
- उत्तराखंड में एक दिन, दो दर्दनाक हादसे: देहरादून में राहुल गांधी के कार्यक्रम की तैयारी में मौत, सिलक्यारा सुरंग में श्रमिक की जान गई
देहरादून/उत्तरकाशी। उत्तराखंड में शुक्रवार से पहले दो अलग-अलग स्थानों पर हुए दर्दनाक हादसों ने लोगों को झकझोर दिया। एक ओर देहरादून में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान लोहे का पिलर गिरने से एक कांग्रेस कार्यकर्ता की मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर उत्तरकाशी की निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में कंक्रीट का भारी ब्लॉक गिरने से एक युवा श्रमिक की जान चली गई।
दोनों घटनाओं ने निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों और कार्यस्थल पर बरती जा रही सावधानियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले देहरादून में हादसा
देहरादून के सनातन धर्म इंटर कॉलेज, बन्नू रेसकोर्स मैदान में राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान मंच निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा लोहे का पिलर अचानक गिर गया, जिसकी चपेट में कांग्रेस कार्यकर्ता अमर सिंह मेहता आ गए।

गंभीर रूप से घायल मेहता को तत्काल सीएमआई अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अमर सिंह मेहता कांग्रेस महानगर महामंत्री आलोक मेहता के पिता थे।
घटना के बाद कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह भी देखा जा रहा है कि कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
सिलक्यारा सुरंग में कंक्रीट ब्लॉक गिरा, 22 वर्षीय श्रमिक की मौत
उधर उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव (बड़कोट) सुरंग में शॉटक्रिटिंग वाले हिस्से से लगभग 15 से 20 किलो का कंक्रीट ब्लॉक गिर गया। इसकी चपेट में आने से झारखंड निवासी 22 वर्षीय नरेश गंजू गंभीर रूप से घायल हो गए।
उन्हें तत्काल सीएचसी बड़कोट ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
निर्माण कंपनी नवयुगा इंजीनियरिंग लिमिटेड के अनुसार हादसा रात करीब 12:40 बजे उस समय हुआ, जब श्रमिक सुरंग के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहा था। हादसा इतना गंभीर था कि कंक्रीट ब्लॉक ने हेलमेट तक तोड़ दिया।
श्रमिकों ने काम रोका, मुआवजे का आश्वासन
हादसे के बाद अन्य श्रमिकों ने विरोध स्वरूप सुरंग निर्माण कार्य अस्थायी रूप से बंद कर दिया। कंपनी ने मृतक के परिजनों को झारखंड से उत्तरकाशी बुलाने की व्यवस्था की है और बीमा नीति के तहत लगभग 26 लाख रुपये तक का मुआवजा देने की बात कही है।
2023 के सिलक्यारा हादसे की यादें फिर हुईं ताजा
यह वही सिलक्यारा सुरंग है, जहां नवंबर 2023 में भूस्खलन के कारण 41 श्रमिक 17 दिनों तक सुरंग के भीतर फंसे रहे थे। उस ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पहली बार निर्माण कार्य के दौरान किसी श्रमिक की मौत होने से परियोजना पर एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।



