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विस बैकडोर भर्ती घोटाले में नियुक्तियां निरस्त करने का मास्टरस्ट्रोक लगाकर स्पीकर खंडूरी क्या निजी स्टाफ भर्ती लिस्ट वायरल होने से हुई रन आउट ?

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After action on Backdoor Recruitment Scam, now Speaker Ritu Khanduri on Target: कहते हैं सियासत में अगर बात शुचिता और नैतिकता की चले तो किसी भी राजनेता को शुरुआत अपने घर से ही करनी चाहिए। सोशल मीडिया में वायरल कराई जा रही विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण के निजी स्टाफ की भर्ती की सूची को देखकर कम से कम ऐसा ही लगता है कि उनको कटघरे में खड़ा कर दिया गया है।

एक तरफ जहां प्रेमचंद अग्रवाल के समर्थक ऋतु खंडूरी के स्टाफ की लिस्ट वायरल कर ट्रोल कर रहे हैं कि क्या उत्तराखंड में स्पीकर खंडूरी को कोई योग्य सलाहकार और OSD नहीं मिल पाया? तो दूसरी तरफ उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने आरोप लगाया है कि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण को वोट कोटद्वार और यमकेश्वर को जनता करे लेकिन जब लखटकिया नौकरियां बांटने का वक्त आएगा तो वह नेपाल, बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अपने खास लोगों को लाकर कुर्सियों पर बिठा देती हैं।

वैसे स्पीकर ऋतु खंडूरी भूषण ने एक्सपर्ट कमेटी से जांच कराकर नियम विरुद्ध बैकडोर से भर्ती किए गए लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया तो इसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए वह कम है। लेकिन राजनीति में जब आप उच्च नैतिक मूल्य और शुचिता के मानदंड स्थापित करने का दावा करते हैं तो उसी वक्त आप खुद यह भी तय कर देते हैं कि आपके द्वारा स्थापित मानदंडों की कसौटी पर आपको भी परखा जाए।

अब अगर जो सूची पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और अब मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के समर्थकों ने सोशल मीडिया में वायरल की है उसकी असल सच्चाई क्या है यह बताने के लिए स्पीकर ऋतु खंडूरी भूषण को बाकायदा प्रेस वार्ता बुलाकर स्थिति स्पष्ट कर देनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। संभव है निजी स्टाफ की यह वायरल लिस्ट फर्जी हो या अधूरी हो लेकिन सच्चाई से पर्दा खुद स्पीकर ही उठा सकती हैं।

जैसा कि उनका एक बयान लाइव हिंदुस्तान पर पढ़ने को मिला है जिसमें वे कह रही हैं कि वे डरने वाली महिला नहीं हैं। अच्छी बात है क्योंकि डरने वाले तो प्रेमचंद अग्रवाल भी नहीं थे न ही गोविंद सिंह कुंजवाल ही डरे। तभी तो दोनों स्पीकर रहते सैकड़ों नियुक्तियां बैकडोर से कर गए। लेकिन आपने जांच कर पाया कि ये नियुक्तियां नियम विरुद्ध थीं।

वैसे जैसा आपने खुद कहा कि अपने निजी स्टाफ में आपने जिन बाहरी लोगों को रखा वे तीस से चालीस साल का अनुभव लिए हैं और सरकारी कामकाज के लिए अनुभवी लोग चाहिए। गोया उत्तराखंड में सरकारी कामकाज चलाने लायक योग्य और अनुभवी लोग मिले ही नहीं होंगे!

