
- UKSSSC VPDO भर्ती घोटाले में ED ने देहरादून में छापेमारी की। हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के घर से ₹32 लाख कैश, 200.5 ग्राम सोना और 12 लग्जरी घड़ियां बरामद हुईं।


ED at Harish Rawat’s doorstep! उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए एक भर्ती परीक्षा घोटाले संबंधी मामले की जांच अचानक सतह पर आ गई है। सामने विधानसभा का चुनाव दस्तक दे रहा है और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के दरवाजे प्रवर्तन निदेशालय की जांच पहुंचती हुई दिखाई दे रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2016 की UKSSSC VPDO भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में देहरादून में कई ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश सिंह रावत के करीबी माने जाने वाले चंदन सिंह जीना का आवास भी शामिल है। ED द्वारा 11 सितंबर को जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि वर्तमान में हरीश रावत के निजी सहायक और 2014 से 2017 के दौरान रावत के मुख्यमंत्री रहने के समय OSD के रूप में भी काम कर चुके चंदन सिंह जीना के यहाँ छापेमारी में कई अहम दस्तावेज़ बरामद हुए हैं।
हरदा के करीबी जीना के घर से क्या-क्या मिला?
ED के मुताबिक चंदन सिंह जीना के आवास से ₹32 लाख की बेहिसाबी नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना बरामद हुआ। इसमें 13 सोने के सिक्के और 7 सोने की चेन शामिल हैं। इसके अलावा 12 लग्जरी कलाई घड़ियां भी मिली हैं। ED ने जिन ब्रांडों का उल्लेख किया है, उनमें Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice ब्रांड शामिल हैं।
जांच एजेंसी ने जीना से जुड़े बैंक खातों में मौजूद कुल ₹52,16,312 की रकम को भी PMLA के तहत फ्रीज किया है। ED के अनुसार, सर्च के दौरान मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि तलाशी के दौरान बरामद संपत्तियों की कुल कीमत फिलहाल करीब ₹1.28 करोड़* आंकी गई है और शेष 12 घड़ियों का मूल्यांकन होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
OMR शीट में कैसे हुआ था खेल?
ED की जांच में सामने आया है कि 2016 की VPDO परीक्षा की OMR उत्तर पुस्तिकाओं को UKSSSC की सुरक्षित अभिरक्षा से तत्कालीन सचिव के निजी आवास तक ले जाया गया। वहां उम्मीदवारों के रोल नंबर तीन बार तक अधूरे छोड़े गए और बाद में निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को उपलब्ध कराए गए। आरोप है कि इन OMR शीट में बाद में उत्तरों के गोले भरकर उन्हें दोबारा सील किया गया और इस पूरी प्रक्रिया के बदले अवैध रकम का लेनदेन किया गया।
दरअसल, यह मामला नया नहीं है। 2016 की VPDO भर्ती में धांधली की जांच के दौरान STF ने UKSSSC के तत्कालीन अध्यक्ष और पूर्व पीसीसीएफ डॉ. आरबीएस रावत, सचिव मनोहर कन्याल और परीक्षा नियंत्रक आरएस पोखरिया को गिरफ्तार भी किया था। बाद की जांच में OMR शीट से छेड़छाड़ और निजी परिसर में परीक्षा परिणाम तैयार किए जाने की बातें सामने आई थीं।
ED की जांच में पहले भी हुई है बड़ी कार्रवाई
UKSSSC भर्ती मामलों की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में ED पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। दिसंबर 2024 की अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में ED ने बताया था कि उसने 2016 और 2021 की VDO/VPDO परीक्षाओं समेत अन्य UKSSSC परीक्षाओं से जुड़े मामलों में जांच के दौरान ₹1.32 करोड़ के बैंक बैलेंस फ्रीज किए और ₹15 लाख नकद जब्त किया था। एजेंसी के अनुसार, परीक्षा प्रश्नपत्र कथित तौर पर अभ्यर्थियों को ₹10-15 लाख तक में बेचे जाने की जांच सामने आई थी।
अगस्त 2026 में भी ED ने UKSSSC पेपर लीक मामले में ₹63.30 लाख की संपत्ति अटैच की थी। एजेंसी की जांच 2016 और 2021 की VDO/VPDO परीक्षाओं से जुड़े कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में हेराफेरी तक फैली हुई है।
2027 से पहले कार्रवाई के सियासी मायने
बहरहाल, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज होने के बीच ED की यह कार्रवाई स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस को हवा देगी। खासकर इसलिए क्योंकि तलाशी उस व्यक्ति के आवास पर हुई है जो हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में OSD रह चुका है और वर्तमान में भी उनके निजी सहायक के रूप में काम कर रहा है।
कुल मिलाकर हरदा सरकार में 2016 मूव हुई UKSSSC की VPDO भर्ती परीक्षा में जमकर धांधली की ख़बरें आई थी और ऊधमसिंह नगर जिले के एक ही गांव में कई नियुक्तियों तथा एक ही घर में एक से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने जैसे मामले सामने आए थे। स्वाभाविक है कि अब ED की ताजा कार्रवाई ने वीपीडीओ भर्ती धांधली के बहाने उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की पारदर्शिता के मुद्दे को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस, हरीश रावत और भाजपा किस अंदाज़ में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।





