
Dhami Cabinet Meeting in Banbasa, Champawat: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को चम्पावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में पहली बार कैबिनेट बैठक हुई। भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र में हुई इस बैठक में वन भूमि, जमीन के अधिकार, पंतनगर एयरपोर्ट, राजकोषीय घाटा, स्थानीय निकाय, सरकारी कर्मचारियों, भर्ती प्रक्रिया, सतर्कता, सिंचाई, सब्सिडी, उच्च शिक्षा, निजी विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेजों से जुड़े 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा बनबसा-टनकपुर क्षेत्र के लिए मुख्यमंत्री ने चार बड़ी घोषणाएं भी कीं।

बनबसा में कैबिनेट बैठक क्यों अहम?
उत्तराखंड में अब तक शासन और कैबिनेट का मुख्य केंद्र देहरादून रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री धामी ने बनबसा में कैबिनेट बैठक कर साफ संकेत दिया कि सरकार की बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी कैबिनेट बैठकें आयोजित की जाएंगी।
सीमांत क्षेत्र में कैबिनेट की बैठक ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार का वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम सीमावर्ती गांवों के विकास और वहां बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर केंद्रित है। ऐसे में बनबसा में राज्य कैबिनेट की बैठक को सीमांत क्षेत्रों को शासन के केंद्र में लाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर काम कर रही है।
जमीन से लेकर एयरपोर्ट तक बड़े फैसले
1. वन भूमि हस्तांतरण के लिए PMU बनेगा
वन भूमि हस्तांतरण प्रकरणों के तकनीकी परीक्षण, ऑनलाइन संरेखण के परीक्षण और नोडल कार्यालय को मजबूत करने के लिए नोडल अधिकारी, वन संरक्षण, उत्तराखंड के कार्यालय में परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) गठित करने और इसके लिए 6 पदों को मंजूरी दी गई।
2. वर्ग-3 और वर्ग-4 भूमि के पट्टेदारों को भूमिधरी अधिकार
वर्ग-3 एवं वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों/कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने, नैनीताल के नगर पंचायत लालकुआं में संबंधित पट्टेदारों/कब्जाधारकों को संक्रमणीय भूमिधर अधिकार देने और देहरादून के परगना जौनसार-बावर में वर्ग-4 की भूमि के विनियमितीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। संबंधित भूमि का विनियमितीकरण 2004 के सर्किल रेट के आधार पर एक वर्ष के लिए विस्तारित किया जाएगा। इसके बाद प्रचलित सर्किल रेट लागू होगा।
3. पंतनगर एयरपोर्ट के लिए ₹66.29 करोड़
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तारीकरण के लिए हस्तांतरित परिसंपत्तियों के संबंध में उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को ₹66.2916 करोड़ की अवशेष धनराशि अवमुक्त करने को मंजूरी दी गई।
4. संपत्ति की खरीद-बिक्री में PAN Verification
स्टाम्प एवं निबंधन विभाग में संपत्ति के क्रय-विक्रय से संबंधित लेन-देन में क्रेता-विक्रेता और अन्य संबंधित पक्षों द्वारा दिए गए PAN के सत्यापन की व्यवस्था लागू होगी। इसका उद्देश्य गलत या फर्जी PAN के इस्तेमाल को कम करना और आयकर विभाग को रिपोर्टिंग में डेटा की शुद्धता एवं पारदर्शिता बढ़ाना है।
सरकार ने राजकोषीय सीमा भी तय की
5. राजकोषीय घाटा GSDP के 3% तक
उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी गई।
1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा GSDP का 3 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल संचयी ऋण की अधिकतम सीमा GSDP का 30 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
आपदा एवं सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों में नियमानुसार निर्धारित सीमा से अधिक घाटे के लिए छूट का प्रावधान रहेगा।
6. वन विभाग में विभागाध्यक्ष व्यवस्था बदलेगी
निदेशक, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व को विभागाध्यक्ष की सूची से हटाकर मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं, नैनीताल और मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल, पौड़ी को विभागाध्यक्ष घोषित किया जाएगा।
इससे वनाग्नि, दैवीय आपदा, बाढ़ नियंत्रण और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी तात्कालिक परिस्थितियों में कार्रवाई तेज करने का उद्देश्य है।
7. छठवें राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में
छठवें राज्य वित्त आयोग द्वारा पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के संबंध में प्रस्तुत प्रतिवेदन को आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत करने को मंजूरी दी गई।
