
- 11.26 रुपये की महंगी बिजली का करार कांग्रेस का, 5.74 रुपये में 25 साल की बिजली भाजपा की: भट्ट

देहरादून। अडाणी पावर के साथ 1320 मेगावाट थर्मल पावर खरीद के करार को लेकर कांग्रेस के हमले पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य पर नवाबी हमला बोलते हुए कहा है कि कांग्रेस को धामी सरकार के बिजली करार पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल में किए गए महंगे बिजली समझौतों का हिसाब देना चाहिए। महेंद्र भट्ट ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौर में काशीपुर के गैस पावर प्लांटों के लिए 11.26 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली का करार किया गया था, जबकि धामी सरकार ने 25 साल के लिए 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दर पर थर्मल पावर का करार किया है।
भाजपा अध्यक्ष भट्ट ने कहा कि गैस पावर की कीमत बाजार में गैस के दाम बढ़ने के साथ प्रभावित होती है और उत्पादन न होने की स्थिति में भी फिक्स चार्ज का भुगतान करना पड़ता है। इसके विपरीत भाजपा सरकार ने भविष्य की बिजली जरूरतों को देखते हुए थर्मल पावर की अपेक्षाकृत कम दर पर दीर्घकालिक व्यवस्था की है। उनका कहा कि ट्रांसमिशन चार्ज जोड़ने के बाद भी इसकी लागत छह रुपये प्रति यूनिट से अधिक नहीं होगी।
कांग्रेस के करार का बोझ आज भी उठा रहा राज्य: भाजपा अध्यक्ष
महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस शासन में पावर सेक्टर में दूरदर्शिता के बजाय ऐसे करार हुए जिनका वित्तीय बोझ आज भी राज्य को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के दौर में 11.26 रुपये प्रति यूनिट की दर वाला गैस पावर करार उत्तराखंड के लिए महंगा साबित हुआ, जबकि धामी सरकार ने कम दर पर थर्मल पावर की दीर्घकालिक व्यवस्था कर राज्य की भावी जरूरतों को सुरक्षित करने का प्रयास किया है।
भट्ट ने कांग्रेस के उस आरोप को भी खारिज किया कि अडाणी पावर को कोल ब्लॉक मुफ्त में दिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड को आवंटित कोल ब्लॉक का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में होगा और इसके लिए केंद्र को भुगतान किया जाएगा। उनके मुताबिक यदि थर्मल पावर प्लांट उत्तराखंड में स्थापित किया जाता तो छत्तीसगढ़ से कोयला लाने की परिवहन लागत बढ़ती। ऐसे में सरकार ने बिजली की लागत को कम रखने के लिहाज से निर्णय लिया है।
संकट के समय थर्मल पावर ज्यादा भरोसेमंद: भट्ट
भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था को केवल हाइड्रो और सोलर पर निर्भर नहीं रखा जा सकता। मानसून और आपदा के दौरान जलविद्युत और सौर उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय संकट या युद्ध की स्थिति में गैस की आपूर्ति और कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में थर्मल पावर को बिजली के भरोसेमंद स्रोतों में शामिल करते हुए दीर्घकालिक व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल की बिजली कटौती का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि उस दौर में कई क्षेत्रों में 10 घंटे से अधिक की बिजली कटौती होती थी, जबकि वर्तमान सरकार में राज्य को 24 घंटे बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने को भी सरकार की उपलब्धि बताया।
‘ऊर्जा प्रदेश सिर्फ नारे से नहीं, परियोजनाओं से बनेगा’
महेंद्र भट्ट ने कहा कि धामी सरकार ने उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने के लिए हाइड्रो, स्मॉल हाइड्रो, सोलर, थर्मल, जियोथर्मल और पंप स्टोरेज जैसे ऊर्जा स्रोतों पर एक साथ काम शुरू किया है। उनके अनुसार राज्य में सोलर पावर की क्षमता एक हजार मेगावाट से अधिक हो चुकी है और लंबे समय से अटकी लघु जलविद्युत परियोजनाओं के आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
उन्होंने 300 मेगावाट लखवाड़, 660 मेगावाट किसाऊ, त्यूणी-प्लासू और सरकारी भ्योल-रसियाबगड़ जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं से भविष्य में करीब एक हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की दिशा में रास्ता तैयार होगा।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आने वाले वर्षों में स्मॉल हाइड्रो, सोलर, जियोथर्मल और पंप स्टोरेज परियोजनाओं के विस्तार से उत्तराखंड देश के अग्रणी ऊर्जा राज्यों में शामिल हो सकता है। इससे राज्य की अपनी बिजली जरूरतें पूरी होने के साथ अतिरिक्त बिजली से राजस्व, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। परियोजना क्षेत्रों में लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड के जरिए विकास कार्यों को भी गति मिलने का दावा उन्होंने किया।
अब जिस तरह से सत्ताधारी दल भाजपा ने मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया है उसके बाद साफ़ है कि यह पूरा विवाद अब ‘महंगी बनाम सस्ती बिजली’ के सवाल में तब्दील हो चुका है। ज़ाहिर है आने वाले दिनों में 11.26 रुपये और 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दरों का अंतर इस राजनीतिक बहस को और तूल दे सकता है।
- भट्ट बोले- पहले कांग्रेस अपनी सरकार के कार्यकाल में किए महंगे बिजली सौदे का उत्तराखंड की जनता को हिसाब दें

