ADDA ANALYSIS: हरदा ने कहा- हेलो, हरक का आया जवाब- ‘जहां आप कहेंगे मैं चला आऊंगा’, आपदा के बहाने हरदा-हरक में पिघल रही बर्फ, यही वक्त बीजेपी हो जाए बाग़ियों को लेकर सतर्क!

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देहरादून/रामनगर: कहते हैं सियासी में न कोई परमानेंट दोस्त होता है न ही कोई स्थाई दुश्मन! वक्त और परिस्थितियां रिश्ते बनाती हैं तो अदावत के रास्ते भी खोल देती हैं। वक्त के साथ यही हालात रिश्तों में आपसी ज़मी बर्फ पिघला भी देते हैं। उत्तराखंड की सियासत में कांग्रेस कैंपेन कमांडर व पूर्व सीएम हरीश रावत और धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के रिश्ते भी आज इसी शक्ल में नजर आ रहे। यूं तो हरक सिंह रावत का हरदा के साथ सियासी रिश्ता न केवल भारी उतार-चढ़ाव भरा रहा बल्कि कई बार दोनों दिग्गजों में 36 का आंकड़ा भी दिखता रहा।

18 मार्च 2016 को कांग्रेस में हुई बगावत के अहम किरदार रहे हरक सिंह और तत्कालीन सीएम हरीश रावत में इस घटना के बाद से रिश्तों न केवल तल्ख़ी देखी गई बल्कि अदालती मोर्चे पर भी दोनों में द्वन्द्व छिड़ा। हरदा ने भी बाग़ियों को जहां, बीजेपी में उज्याड़ू बल्द करार देकर हरक सिंह जैसे नेताओं पर जमकर हमला बोला और बाग़ियों को लोकतंत्र के महापापी व उत्तराखंड के अपराधी तक कहा, तो वहीं हरक सिंह भी रह-रहकर रावत पलटवार करते रहे। लेकिन दो दिन पहले हरक सिंह रावत ने हरीश रावत से माफी मांगते हुए उनको अपना बड़ा भाई करार दिया। साथ ही ये भी ऐलान किया कि उनके बड़े भाई हरदा अपराधी कह चुके अब कल को चाहे चोर कहें या कुछ और, उनकी हर बात मेरे लिए आशीर्वाद के फूल समान है।


अब हरदा ने भी अपने छोटे भाई को आपदा की घड़ी में फ़ोन लगाकर प्रभावित गाँवों का दर्द बयां किया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने वन मंत्री हरक सिंह रावत को फोन लगाकर हरदा से बात कराई। हरदा ने अपने अंदाज में साँप-नेवले की दुश्मनी और आपदा में रिश्ते का रहस्य समझाते चुकुम और सुंदरखाल गांव में आपदा के कहर और विस्थापन की अटकी फाइल को दौड़ाने की गुज़ारिश की। हरदा ने अपने छोटे भाई हरक को चुकुम और सुंदरखाल का दौरा कर ग्रामीणों का दर्द भी जानने कहा जिसे वन मंत्री हरक ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद हरदा ने हरक की हाल तक कैबिनेट में उनके सहयोगी रहे वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य से भी वार्ता करा दी।

जाहिर है आपदा के हालात में हरदा ने मंत्री हरक को फोन लगाकर न केवल ग्रामीणों का दर्द बयां किया बल्कि दो दिन पहले छोटे भाई से मिले इशारे पर अपना रुख भी जाहिर कर दिया। यानी दोनों दिग्गजों के बीच पांच साल से जमी बर्फ अब बिघल रही है। सवाल है कि क्या बीजेपी इस नए सियासी तापमान की गर्माहट महसूस कर पा रही?


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