ऋतु खंडूरी ने यह सही कहा कि हाल में उन्होंने विधानसभा में 2016 से लेकर 2021 तक की गई 228 तदर्थ नियुक्तियों को निरस्त किया है लिहाजा उनको भी हिट किया जाएगा ही। यह भी सही है कि खुद को प्रेमचंद अग्रवाल का करीबी बता रहे सुमित सेठी ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर स्पीकर ऋतु खंडूरी के स्टाफ संबंधी पोस्ट शेयर की जो तेजी से वायरल हो गई और अब विपक्षियों से लेकर कई यूजर ऋतु खंडूरी पर डबल स्टैंडर्ड यानी दोहरे मानक अपनाने की तोहमत लगा रहे हैं। यूजर्स का आरोप है कि खुद स्पीकर ऋतु खंडूरी ने अपने स्टाफ में उत्तराखंड के लोगों को नजरंदाज कर नियुक्तियों में बाहरी लोगों की भरमार कर डाली है।

राज्य आंदोलनकारी और सीपीआईएमएल के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी ने ट्वीट कर तंज किया है,” लोग दुखी हैं कि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने राज्य के बाहर के लोगों को अपने स्टाफ में नियुक्त किया। वे जिनको पहचानती उनको नियुक्त किया, वे तुमको पहचानती नहीं तो तुमको नौकरी क्यों देती? तुम्हारी गलती है कि तुम जिनको पहचानते नहीं, उनके चिन्ह पर रीझ कर उन्हें सिर पर बैठा लेते हो! “

  • ऋतु खंडूरी के स्टाफ की वायरल लिस्ट में एक नंबर पर उनके विशेष कार्याधिकारी अशोक शाह का नाम है जिनका पता जनकपुरी दिल्ली दर्ज है। शाह की मंथली सेलरी एक लाख से ऊपर बताई गई है।
  • दूसरे नंबर पर उनके सहायक जन संपर्क अधिकारी के तौर पर आभास सिंह का नाम दर्ज है जिनको गौर सिटी नोएडा एक्सटेंशन यूपी का रहने वाला बताया गया है। वायरल लिस्ट में इनकी मंथली सेलरी 60 हजार बताई है।
  • तीसरे नंबर पर सहायक सूचना अधिकारी उत्कर्ष रमन पुत्र विजेंद प्रताप पाण्डेय, पटना बिहार के रहने वाले लिस्ट में शुमार हैं जिनकी मंथली सेलरी 60 हजार रुपए है।
  • वायरल लिस्ट में चौथे नंबर पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी के सलाहकार ललित डागर का नाम दर्ज है जो कि कैलाश नगर नई दिल्ली के रहने वाले हैं।

इन नामों के बाद वायरल लिस्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या युवाओं की मसीहा बनी विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण जिन्होंने अपने सभी निजी स्टाफ पर उत्तराखंड से बाहर के लोगों को तरजीह दी है। क्या उन्हें उत्तराखंड का एक भी युवा इस काबिल नहीं लगा जो इस योग्य हो?

जाहिर है यही वह सवाल है जो, पोस्ट शेयर करने वाले प्रेमचंद अग्रवाल के समर्थक सुमित सेठी को यहां से भूलकर उत्तराखंड विधानसभा स्पीकर ऋतु खंडूरी से कायदे से पूछा ही जाना चाहिए। आखिर क्या एकाध ढंग का सलाहकार या OSD जैसा प्रतिभाशाली पहाड़ प्रदेश में खोजे से भी नहीं मिला?
आखिर यही तो विडंबना है इस राज्य के साथ कि बेरोजगारी चरम पर होने के बावजूद सारी प्रतिभा नेताओं को बाहर से खोजकर लाने को मजबूर होना पड़ रहा!

उम्मीद की जानी चाहिए कि इन नियुक्तियों को लेकर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष स्थिति स्पष्ट करेंगी ताकि सोशल मीडिया में उनके खिलाफ माहौल बना रहे लोगों को भी सबक मिले और नियम विरुद्ध नियुक्तियों को निरस्त कर पहाड़ प्रदेश के युवाओं में उनकी जो सकारात्मक छवि बन रही है, वह जल्दी ही धूमिल होने लगे!


बहरहाल निजी निसंवर्गीय स्टाफ को लेकर वायरल लिस्ट पर स्पीकर ऋतु खंडूरी भूषण ने ट्वीट कर एक वीडियो के जरिए अपनी अपनी सफाई पेश की है।

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