

देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड से राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए नैनीताल जिले के वरिष्ठ नेता दिनेश आर्य को उम्मीदवार घोषित किया है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार दोपहर को इसकी औपचारिक घोषणा की। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि छह अक्टूबर है, जबकि मतदान 16 अक्टूबर को होना है।
राजनीतिक गलियारों में भाजपा द्वारा दिनेश आर्य को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। सियासी चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं— दलित प्रतिनिधित्व, कुमाऊं क्षेत्र का संतुलन, संगठन के समर्पित कार्यकर्ता का सम्मान और विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब।
उत्तराखंड की इस सीट पर वर्तमान राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। इसे लेकर भाजपा में लंबे समय से मंथन चल रहा था। पार्टी की प्रदेश कोर कमेटी ने विभिन्न दावेदारों के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे थे और अंततः हाईकमान ने दिनेश आर्य के नाम पर मुहर लगाई।
दिनेश आर्य संगठन और सरकार दोनों में लंबा अनुभव रखते हैं। वह वर्तमान में उत्तराखंड राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं। इससे पहले वह मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के रूप में कार्य कर चुके हैं। भाजपा संगठन में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह भाजपा नैनीताल के जिलाध्यक्ष, अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री तथा भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षित स्वयंसेवक हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति के तहत दिनेश आर्य पर भरोसा जताया है।
पिछले कुछ दिनों से पार्टी के भीतर विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से जुड़े नामों पर चर्चा चल रही थी। दिनेश आर्य का संबंध कुमाऊं क्षेत्र से माना जाता है और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। अनुसूचित समाज से आने वाले आर्य को पार्टी के जमीनी और संगठनात्मक चेहरों में गिना जाता है। ऐसे में उनके चयन को भाजपा के सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। राज्यसभा की यह सीट वर्तमान में भाजपा के नरेश बंसल के पास थी।
संगठन के कार्यकर्ता से राज्यसभा तक
भाजपा ने राज्यसभा के लिए जिस नाम पर भरोसा जताया है, उसे संगठन का जमीनी और समर्पित कार्यकर्ता माना जाता है। हल्द्वानी के कालाढूंगी रोड निवासी दिनेश आर्य लंबे समय से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। उन्होंने संगठन में मंडल और जिला स्तर से लेकर प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं।
राजनीतिक गलियारों में उनके चयन को लेकर यह चर्चा भी है कि भाजपा ने इस बार किसी बड़े पदाधिकारी या चर्चित चेहरे के बजाय संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले एक सामान्य कार्यकर्ता को अवसर दिया है। नैनीताल क्षेत्र से विधानसभा टिकट के संभावित दावेदारों में भी उनका नाम समय-समय पर चर्चा में रहा है। भाजपा के भीतर उनके चयन को संगठन के प्रति निष्ठा और लंबे कार्यकाल का सम्मान माना जा रहा है।
क्या शुद्धिकरण विवाद का जवाब है दिनेश आर्य पर दांव?
राजनीतिक गलियारों में भाजपा द्वारा दिनेश आर्य को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के महीनों में हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण विवाद को कांग्रेस ने जोर-शोर से उठाया था और इसे दलित सम्मान से जोड़कर भाजपा पर निशाना साधा था। यह मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा और संसद में भी गूंजा।
ऐसे समय में भाजपा ने नैनीताल जिले के हल्द्वानी निवासी और अनुसूचित समाज से आने वाले वरिष्ठ संगठनात्मक कार्यकर्ता दिनेश आर्य को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
पार्टी के भीतर इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय नेतृत्व का सोचा-समझा कदम माना जा रहा है। भाजपा नेताओं का मानना है कि संगठन में लंबे समय से सक्रिय और अपेक्षाकृत साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजने का फैसला पार्टी की सामाजिक समरसता और संगठन आधारित राजनीति को मजबूत करता है।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय कांग्रेस के उन आरोपों की धार को कमजोर करने का प्रयास भी माना जा सकता है, जो शुद्धिकरण विवाद के बाद लगातार उठाए जा रहे थे।
प्रोफाइल: दिनेश आर्य
निवास: कालाढूंगी रोड, हल्द्वानी
वर्तमान दायित्व: उपाध्यक्ष, राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद
पूर्व दायित्व: मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी, भाजपा नैनीताल जिलाध्यक्ष
संगठन: पूर्व राष्ट्रीय मंत्री, भाजपा अनुसूचित मोर्चा
पृष्ठभूमि: आरएसएस के तृतीय वर्ष प्रशिक्षित स्वयंसेवक



