
देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के पहले चरण के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची ने बड़ा चुनावी संकेत दिया है। राज्य निर्वाचन विभाग के अनुसार 8,26,977 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जबकि नई ड्राफ्ट सूची में 71,33,785 मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही करीब 19 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आई हैं, जिन पर चुनाव आयोग नोटिस जारी करेगा।
यह केवल आंकड़ों की खबर नहीं है, बल्कि लाखों मतदाताओं के लिए अपने मतदान अधिकार को सुरक्षित रखने का अवसर भी है। यदि आपका नाम सूची से हट गया है या रिकॉर्ड में त्रुटि है, तो आपके पास 13 अगस्त 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज कराने का मौका है।
उत्तराखंड SIR 2026 में क्या-क्या बदला?
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार 1 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए 8 जून से 7 जुलाई तक विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया। इस दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) ने गणना पत्र वितरित किए, उनका डिजिटाइजेशन किया और प्राप्त सूचनाओं का सत्यापन किया।
इस प्रक्रिया के बाद तैयार ड्राफ्ट मतदाता सूची में अब 71.33 लाख मतदाता शामिल हैं। वहीं 8.26 लाख नाम विभिन्न कारणों से हटाए गए हैं। विभाग का कहना है कि हटाए गए नामों में मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य कारणों से अपात्र पाए गए मतदाता शामिल हो सकते हैं। अंतिम निर्णय दावा-आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही स्पष्ट होगा।
19 लाख मतदाताओं को मिलेगा नोटिस
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि ड्राफ्ट सूची में शामिल लगभग 19 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में अलग-अलग प्रकार की विसंगतियां मिली हैं।
इन मामलों में संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) नोटिस जारी करेंगे। नोटिस मिलने के बाद मतदाता को एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखना होगा। इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर शिविर लगाए जाएंगे, जबकि मैदानी क्षेत्रों में तहसील, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर भी विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे।
यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो क्या करें?
यदि आपका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं दिख रहा है, घबराने की जरूरत नहीं है। निर्वाचन आयोग ने इसके लिए दावा और आपत्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
* नया नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरें।
* किसी नाम को हटाने के लिए फॉर्म-7 का उपयोग करें।
* नाम, पता या अन्य विवरण में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरें।
* फॉर्म-6 और फॉर्म-8 के साथ Annexure-4 देना अनिवार्य है।
* आवेदन संबंधित BLO के माध्यम से ऑफलाइन या ECINet ऐप के जरिए ऑनलाइन किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण तारीखें
| प्रक्रिया |. तिथि |
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| ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी | 14 जुलाई 2026 |
| दावा एवं आपत्ति की अवधि | 14 जुलाई – 13 अगस्त 2026 |
| नोटिस एवं दावों का निस्तारण | 11 सितंबर 2026 तक |
| अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित | 15 सितंबर 2026 |
मतदान केंद्रों की संख्या भी बढ़ी
इस बार निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्रों का विस्तार भी किया है। राज्य में मतदान केंद्रों की संख्या 11,733 से बढ़ाकर 12,543 कर दी गई है। यानी 810 नए मतदान केंद्र बनाए गए हैं ताकि मतदाताओं को अधिक सुविधाजनक मतदान केंद्र उपलब्ध हो सकें।
किन दस्तावेजों से होगा सत्यापन?
निर्वाचन आयोग ने सत्यापन के लिए कई दस्तावेज मान्य किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
* जन्म प्रमाण पत्र
* पासपोर्ट
* दसवीं या अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र
* स्थायी निवास प्रमाण पत्र
* सरकारी पहचान पत्र या पेंशन दस्तावेज
* परिवार रजिस्टर
* भूमि/मकान आवंटन प्रमाण पत्र
* जाति प्रमाण पत्र
* वन अधिकार प्रमाण पत्र
* आधार (निर्वाचन आयोग के लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार)
SIR क्या है और क्यों जरूरी है?
Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन अभियान है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सूची में केवल पात्र मतदाताओं के नाम रहें। इस प्रक्रिया में मृतक, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नाम हटाए जाते हैं और नए पात्र नागरिकों को सूची में शामिल किया जाता है। चुनाव की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या करें ताकि आपका वोट सुरक्षित रहे?
यदि आपने हाल ही में घर बदला है, विवाह के बाद पता बदला है, 18 वर्ष की आयु पूरी की है या आपको नोटिस मिला है, तो अंतिम तिथि का इंतजार न करें। जल्द से जल्द संबंधित BLO, ERO कार्यालय या ECINet ऐप के माध्यम से अपने दस्तावेज जमा करें और अपना नाम सत्यापित करा लें। समय पर कार्रवाई करने से आपका मतदान अधिकार सुरक्षित रहेगा।
उत्तराखंड की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची महज एक प्रशासनिक डॉक्यूमेंट नहीं, बल्कि आगामी चुनावों की आधारशिला है। 8.26 लाख नाम हटने, 19 लाख रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने और 810 नए मतदान केंद्र बनने जैसे आंकड़े इस पुनरीक्षण को राज्य के सबसे महत्वपूर्ण चुनावी अभियानों में शामिल करते हैं।