आयोग ने 2026-27 से 2030-31 के लिए राज्य के शुद्ध कर राजस्व से स्थानीय निकायों को किए जाने वाले अंतरण और वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर संस्तुतियां दी हैं।
8. सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति का प्रावधान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 19 की उपधारा (3) लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करने को मंजूरी दी गई।
निर्धारित परिस्थितियों में जिला मजिस्ट्रेट राज्य सरकार को 14 दिन की सूचना देने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को संबंधित मामले के लिए सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेगा।
सरकारी कर्मचारियों और भर्तियों से जुड़े फैसले
9. कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी नियमों में बदलाव
उत्तराखंड राज्य कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई। चल-अचल और बहुमूल्य संपत्ति से जुड़े प्रावधानों को वर्तमान परिस्थितियों और अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली के अनुरूप स्पष्ट व अद्यतन किया जाएगा।
10. सतर्कता अधिष्ठान की अधिसूचना में संशोधन
भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने के बाद सतर्कता अधिष्ठान से संबंधित वर्ष 1965 की अधिसूचना में परिवर्तित धाराओं के अनुरूप आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
11. समूह ‘ग’ के पदों पर इंटरव्यू में बदलाव
राज्याधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के पदों पर साक्षात्कार प्रक्रिया विखंडन (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई।
जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी के पद को संबंधित परिशिष्ट से हटाया जाएगा। वहीं उप कारापाल के पद पर शारीरिक दक्षता परीक्षा और लिखित परीक्षा होने के कारण साक्षात्कार समाप्त किया जाएगा।
12. लोक सेवा आयोग के परिसीमन में बदलाव
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (कृत्यों का परिसीमन) (संशोधन) विनियम, 2026 को मंजूरी दी गई। जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी का पद लोक सेवा आयोग के परिशिष्ट से बाहर किया जाएगा, क्योंकि सेवा नियमावली के अनुसार यह राजपत्रित समूह ‘ख’ का पद है।
13. सतर्कता अधिष्ठान में पदों का पुनर्गठन
सतर्कता अधिष्ठान के ढांचे के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई।
08 आरक्षी ना.पु., 01 आरक्षी डाक रनर और 02 आरक्षी चालक, कुल 11 पद समर्पित होंगे। इसके अलावा मुख्य आरक्षी ना.पु. के 05 पद बढ़ाए जाएंगे और अपर उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस के 03, मुख्य आरक्षी डाक रनर के 01, मुख्य आरक्षी चालक के 01 तथा अपर उपनिरीक्षक चालक के 01 नए पद समेत कुल 06 नए पद सृजित होंगे।
परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से लेकर सिंचाई कानून तक
14. मुद्रीकरण की आय का 92% संबंधित एजेंसी को
नियोजन विभाग के तहत उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियम) अधिनियम की धारा 49 में अनुसूची-3 के संशोधन को मंजूरी दी गई।
सार्वजनिक अभिकरणों की परिसंपत्तियों के विनिवेश/मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित सार्वजनिक अभिकरणों को देने का प्रावधान किया गया है।
15. 1873 के कानून की जगह नया सिंचाई विधेयक
अप्रासंगिक अथवा अपर्याप्त हो चुके उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम, 1873 को निरसित करते हुए राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, 2026 विधानसभा में रखने को मंजूरी दी गई।
16. कुक्कुट आहार सब्सिडी अब DBT से
कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना में लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान वर्तमान CBDC/ई-रूपी व्यवस्था की जगह आधार सीडेड/लिंक्ड बैंक खाते के जरिए DBT से किया जाएगा।
17. पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन के लिए नया DG पद
पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभागों में समन्वय, पर्यवेक्षण, एकरूपता और प्रभावी प्रशासन के लिए महानिदेशक का नया पद सृजित करने को मंजूरी दी गई।
उच्च शिक्षा में 1.19 लाख विद्यार्थियों के लिए योजना
18. मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना
राज्य के राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों तथा संबद्ध महाविद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 1.19 लाख विद्यार्थियों के लिए मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना, 2026 को मंजूरी दी गई।
