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UKSSSC भर्ती घोटाले में ED का बड़ा एक्शन: हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन जीना के घर से ₹32 लाख कैश, सोना और 12 लग्जरी घड़ियां बरामद, पूर्व सीएम का आया जवाब

2016 की VPDO भर्ती परीक्षा में OMR शीट से छेड़छाड़ के मामले में कार्रवाई, ED ने करीब ₹1.28 करोड़ की संपत्ति जब्त/फ्रीज की; Rolex समेत महंगी घड़ियां भी मिलीं, 2027 चुनाव से पहले उत्तराखंड की सियासत में बढ़ा तापमान

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  • UKSSSC VPDO भर्ती घोटाले में ED ने देहरादून में छापेमारी की। हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के घर से ₹32 लाख कैश, 200.5 ग्राम सोना और 12 लग्जरी घड़ियां बरामद हुईं।


ED at Harish Rawat’s doorstep!
उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए एक भर्ती परीक्षा घोटाले संबंधी मामले की जांच अचानक सतह पर आ गई है। सामने विधानसभा का चुनाव दस्तक दे रहा है और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के दरवाजे प्रवर्तन निदेशालय की जांच पहुंचती हुई दिखाई दे रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2016 की UKSSSC VPDO भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में देहरादून में कई ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश सिंह रावत के करीबी माने जाने वाले चंदन सिंह जीना का आवास भी शामिल है। ED द्वारा 11 सितंबर को जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि वर्तमान में हरीश रावत के निजी सहायक और 2014 से 2017 के दौरान रावत के मुख्यमंत्री रहने के समय OSD के रूप में भी काम कर चुके चंदन सिंह जीना के यहाँ छापेमारी में कई अहम दस्तावेज़ बरामद हुए हैं।

हरदा के करीबी जीना के घर से क्या-क्या मिला?

ED के मुताबिक चंदन सिंह जीना के आवास से ₹32 लाख की बेहिसाबी नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना बरामद हुआ। इसमें 13 सोने के सिक्के और 7 सोने की चेन शामिल हैं। इसके अलावा 12 लग्जरी कलाई घड़ियां भी मिली हैं। ED ने जिन ब्रांडों का उल्लेख किया है, उनमें Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice ब्रांड शामिल हैं।

जांच एजेंसी ने जीना से जुड़े बैंक खातों में मौजूद कुल ₹52,16,312 की रकम को भी PMLA के तहत फ्रीज किया है। ED के अनुसार, सर्च के दौरान मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि तलाशी के दौरान बरामद संपत्तियों की कुल कीमत फिलहाल करीब ₹1.28 करोड़* आंकी गई है और शेष 12 घड़ियों का मूल्यांकन होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

OMR शीट में कैसे हुआ था खेल?

ED की जांच में सामने आया है कि 2016 की VPDO परीक्षा की OMR उत्तर पुस्तिकाओं को UKSSSC की सुरक्षित अभिरक्षा से तत्कालीन सचिव के निजी आवास तक ले जाया गया। वहां उम्मीदवारों के रोल नंबर तीन बार तक अधूरे छोड़े गए और बाद में निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को उपलब्ध कराए गए। आरोप है कि इन OMR शीट में बाद में उत्तरों के गोले भरकर उन्हें दोबारा सील किया गया और इस पूरी प्रक्रिया के बदले अवैध रकम का लेनदेन किया गया।

दरअसल, यह मामला नया नहीं है। 2016 की VPDO भर्ती में धांधली की जांच के दौरान STF ने UKSSSC के तत्कालीन अध्यक्ष और पूर्व पीसीसीएफ डॉ. आरबीएस रावत, सचिव मनोहर कन्याल और परीक्षा नियंत्रक आरएस पोखरिया को गिरफ्तार भी किया था। बाद की जांच में OMR शीट से छेड़छाड़ और निजी परिसर में परीक्षा परिणाम तैयार किए जाने की बातें सामने आई थीं।

ED की जांच में पहले भी हुई है बड़ी कार्रवाई

UKSSSC भर्ती मामलों की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में ED पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। दिसंबर 2024 की अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में ED ने बताया था कि उसने 2016 और 2021 की VDO/VPDO परीक्षाओं समेत अन्य UKSSSC परीक्षाओं से जुड़े मामलों में जांच के दौरान ₹1.32 करोड़ के बैंक बैलेंस फ्रीज किए और ₹15 लाख नकद जब्त किया था। एजेंसी के अनुसार, परीक्षा प्रश्नपत्र कथित तौर पर अभ्यर्थियों को ₹10-15 लाख तक में बेचे जाने की जांच सामने आई थी।

अगस्त 2026 में भी ED ने UKSSSC पेपर लीक मामले में ₹63.30 लाख की संपत्ति अटैच की थी। एजेंसी की जांच 2016 और 2021 की VDO/VPDO परीक्षाओं से जुड़े कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में हेराफेरी तक फैली हुई है।

2027 से पहले कार्रवाई के सियासी मायने

बहरहाल, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज होने के बीच ED की यह कार्रवाई स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस को हवा देगी। खासकर इसलिए क्योंकि तलाशी उस व्यक्ति के आवास पर हुई है जो हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में OSD रह चुका है और वर्तमान में भी उनके निजी सहायक के रूप में काम कर रहा है।

ज़ाहिर है कि सत्ताधारी भाजपा इस कार्रवाई को कांग्रेस के पुराने शासनकाल में हुई भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए राजनीतिक मुद्दा बना सकती है। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की ओर से यह सवाल उठाया जाना स्वाभाविक है कि जांच की कार्रवाई को राजनीतिक रंग तो नहीं दिया जा रहा। शनिवार कको कांग्रेस नेताओं, सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने पहले से एक प्रेस वार्ता भी बुलाई हुई है।

