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उत्तराखंड में आपदा पर सख्त हुए CM धामी: अफसरों को ग्राउंड जीरो पर उतरने का आदेश, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

मानसून, चारधाम यात्रा और डेंगू पर हाई अलर्ट; बिजली-पानी-सड़क तुरंत बहाल करने, संवेदनशील इलाकों में हेली सेवा तैयार रखने के निर्देश

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खबर की खास बातें 
* मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की चेतावनी दी।
* सभी जिलाधिकारी और विभाग 24×7 अलर्ट मोड पर रहेंगे।
* बिजली, पानी, सड़क और संचार सेवाएं तत्काल बहाल करने के निर्देश।
* चारधाम यात्रा मार्गों पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता।
* संवेदनशील इलाकों में हेली सेवा और राहत संसाधन तैयार रखने के आदेश।
* डेंगू रोकथाम के लिए राज्यभर में युद्धस्तर पर अभियान।
* 15 सितंबर से ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का तीसरा चरण।
* पुलों का सेफ्टी ऑडिट और नालों की विशेष सफाई के निर्देश।
* मुख्यमंत्री ने कहा—अच्छे अधिकारियों को सम्मान, लापरवाहों पर कार्रवाई।

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और संभावित आपदाओं के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे सरकारी तंत्र को हाई अलर्ट पर कर दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आपदा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी अधिकारी केवल बैठकों तक सीमित रहने के बजाय ग्राउंड जीरो पर उतरकर व्यवस्थाओं की निगरानी करें।

मुख्यमंत्री आवास में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मानसून, चारधाम यात्रा, डेंगू नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और विभागों को 24×7 अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए।

बिजली, पानी, सड़क और संचार सेवाएं तुरंत बहाल करने के आदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश या भूस्खलन से यदि बिजली, पेयजल, सड़क या संचार सेवाएं बाधित होती हैं तो उनकी बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं तुरंत लागू की जाएं ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।

उन्होंने निर्देश दिए कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पहले से जेसीबी, पोकलैंड मशीनें और तकनीकी दल तैनात रहें ताकि मार्ग बंद होने पर तुरंत यातायात बहाल किया जा सके।

चारधाम यात्रा पर विशेष फोकस

समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष अब तक 44.65 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी है। इसलिए यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।

संवेदनशील इलाकों में हेली सेवा तैयार रखने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने दूरस्थ और आपदा संभावित क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों और ईंधन का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने को कहा। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों की विशेष निगरानी के निर्देश देते हुए आवश्यकता पड़ने पर हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने के आदेश दिए।

डेंगू पर युद्धस्तर पर अभियान

मुख्यमंत्री ने डेंगू को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने जलभराव वाले क्षेत्रों की तत्काल पहचान, नियमित फॉगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के आदेश दिए। साथ ही अस्पतालों में जांच किट, दवाइयों, रक्त, बेड और चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का तीसरा चरण 15 सितंबर से

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का तीसरा चरण 15 सितंबर से नए स्वरूप में शुरू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल शिविर लगाना नहीं, बल्कि सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। शिविरों में पेंशन, आयुष्मान कार्ड, प्रमाण पत्र, राजस्व सेवाओं सहित अन्य सुविधाएं मौके पर उपलब्ध कराई जाएं।

पिछले वर्ष के आपदा कार्यों पर भी सख्ती

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पिछले वर्ष की आपदाओं से जुड़े सभी पुनर्निर्माण और सुरक्षात्मक कार्य समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। साथ ही 15 अक्टूबर तक पूर्ण होने वाले विकास कार्यों की सूची और प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजने के निर्देश भी दिए।

पुलों का सेफ्टी ऑडिट और नालों की सफाई

मानसून को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने, कमजोर पुलों पर तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने और पूरे राज्य में नालों की विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए ताकि जलभराव की समस्या न हो।

CM बोले- मैं खुद हेल्पलाइन नंबरों की जांच करता हूं

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनसेवा हेल्पलाइन नंबरों पर फोन कर व्यवस्थाओं की जांच करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय समीक्षा करेंगे।

उन्होंने कहा कि “जनहित के मामलों में किसी भी स्तर पर शिथिलता, उदासीनता अथवा लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।”

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