
- Himalaya Day 2026: यूकॉस्ट में हिमालय विज्ञान संवाद, संरक्षण और सतत विकास पर विशेषज्ञों ने की चर्चा


हिमालय के लिए विज्ञान और स्थानीय ज्ञान का मेल जरूरी
यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डीपी उनियाल ने स्वागत संबोधन में हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके संरक्षण में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की पर्यावरण विज्ञान विभाग की प्रोफेसर रीमा पंत ने हिमालयी पर्यावरण और पारिस्थितिकी से जुड़े विषयों पर विचार रखते हुए कहा कि संरक्षण की रणनीति में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

हिमालय देश की जल और पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण: प्रो. पंत
यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि हिमालय उत्तराखंड की पहचान के साथ-साथ देश की पारिस्थितिक और जल सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने हिमालय के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्थानीय ज्ञान के समन्वय की जरूरत बताई।
सामुदायिक भागीदारी के बिना संरक्षण अधूरा
राज्य हिमालयन परिषद के सदस्य आचार्य सुशांत राज ने हिमालय संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी, स्थानीय ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने हिमालय को सुरक्षित रखने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों से मिलकर काम करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, संस्थापक हेस्को, ने भी हिमालय संरक्षण में जनभागीदारी और स्थानीय समुदायों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने तथा हिमालयी पारिस्थितिकी के अनुरूप विकास की अवधारणा अपनाने पर जोर दिया।
नुक्कड़ नाटक के जरिए दिया हिमालय बचाने का संदेश
कार्यक्रम में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय की टीम ने हिमालय संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के माध्यम से हिमालयी पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और मानवीय गतिविधियों से पैदा हो रही पर्यावरणीय चुनौतियों को आमजन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में डॉल्फिन इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों के साथ वैज्ञानिक, विभिन्न विभागों के अधिकारी, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोग शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार 140 से अधिक प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट की वैज्ञानिक डॉ. मंजू सुंदरियाल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ओम प्रकाश नौटियाल ने किया।
हिमालय संरक्षण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं
‘हिमालय विज्ञान संवाद’ से एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया कि हिमालय संरक्षण को केवल पर्यावरणीय मुद्दे के रूप में नहीं देखा जा सकता। हिमालय की पारिस्थितिकी, जल सुरक्षा, स्थानीय आजीविका और भविष्य के विकास का सवाल इससे सीधे जुड़ा है। ऐसे में वैज्ञानिक संस्थानों, सरकार, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय को हिमालय के भविष्य के लिए जरूरी माना गया।



