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SIR में फर्जी और बेनामी आपत्तियों की शिकायत पर बड़ा एक्शन, 6 जिलों के DM को जांच के निर्देश

फार्म-7 के दुरुपयोग की शिकायत पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय सक्रिय, हरिद्वार समेत छह जिलों को निर्वाचन नियमों का कड़ाई से पालन कराने के आदेश

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  • SIR पर बड़ा अपडेट: फार्म-7 की फर्जी-बेनामी आपत्तियों की शिकायत, 6 जिलों के DM को कार्रवाई के आदेश

काशीपुर। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) प्रक्रिया में फार्म-7 के कथित दुरुपयोग कर मिथ्या, फर्जी और बेनामी आपत्तियां लगाए जाने की शिकायत पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने संज्ञान लिया है। सूचना अधिकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता तथा अधिवक्ता नदीम उद्दीन की शिकायत और सुझावों के आधार पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने प्रदेश के छह जिलों के जिलाधिकारियों एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को मामले का परीक्षण कर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्र में नदीम उद्दीन की शिकायत की प्रति भी संबंधित जिलों को भेजी गई है, ताकि उसमें उठाए गए बिंदुओं का परीक्षण किया जा सके और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो।

 सर्वाधिक आपत्तियों वाले छह जिलों पर फोकस

उत्तराखंड के उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी ने पत्र संख्या 1416, दिनांक 20 अगस्त 2026 के माध्यम से छह जिलों के जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इनमें हरिद्वार, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर शामिल हैं।

पत्र में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि नदीम उद्दीन के पत्र में उल्लिखित बिंदुओं का परीक्षण करते हुए संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को दावे एवं आपत्तियों की प्राप्ति तथा उनके निस्तारण के दौरान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950, निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 तथा मैनुअल ऑफ इलेक्टोरल रोल्स-2023 में निर्धारित प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाए।

नदीम ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजी थी शिकायत

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, समाजसेवी तथा 45 कानूनी पुस्तकों के लेखक नदीम उद्दीन एडवोकेट ने 18 अगस्त 2026 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड को शिकायत एवं सुझाव भेजे थे।

उन्होंने SIR प्रक्रिया में फार्म-7 का कथित दुरुपयोग कर गलत, मिथ्या, फर्जी और बेनामी आपत्तियां दर्ज कराने की प्रवृत्ति एवं घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई का अनुरोध किया था। नदीम ने अपनी शिकायत में उत्तराखंड की उन विधानसभा सीटों का विश्लेषण भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजा था, जहां अपेक्षाकृत अधिक संख्या में आपत्तियां सामने आई हैं।

आपत्तिकर्ता की पुष्टि न होने पर आपत्ति खारिज करने का सुझाव

नदीम उद्दीन ने अपनी शिकायत में सुझाव दिया था कि जिन आपत्तिकर्ताओं की पुष्टि नहीं हो पाती है, उनकी आपत्तियां निरस्त की जाएं। वहीं, जिन आपत्तियों की पुष्टि होती है, उनकी जांच के दौरान आपत्तिकर्ता से आवश्यक साक्ष्य लिए जाएं।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिस मतदाता के नाम अथवा प्रविष्टि पर आपत्ति लगाई गई है, उसे अपना पक्ष रखने और आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर देकर ही निर्णय लिया जाए।

फाइल फोटो: एडवोकेट नदीम उद्दीन, आरटीआई कार्यकर्ता


इसके अलावा नदीम ने कथित रूप से फर्जी एवं बेनामी आपत्तियां लगाने वाले लोगों के विरुद्ध फौजदारी मुकदमा दर्ज करने सहित प्रभावी कार्रवाई का भी अनुरोध किया है।

शिकायत में किन कानूनी प्रावधानों का हवाला?

नदीम उद्दीन ने अपनी शिकायत में कथित फर्जी, बेनामी और गलत आपत्तियां लगाने की स्थिति में लागू होने वाले अपराधों और कानूनी प्रावधानों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार शिकायत में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31, आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 61, 217, 221, 196(1), 229(2) और 336(4) के तहत दंडनीय अपराधों का विवरण दिया गया है।

यह उल्लेख शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए कानूनी आधार के रूप में किया गया है; संबंधित मामलों में अपराध या दायित्व का अंतिम निर्धारण सक्षम प्राधिकारी/न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।

निर्वाचन अधिकारियों का आभार, मताधिकार संरक्षण की उम्मीद

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायत का संज्ञान लेकर छह जिलों को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने पर नदीम उद्दीन ने आभार व्यक्त किया है।

डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड
उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित जिलों के अधिकारी शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर प्रभावी कार्रवाई करेंगे और सभी पात्र नागरिकों के संवैधानिक मताधिकार के संरक्षण को सुनिश्चित करेंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