कुल मिलाकर हरदा सरकार में 2016 मूव हुई UKSSSC की VPDO भर्ती परीक्षा में जमकर धांधली की ख़बरें आई थी और ऊधमसिंह नगर जिले के एक ही गांव में कई नियुक्तियों तथा एक ही घर में एक से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने जैसे मामले सामने आए थे। स्वाभाविक है कि अब ED की ताजा कार्रवाई ने वीपीडीओ भर्ती धांधली के बहाने उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की पारदर्शिता के मुद्दे को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।  देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस, हरीश रावत और भाजपा किस अंदाज़ में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।

 

ED की छापेमारी के बाद अब आ गया पूर्व सीएम हरीश रावत का ट्वीट- 

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर ख़ुद को कांग्रेस से अलग किया और कहा—

सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई या पकड़ाई गई, इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा, वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। श्री जीना एक निहायती सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति हैं। यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ की और यदि इस तरीके की कोई भी गलती उन्होंने की है, उसके प्रमाण हैं तो उनके इस तथाकथित दुस्साहसिक कृत्य के लिए मैं लज्जित हूँ। परंतु मुझे इस आरोप पर बिल्कुल विश्वास नहीं है।

उत्तराखंड के चुनाव में भारी स्टेक्स हैं। मुझसे जब भी कोई व्यक्ति पूछता था कि चुनाव कब हो रहे हैं? तो मैं हंसी में उनसे कहता था कि भई चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई मेरे दरवाजे पर दस्तक देने आएगी। यदि अभी नहीं आई है तो इसका अर्थ है कि चुनाव अगले वर्ष मार्च-अप्रैल में ही होंगे। लेकिन इस बार मेरे घर पर नहीं, मेरे एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है। कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होकर लड़ रहे हैं। राहुल गांधी जी राष्ट्रीय स्तर पर ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं।
ऐसे समय में हरीश रावत के किसी भी कृत्य से यदि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी आती है, तो मैं ऐसा बिल्कुल नहीं चाहूँगा। इसलिए मैंने अभी अपने ईष्ट देवता का स्मरण करके एक बड़ा निर्णय लिया है कि मैं किसी सरकारी पद पर तो हूं नहीं, की उससे त्यागपत्र दूं! हां मैं, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति का स्थाई आमंत्रित सदस्य हूं और मैं बहुत विनम्रता पूर्वक इन दोनों पदों से हटना चाहूंगा, क्योंकि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी मेरी वजह से नहीं आनी चाहिए।

रहा प्रश्न अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का? उसका गठन हमने राज्य के नौजवानों के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए किया। हमने पब्लिक सर्विस कमीशन को समय पर परीक्षाएँ लेने के लिए बाध्य किया, यहाँ तक कि दो बार शीर्ष पदों की भर्तियाँ हुईं, हमारे छोटे से कार्यकाल में‌। हमने भर्ती बोर्ड्स बनाए, मेडिकल भर्ती बोर्ड बनाया, शिक्षा भर्ती बोर्ड बनाया। यदि उस प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियों में हमसे कोई एरर ऑफ़ जजमेंट हो गया है, तो मैं उसके लिए उत्तराखंड के लोगों से क्षमा प्रार्थी हूँ। मगर मैं विनम्रता पूर्वक अपना यह दावा दोहराना चाहता हूं कि हमारे 3 वर्ष के कार्यकाल में 42000 से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां हुई हैं।
हमने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के चेयरमैन के पद पर जिस व्यक्ति को नियुक्त किया था, जिन्हें मैंने ही शिकायत मिलने के बाद हटाया या उनसे इस्तीफा माँगा, जो भी जिस रूप में भी कह लिया जाए। उनकी नियुक्ति पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। वो जिस वर्ग से आते थे, मैं चाहता था कि सत्ता में उस वर्ग की भी हिस्सेदारी हो और उनकी नियुक्ति के विषय में मुझे सबसे प्रभावी सलाह तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी जी ने दी थी। वो दो बार मेरे पास उनकी नियुक्ति के संदर्भ में मिलने आए थे। मेरी आज भी धारणा है कि खंडूरी जी भ्रष्टाचार के समन के लिए हमेशा काम करते रहे। मैं इतना और बताते चलूँ कि कौन व्यक्ति कहाँ पर गलती कर दे, कोई नहीं जान सकता है। क्या आरएसएस ने जाना होगा कि जिस व्यक्ति को उत्तराखंड के अपने पर्यावरण मंच का अध्यक्ष बना रहे हैं, वो व्यक्ति इस तरीके के भ्रष्ट कृत्य करेगा? और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष के रूप में कलंकित होगा!

नियुक्तियों व परीक्षाओं में गड़बड़ी हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और यदि मुझसे जाने-अंजाने में भी कोई ऐसा कृत्य हुआ है, जिससे हमारे राज्य के नौजवानों के भविष्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है, तो उसके लिए मैं अपने को प्रताड़ना का पात्र मानता हूं और मैं राज्य के लोगों से इस चूक के लिए क्षमा चाहता हूं और मैं सार्वजनिक रूप से एक अपील भी करना चाहता हूं कि यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की की नियुक्तियों के मामले में हस्तक्षेप करने की मेरी संलिप्तता के कोई प्रमाण उनके पास हों तो वो उन प्रमाणों को सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को जरूर उपलब्ध करवाएं। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को जिसे बड़े दायित्व को संभालने का अवसर मिलता है तो उन्हें हमेशा इस तरीके के घृणित प्रलोभनों से बचना चाहिए और यदि मुझसे कोई ऐसी चूक हुई है तो पुनः दोहरा रहा हूं कि मैं अपने को दंड का पात्र समझता हूं और कानून को मुझे दंडित करना चाहिए।

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The News Adda

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