपत्तियां चिन्हित, 29 की कुर्की शुरू
सीबीआई ने आरोपियों की उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित 39 संपत्तियों की पहचान की है। इन्हें बीयूडीएस अधिनियम के तहत कुर्क कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अब तक 29 संपत्तियों पर अनंतिम कुर्की आदेश जारी हो चुके हैं, जबकि शेष 10 संपत्तियों के संबंध में प्रक्रिया जारी है। इन कुर्क संपत्तियों की पुष्टि के लिए नामित अदालतों में भी आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं।
सात आरोपी गिरफ्तार, सभी न्यायिक हिरासत में
जांच के दौरान सीबीआई ने तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन को गिरफ्तार किया। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
LUCC घोटाला एक नजर में
* एलयूसीसी (LUCC) चिटफंड घोटाला
* प्रभावित निवेशक: 1 लाख से अधिक
* कुल निवेश: करीब 800 करोड़ रुपये
* प्रारंभिक धोखाधड़ी: 400 करोड़ रुपये से अधिक
* शेल कंपनियां: 10
* कुर्की के लिए चिन्हित संपत्तियां:39
* अब तक कुर्क संपत्तियां: 29
* गिरफ्तार आरोपी: 7
* मुख्य आरोपी: समीर अग्रवाल (विदेश फरार)