इस योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता और उद्यमिता बढ़ाना है। पांच वर्षों में इस योजना पर लगभग ₹200 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
19. निजी विश्वविद्यालयों के लिए नए मानक
निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना की नीति एवं मानकों में संशोधन को मंजूरी दी गई।
पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर और मैदानी क्षेत्रों में न्यूनतम 20,000 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र की व्यवस्था होगी। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अलग मूल्यांकन मानक भी निर्धारित किए जाएंगे।
20. नरेंद्रनगर में नया उप निबंधक कार्यालय
टिहरी जिले की तहसील नरेंद्रनगर में उप निबंधक कार्यालय की स्थापना को मंजूरी मिली। इसके क्षेत्राधिकार में नरेंद्रनगर तहसील के 98 और उप तहसील पावकी देवी के 35, कुल 133 राजस्व गांव शामिल होंगे।
21. सौंदर्यीकरण उपशाखा निक्षेपित
न्यायाधिकरण, देहरादून के आदेश और निदेशक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की संस्तुति के आधार पर 7 जनवरी 2022 के शासनादेश से गठित सौंदर्यीकरण उपशाखा को निक्षेपित करने की मंजूरी दी गई।
22. जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था नियमावली में संशोधन
उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था नियमावली, 1952) में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य संशोधित अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी, सुचारू और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए प्रक्रिया एवं प्रक्रियात्मक दिशा-निर्देश स्पष्ट करना है।
23. वैक्टर जनित रोग नियंत्रण की नई नियमावली
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा में नियुक्त कार्मिकों की भर्ती और सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए उत्तराखंड वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई।
24. मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों के वेतन/मानदेय का पुनर्निर्धारण
राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट एवं डेमोन्स्ट्रेटर की कमी को देखते हुए संबंधित पदों पर तैनात कार्मिकों के देय वेतन/मानदेय के पुनर्निर्धारण को मंजूरी दी गई।

बनबसा-टनकपुर के लिए मुख्यमंत्री धामी की 4 बड़ी घोषणाएं
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बनबसा-टनकपुर क्षेत्र के लिए चार महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
पहली— श्रेणी-1 ‘ख’ के पट्टे एवं तराई-भाभर स्टेट के पट्टे की भूमि के पट्टेदारों के विनियमितीकरण की कार्यवाही यथाशीघ्र की जाएगी।
दूसरी— शारदा कॉरिडोर एवं कैनाल कॉरिडोर के अंतर्गत बनबसा और टनकपुर के प्राचीन एवं पौराणिक मंदिरों का सौंदर्यीकरण एवं विस्तारीकरण किया जाएगा।
तीसरी— एपीजे अब्दुल कलाम राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, टनकपुर के विस्तारीकरण के लिए 2.01 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
चौथी— बनबसा एवं टनकपुर शहरी निकायों में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत सरकारी भूमि पर लंबे समय से कच्चे एवं अस्थायी भवनों में रहने वाले नागरिकों को स्थायी एवं पक्के आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।
कैबिनेट बैठक में ‘फर्रा/छन्तोली’ ने भी खींचा ध्यान
बनबसा में हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों को चम्पावत के देवीधुरा की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा से जुड़ी पारंपरिक ‘फर्रा/छन्तोली’ भेंट की गई।
बांस अथवा रिंगाल की खपच्चियों से छतरीनुमा आकार में तैयार की जाने वाली यह पारंपरिक ढाल देवभूमि की लोक संस्कृति और चम्पावत की विशिष्ट पहचान से जुड़ी है।
अब दूसरे सीमांत जिलों पर नजर
बनबसा की कैबिनेट बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगला पड़ाव कौन सा होगा। मुख्यमंत्री ने खुद संकेत दिया है कि कैबिनेट की बैठकें प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में आयोजित की जाएंगी।
यदि आने वाले समय में उत्तरकाशी, चमोली या पिथौरागढ़ जैसे अन्य सीमांत जिलों में भी कैबिनेट बैठकें होती हैं तो बनबसा का प्रयोग राज्य की शासन शैली में एक व्यापक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है।
फिलहाल बनबसा से संदेश साफ है कि सरकार राजधानी से बाहर निकलकर सीमांत तक पहुंचने का दावा कर रही है और अब निगाह इस पर रहेगी कि इस पहल का अगला पड़ाव कौन सा सीमांत जिला बनता है।