SIR के दौरान मतदाता सूची में दावे और आपत्तियां लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में फर्जी, गलत या बेनामी आपत्तियों की शिकायतें सामने आने पर उनकी निष्पक्ष जांच और प्रत्येक पात्र मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देना मतदाता सूची की शुचिता और नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यहां पढ़िए एडवोकेट एवं आरटीआई नदीम उद्दीन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति
एस.आई.आर. 2027 में फार्म 7 के दुरूपयोग की शिकायत पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा 6 जिलाधिकारियों को कार्यवाही के आदेश
सूचना अधिकार व मानवाधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट द्वारा की गयी शिकायत व सुझाव की प्रति भी कार्यवाही हेतु उन्हें भेजी गयी
श्री नदीम ने सर्वाधिक आपत्तियों वाली सीटों के विश्लेषण सहित भेजे थे मुख्य निर्वाचन अधिकारी को शिकायत व सुझाव
काशीपुर। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा फार्म 7 के दुरूपयोग करके मिथ्या फर्जी व बेनामी आपत्तियां लगाने की सूचना अधिकार व मानवाधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट द्वारा की गयी शिकायत व सुझाव को संज्ञान में लेकर इसका परीक्षण कर प्रभावी कार्यवाही को 6 जिलों के जिलाधिकारियों एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया है। इसके साथ श्री नदीम द्वारा भेजी शिकायत व सुझाव सम्बन्धी पत्र की प्रति भी संलग्न की गयी है।
काशीपुर निवासी सूचना अधिकार व मानवाधिकार कार्यकर्ता, समाज सेवी तथा 45 कानूनी पुस्तकों के लेखक नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने एस.आइ.आर.2026 में फार्म 7 का दुरूपयोग करके गलत मिथ्या फर्जी व बेनामी आपत्तियां की प्रवृत्ति व घटनाआंे को रोकने के लिये शिकायत व सुझाव मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड को भेजकर इस पर प्रभावी कार्यवाही का अनुरोध किया था।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय उत्तराखंड के उपमुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड किशन सिंह नेगी ने उत्तराखंड में अधिक संख्या में आपत्तियों वाले 6 जिलों के जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को संबोधित पत्र संख्या 1416 दिनांक 20 अगस्त 2026 भेजकर श्री नदीम के पत्र में उल्लिखित बिन्दुओं का परीक्षण कर सम्बन्धित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को दावे/आपत्तियोें की प्राप्ति एवं निस्तारण के कार्य में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 तथा मैनुअल आॅफ इलैक्टोरल रोल्स 2023 के अन्तर्गत निर्धारित प्रक्रिया तथा आयोग द्वारा तद विषयक समय-समय पर जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने हेतु निर्देशित करने का निर्देश दिया गया है। इस पत्र की प्रति श्री नदीम को भी प्रेषित की गयी है। जिन जिलों के जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को उक्त पत्र भेजा गया है उसमें हरिद्वार, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, चम्पावत, नैनीताल तथा उधमसिंह नगर शामिल है।
श्री नदीम ने उनके पत्र का संज्ञान लेकर कार्यवाही को निर्देशित करने के लिये मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी.वी.आर. पुरूषोत्तम तथा उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी व अन्य सम्बन्धित अधिकारियों का आभार व धन्यवाद व्यक्त किया हैं तथा आशा व्यक्त की हैैं जिलो के सम्बन्धित अधिकारीगण उस पर कार्यवाही करके सभी पात्र नागरिकों के मताधिकार के संवैधानिक अधिकार का संरक्षण सुनिश्चित करेंगे।
श्री नदीम ने दिनांक 18 अगस्त 2026 को प्रेषित शिकायत व सुझाव में आपत्तिकर्ता से पुष्टि न होने वाली आपत्तियां निरस्त करने, पुष्टि वाली आपत्तियों की जांच में आपत्तिकर्ता से साक्ष्य मांगकर तथा जिस पर आपत्ति लगायी गयी है, उसे अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर देकर निर्णय लेने तथा फर्जी तथा बेनामी आपत्तियां लगाने वालों के विरूद्ध फौजदारी मुकदमें दर्ज कराने सहित प्रभावी कार्यवाही का अनुरोध किया है। श्री नदीम ने इस शिकायत व सुझाव में उन अपराधों का विवरण भी दिया है जो ऐसे फर्जी व बेनामी तथा गलत आपत्तियां लगाने वालांें के द्वारा किये गये है। इसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31, आई.टी.एक्ट की धारा 66 सी, 66डी, भारतीय न्याय संहिता की धारा 61, 217, 221, 196(1), 229(2) तथा 336(4) के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध शामिल है।
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