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उत्तराखंड में राहुल गांधी की रैलियां रद्द, 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस को मिला बड़ा संदेश

Rahul Gandhi Uttarakhand Visit: मौसम ने बिगाड़ा कार्यक्रम, लेकिन कांग्रेस को मिला बड़ा राजनीतिक संदेश

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  • राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा मौसम की भेंट, अल्मोड़ा-पौड़ी रैलियां रद्द; अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली बुलाया
  • दौरा रद्द, लेकिन संदेश साफ!
    * अल्मोड़ा और पौड़ी की रैलियां मौसम के कारण रद्द
    * राहुल गांधी दिल्ली लौटे
    * अंकिता भंडारी के माता-पिता से फोन पर बातचीत
    * दिल्ली बुलाकर मुलाकात का न्योता
    * फोन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जनता को संबोधित
    * कांग्रेस ने 2027 चुनावी तैयारी का दिया संकेत
    * कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ ने बढ़ाया पार्टी का उत्साह
अल्मोड़ा में कांग्रेस रैली की तस्वीर

देहरादून/अल्मोड़ा/पौड़ी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का दो दिवसीय उत्तराखंड दौरा मौसम की मार का शिकार हो गया। चार और पांच जून को प्रस्तावित इस दौरे में राहुल गांधी को गुरुवार को अल्मोड़ा में विशाल जनसभा और पौड़ी में पूर्व सैनिक सम्मेलन को संबोधित करना था, लेकिन खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण उनका हेलीकॉप्टर अल्मोड़ा में उतर नहीं सका और अंततः उन्हें दिल्ली लौटना पड़ा।

हालांकि कार्यक्रम रद्द होने के बावजूद राहुल गांधी ने डिजिटल माध्यमों से अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने अल्मोड़ा की जनसभा को फोन के माध्यम से तथा पौड़ी के कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। अपने नेता के रैली मंच पर न पहुंचने से जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं में मायूसी छा गई, वहीं अल्मोड़ा और पौड़ी की भीड़ ने एक अलग तरह का संदेश भी दे दिया है।

 भारी भीड़, हाई जोश और फिर मायूसी

राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह था। प्रदेश कांग्रेस ने इसे 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी के बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में पेश किया था। अल्मोड़ा और पौड़ी दोनों स्थानों पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक जुटे थे और प्रदेश कांग्रेस राहुल गांधी की रैलियों के माध्यम से मिशन 2027 के लिए इसे चुनावी शंखनाद के रूप में पेश करने की तैयारी में थी।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी की लंबे समय बाद कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में एक साथ मौजूदगी पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने वाली थी। लेकिन मौसम के कारण राहुल गांधी को पंतनगर एयरपोर्ट से ही वापस लौटना पड़ा जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा देखी गई। इसके बावजूद राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि वह जल्द ही उत्तराखंड वापस आकर जनता के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनेंगे।


अंकिता भंडारी मामला फिर बना राजनीतिक केंद्र

दौरे का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू अंकिता भंडारी प्रकरण रहा। राहुल गांधी भले अल्मोड़ा और पौड़ी के रैली स्थल तक नहीं पहुंच पाए लेकिन उन्होंने अंकिता भंडारी के माता-पिता से फोन पर बातचीत की और उन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण दिया। ज्ञात हो कि कांग्रेस लंबे समय से अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच, कथित वीआईपी की पहचान और न्याय की मांग को लेकर भाजपा सरकार पर हमला करती आ रही है।

दरअसल, अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड की राजनीति में आज भी भावनात्मक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। हाल के महीनों में इस मामले को लेकर राज्य में फिर से प्रदर्शन हुए हैं और सीबीआई जांच की मांग तेज हुई है। बहुत सारे लोग प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री पद से अजेय कुमार की उत्तराखंड से विदाई पर भी इस मुद्दे का साया देख रहे हैं।

ऐसे में राहुल गांधी का अंकिता के माता-पिता से संवाद कांग्रेस के लिए केवल संवेदना का विषय नहीं बल्कि महिला सुरक्षा और न्याय के सवाल पर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।

भाजपा पर सीधा हमला, 2027 का संदेश

अपने वर्चुअल संबोधन में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, अग्निपथ योजना, एमएसएमई सेक्टर और किसानों के मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा। पौड़ी में पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने पर अग्निपथ योजना को समाप्त करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह दौरा केवल एक कार्यक्रम भर नहीं था बल्कि 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के चुनावी नैरेटिव की शुरुआत था। राहुल गांधी के मैसेज से साफ़ हो गया कि कांग्रेस बेरोजगारी, पलायन, महिला सुरक्षा, सैनिक सम्मान और अंकिता भंडारी प्रकरण जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर भाजपा को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है।


राहुल के इस दौरे से कांग्रेस को क्या मिला?

दीगर बात है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अल्मोड़ा और पौड़ी के अपने दोनों निर्धारित कार्यक्रमों में मौसम की बाधा के चलते नहीं पहुंच सके, लेकिन इस कार्यक्रम से राजनीतिक दृष्टि से कांग्रेस को कई संदेश देने का अवसर मिला है।

राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को सक्रिय होने का संदेश दिया।
अंकिता भंडारी मुद्दे को फिर राष्ट्रीय विमर्श में लाया गया।
कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस की मौजूदगी दर्ज हुई।
भाजपा सरकार के खिलाफ बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और सैनिकों के मुद्दे उठाए गए।
2027 विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की चुनावी तैयारी का संकेत मिला।

डिजिटल युग की राजनीति: बिना पहुंचे भी बने चर्चा का केंद्र

राजनीति अब केवल मंचों तक सीमित नहीं है। राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा इसका उदाहरण बन गया। खराब मौसम के कारण कार्यक्रम रद्द होने के बावजूद फोन संबोधन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अंकिता भंडारी के माता-पिता से बातचीत सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया में प्रमुख चर्चा का विषय बन गई।

यह भी महत्वपूर्ण रहा कि जिस तरह से दर्जाधारी कर्नल अजय कोठियाल ने प्रेस कांफ्रेंस कर राहुल गांधी के पौड़ी में पूर्व सैनिकों से मुलाकात करने को मुद्दा बनाया और प्रदेश भाजपा प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम के “क्या लड़कियों को छेड़ने आ रहे?”, वाले विवादित बयान ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के दौरे को चर्चा का केंद्र बना दिया।
बहरहाल, उत्तराखंड का यह दौरा राहुल गांधी के लिए राजनीतिक रूप से अधूरा जरूर रहा, लेकिन बेअसर नहीं। मौसम ने कांग्रेस नेता की यात्रा रोक दी, मगर पार्टी  ने इसे राजनीतिक संदेश में बदलने की कोशिश की। अंकिता भंडारी का मुद्दा, कार्यकर्ताओं की भीड़ और 2027 चुनावों की पृष्ठभूमि में यह दौरा बताता है कि उत्तराखंड कांग्रेस आने वाले चुनावी संघर्ष की जमीन तैयार करने में जुट चुकी है।

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