
देहरादून। नंदा की चौकी पर टोंस नदी के नए पुल की एप्रोच रोड लगातार हुई बारिश के चलते धंस गई। इसी के साथ आरोप-प्रत्यारोप की सियासत सतह पर आ गई है। यह स्वाभाविक भी है, जब राज्य में विधानसभा का चुनाव अब बहुत दूर नहीं है तो तिल का ताड़ बनते कहाँ देर लगेगी! वैसे भी मामला सड़क और पुल का हो और तस्वीरों में एप्रोच रोड धंसने की गहराई देखते हुए दूरबीन से विकास खोजा जाएगा तो हंगामा लाजिमी है।
यही वजह है कि अब यह मामला तकनीकी से ज्यादा जवाबदेही और सियासत का बन गया है। एक ओर लोक निर्माण विभाग का दावा है कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है और केवल एप्रोच रोड का हिस्सा भारी बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ है, वहीं कांग्रेस ने इसे 16 करोड़ रुपये की परियोजना में गुणवत्ता और भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता आर्येन्द्र शर्मा एक कदम और आगे निकल गए और उन्होंने धंसी सड़क के पास पहुंचकर दूरबीन से विकास खोजना शुरू कर दिया।

लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि पुल की संरचना पूरी तरह सुरक्षित है। उनके अनुसार, लगातार बारिश और टोंस नदी के तेज बहाव के कारण एप्रोच रोड के नीचे से मलबा बह जाने से सड़क का हिस्सा धंस गया। विभाग के मुख्य अभियंता को मौके पर भेजकर मरम्मत और तकनीकी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, अभियंता या ठेकेदार की लापरवाही अथवा निर्माण में कमी सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सचिव ने यह भी कहा कि प्रदेश में कहीं भी नई सड़क या निर्माण कार्य समय से पहले क्षतिग्रस्त होने पर उसकी जवाबदेही तय की जाएगी।
उधर, देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान सुबह से ही मौके पर पहुंचे और क्षतिग्रस्त एप्रोच वॉल का निरीक्षण कर अधिकारियों को तीन घंटे के भीतर बहाली का कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने वर्षा प्रभावित अन्य क्षेत्रों का भी दौरा किया और सोडा सरोली में पीएमजीएसवाई सड़क सहित अन्य मार्गों को जल्द खोलने के निर्देश दिए। थानों मार्ग पर मलबा हटाकर यातायात भी बहाल करा दिया गया।
कांग्रेस का हमला
प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष आर्येंद्र शर्मा ने घटना को धामी सरकार के विकास मॉडल की विफलता करार दिया। उन्होंने दावा किया कि लगभग ₹16 करोड़ की लागत से तैयार पुल जनता के लिए खोले जाने के महज 16 दिन बाद ही उसकी एप्रोच रोड धंस गई, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शर्मा दूरबीन लेकर पुल पर पहुंच गए और भाजपा के विकास कार्यों को दूरबीन से देखने का प्रयास कर सरकार पर निशाना साधा।
आर्येंद्र ने कहा कि उन्होंने 7 जुलाई को ही निर्माण कार्य में अनियमितताओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था, लेकिन चेतावनी को नजरअंदाज कर जल्दबाजी में 12 जुलाई को पुल खोल दिया गया। उनके अनुसार अब सहसपुर क्षेत्र की हजारों आबादी प्रभावित है और विद्यार्थियों सहित आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि करोड़ों रुपये खर्च हुए तो निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी किसने की और जनता के पैसे की जवाबदेही कौन तय करेगा।
सबसे बड़ा सवाल
फिलहाल सरकार का दावा है कि पुल सुरक्षित है और केवल एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हुई है, जबकि विपक्ष इसे निर्माण गुणवत्ता की विफलता बता रहा है। ऐसे में अब निगाहें लोक निर्माण विभाग की तकनीकी जांच रिपोर्ट पर हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि नुकसान केवल असामान्य बारिश का परिणाम था या निर्माण में भी कोई कमी रही।

मामले से जुड़े पांच सबसे बड़े तथ्य
* पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित होने का सरकार का दावा।
* एप्रोच रोड भारी बारिश और तेज बहाव के कारण धंसी।
* मुख्य अभियंता को सौंपी जांच, दोष मिलने पर अधिकारी-ठेकेदार पर कार्रवाई के संकेत।
* डीएम देहरादून ने मौके पर पहुंचकर तत्काल मार्ग खोलने के निर्देश दिए।
* कांग्रेस ने ₹16 करोड़ की परियोजना में गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जवाबदेही की मांग की।