सस्ती बिजली का किया इंतजाम
कांग्रेस ने 11.26 रुपए, भाजपा ने किया 5.74 रुपए प्रति यूनिट का करार
थर्मल पावर पर भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने नेता प्रतिपक्ष आर्य को दिखाया आईंना
ऊर्जा प्रदेश बनाने को चार साल में हुए ऐतिहासिक काम, हाइड्रो, स्माल हाइड्रो, सोलर, थर्मल, जियो थर्मल, पंप स्टोरेज पावर प्लांट से बढ़ेगा बिजली उत्पादन
देहरादून। अडाणी पावर के साथ 1320 मेगावाट थर्मल पावर के करार पर विपक्ष के उठाए सवालों पर भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को आईंना दिखाते हुए कांग्रेस सरकार में 2016 में हुए महंगे गैस पावर सौदे की याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस के करार के कारण आज गैस पावर का 11.26 रुपए प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना पड़ता है। इसमें कई बार बिना बिजली का उत्पादन हुए भी फिक्स चार्ज का करोड़ों का हर महीने अलग भुगतान करना होता है। वहीं भाजपा ने 5.74 रुपए प्रति यूनिट का थर्मल पावर का करार अगले 25 साल के लिए किया है।
महेंद्र भट्ट कहा कि कांग्रेस राज में पावर सेक्टर में सिर्फ लूट हुई, जबकि धामी सरकार में 25 साल के लिए न सिर्फ सस्ती बिजली का इंतजाम हुआ, बल्कि उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने को असल मायनों में काम हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज में काशीपुर के गैस पावर प्लांटों से 11.26 रुपए प्रति यूनिट की दर से महंगी बिजली का करार हुआ, जो आज तक राज्य के लिए मुसीबत बना हुआ है। बाजार में गैस के दाम महंगे होने पर इन पावर प्लांट को चलाना मुश्किल होता है। इसके बावजूद उन्हें हर महीने फिक्स चार्ज का करोड़ों का भुगतान करना होता है। कांग्रेस के करार के कारण आज राज्य को 11.26 रुपए प्रति यूनिट की दर से करार किया, वहीं भाजपा की धामी सरकार ने सबसे विश्वसनीय मानी जानी वाली थर्मल पावर का करार सिर्फ 5.74 रुपए प्रति यूनिट में किया। इसमें यदि ट्रांसमिशन चार्ज भी जोड़ दिए जाएं, तो भी ये कीमत छह रुपए से अधिक नहीं है। सरकार के इस कदम से उत्तराखंड ने अपनी भविष्य की बिजली जरूरतों को भी सुरक्षित किया है। ये करार अभी तक देश में हुए थर्मल पावर के सभी करारों में सबसे सस्ता करार है।
भट्ट ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को अपनी जानकारी दुरुस्त करनी चाहिए। अडानी पावर को फ्री में कोल ब्लॉक नहीं मिला है। केंद्र सरकार के उत्तराखंड को आवंटित कोल ब्लॉक का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में होगा। केंद्र सरकार को इस कोल ब्लॉक का भुगतान होगा। इससे पैदा होने वाली बिजली उत्तराखंड को सस्ती दरों पर मिलेगी। यदि यह पावर प्लांट उत्तराखंड में लगाया जाता तो छत्तीसगढ़ से कोयला उत्तराखंड लाने में कोयला परिवहन का खर्चा बढ़ जाता ।धामी सरकार ने स्मार्ट निर्णय लिया और सस्ती बिजली का इंतजाम किया।
भट्ट ने कहा कि मानसून, आपदा के दौरान सोलर और हाइड्रो से बिजली उत्पादन प्रभावित होता है। युद्ध के समय गैस विदेशों से आना बंद हो जाती है। उस दौरान गैस महंगी होने के कारण गैस पावर चल नहीं पाते। ऐसे में थर्मल पावर को सबसे विश्वसनीय बिजली माना जाता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी सरकार के समय की बिजली कटौती याद रखनी चाहिए। किस तरह 10 घंटे से अधिक बिजली कटौती होती थी। आज धामी सरकार में 24 घंटे बिजली की सप्लाई हो रही है। किसानों को सस्ती बिजली मिल रही है।
भट्ट ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासन में कभी भी उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने की दिशा में कोई काम नहीं किया। जबकि धामी सरकार ने न सिर्फ पुराने रुकी हुई परियोजनाओं पर काम शुरू किया, बल्कि ऊर्जा के हर क्षेत्र में बिजली उत्पादन बढ़ाने को जमीनी काम किया। आज उत्तराखंड में एक हजार मेगावाट से अधिक सोलर पावर उत्पादन हो रहा है। जो कांग्रेस राज में सिर्फ एक सपना था। दशकों से रुकी हुई लघु जल विद्युत परियोजनाओं का पारदर्शी तरीके से आवंटन कर काम शुरू कराया।
भट्ट ने कहा कि 300 मेगावाट की लखवाड़, 660 मेगावाट किसाऊ, त्यूणी प्लासू, सरकारी भ्योल रसियाबगड़ जैसे बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा कर एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन के रास्ते तैयार किए। वहीं स्मॉल हाइड्रो, सोलर पावर, जियो थर्मल, पंप स्टोरेज पावर प्लांट से आने वाले सालों में उत्तराखंड पावर सेक्टर में देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा होगा। इन योजनाओं से उत्तराखंड सिर्फ अपनी बिजली जरूरतों को ही पूरा नहीं करेगा, बल्कि देश की बिजली जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग देगा। इससे आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन राज्य के राजस्व का सबसे बड़ा जरिया बनेगा। लाखों की संख्या में रोजगार, स्वरोजगार बढ़ेगा। इन बिजली योजनाओं से मिलने वाले लोकल एरिया डेवपलमेंट फंड से राज्य के दुरुस्थ और परियोजना क्षेत्रों में विकास कार्य होंगे।
(मनवीर सिंह चौहान, प्रदेश मीडिया प्रभारी,भाजपा उत्तराखंड(



