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खड़गे के ‘अपमान’ पर कांग्रेस का हल्लाबोल, बारिश में भी नहीं रुका CM आवास कूच; बैरिकेड पर चढ़े कार्यकर्ता

हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद ने पकड़ा सियासी तूल, हाथीबड़कला में पुलिस-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में धक्का-मुक्की; कांग्रेस बोली- यह सिर्फ खड़गे का नहीं, दलित सम्मान और संविधान का सवाल

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  • खड़गे के ‘अपमान’ पर कांग्रेस का हल्लाबोल, बारिश में भी नहीं रुका CM आवास कूच; बैरिकेड पर चढ़े कार्यकर्ता

देहरादून। हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद रामलीला मैदान के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर उत्तराखंड की सियासत सोमवार को एक बार फिर सड़कों पर उतर आई। तेज बारिश के बावजूद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। परेड ग्राउंड से निकले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हाथीबड़कला के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। कई कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़ गए।

कांग्रेस के इस प्रदर्शन में प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। कांग्रेस ने साफ संकेत दिया कि हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा।

‘खड़गे का नहीं, दलित सम्मान और संविधान का सवाल’

कांग्रेस ने हल्द्वानी के घटनाक्रम को महज राजनीतिक विवाद मानने से इनकार किया है। पार्टी का कहना है कि किसी दलित नेता की सभा के बाद कार्यक्रम स्थल का कथित ‘शुद्धिकरण’ समानता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर सवाल है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस की रणनीति अब इस विवाद को प्रदेशव्यापी राजनीतिक अभियान का रूप देने की दिखाई दे रही है।

24 दिन बाद भी कार्रवाई का सवाल, खड़गे ने नड्डा को लिखा पत्र

विवाद उस समय और गहरा गया जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में सदन के नेता केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कथित ‘शुद्धिकरण’ मामले में कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाए। खड़गे ने कहा कि घटना के 24 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। (

इसके बाद मामले ने नया राजनीतिक मोड़ लिया।  कर्नाटक के बेंगलुरु में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और अन्य के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज हुई। कांग्रेस ने इसे अपने आरोपों की पुष्टि के तौर पर पेश किया, जबकि भाजपा ने इस मामले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। यानी विवाद अब उत्तराखंड की सीमा से बाहर भी राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है।

सचिवालय घेराव के बाद अब CM आवास तक पहुंचा विरोध

हल्द्वानी प्रकरण को लेकर कांग्रेस इससे पहले भी देहरादून में सचिवालय कूच कर चुकी है। अब मुख्यमंत्री आवास घेराव के जरिए पार्टी ने आंदोलन को एक और बड़ा राजनीतिक मंच दे दिया है। प्रदर्शन से पहले ही कांग्रेस ने प्रदेशभर से कार्यकर्ताओं को देहरादून पहुंचने का आह्वान किया था।

सोमवार के प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि कांग्रेस इस मुद्दे को संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन से जोड़ना चाहती है। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का सड़क पर उतरना पार्टी के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

कांग्रेस ने खड़गे से आगे बढ़ाया मुद्दा

मुख्यमंत्री आवास कूच केवल खड़गे प्रकरण तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस ने महिला अपराध, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक, किसानों की समस्याओं और जमीनों की कथित अनैतिक नीलामी जैसे मुद्दों को भी प्रदर्शन के एजेंडे में शामिल किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दावा किया कि प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता देहरादून पहुंचे। पार्टी नेताओं ने इसे सरकार के खिलाफ बढ़ते जन असंतोष का संकेत बताया और 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा जवाब देने का दावा किया।

प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने भी खड़गे को कांग्रेस अध्यक्ष के साथ-साथ राज्यसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ दलित नेता के रूप में रेखांकित करते हुए इस पूरे प्रकरण को लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने की कोशिश की।

भाजपा भी पीछे नहीं, राहुल गांधी के लिए ‘बुद्धि-शुद्धि’ यज्ञ

इस बीच भाजपा ने भी कांग्रेस के हमले का जवाब अपने तरीके से दिया। देहरादून में भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के लिए ‘बुद्धि-शुद्धि’ यज्ञ किया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर जाति के नाम पर राजनीति करने और उत्तराखंड को बदनाम करने का आरोप लगाया।

इस घटनाक्रम ने ‘शुद्धिकरण’ विवाद को एक नए राजनीतिक नैरेटिव में बदल दिया है। कांग्रेस जहां इसे दलित सम्मान और संविधान का मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए जातीय विभाजन को हवा देने का आरोप लगा रही है।

2027 से पहले जातीय-सामाजिक राजनीति की नई जमीन?

हल्द्वानी के रामलीला मैदान से शुरू हुआ विवाद अब देहरादून के सत्ता केंद्र तक पहुंच चुका है। कांग्रेस के लगातार सड़क पर उतरने से यह साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को जल्दी छोड़ने के मूड में नहीं है।

दिलचस्प यह है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। कांग्रेस के एससी/एसटी सांसदों की बैठक और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन देने की तैयारी इस बात का संकेत है कि पार्टी इसे उत्तराखंड तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रही है।

यहीं से इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल निकलता है- क्या हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले दलित सम्मान, सामाजिक न्याय और संविधान के सवाल को एक बड़े चुनावी मुद्दे में बदल पाएगा?

फिलहाल इतना जरूर है कि रामलीला मैदान से उठी राजनीतिक चिंगारी अब देहरादून की सड़कों तक पहुंच चुकी है। बारिश में भी कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन और उसके जवाब में भाजपा का आक्रामक राजनीतिक प्रतिउत्तर संकेत दे रहा है कि 2027 की चुनावी लड़ाई के लिए उत्तराखंड में नैरेटिव की जंग अभी से तेज हो गई है।

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