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2034 का इंतजार नहीं? 2029 में ही ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की तैयारी! शिवराज-धामी का बड़ा संदेश

One Nation One Election: 2029 में लोकसभा के साथ 22 राज्यों में विधानसभा चुनाव की संभावित कवायद के बीच हरिद्वार में शिवराज सिंह चौहान और CM पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का समर्थन किया।

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  • One Nation One Election: 2034 नहीं 2029 में हो सकता है एक राष्ट्र-एक चुनाव? शिवराज-धामी का बड़ा बयान

One Nation One Election: क्या भारत में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ 2034 के बजाय 2029 में ही लागू हो सकता है? देश की सियासत में यह सवाल अब तेजी से बड़ा होता जा रहा है। हालिया मीडिया रिपोर्टों में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव कराने की संभावित कवायद की खबरों के बीच रविवार को हरिद्वार से भी इस मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया।

 इसी बीच उत्तराखंड के हरिद्वार में रविवार को ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया। अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया और संत समाज से इस विषय पर जनजागरण की अपील की।

शिवराज बोले- बार-बार चुनाव विकास में बाधक

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव देश की विकास गति को प्रभावित करते हैं। चुनावी प्रक्रिया में प्रशासनिक मशीनरी, पुलिस, शिक्षक और अन्य संसाधनों की बड़ी हिस्सेदारी चुनावी ड्यूटी में लग जाती है।

उन्होंने कहा कि लगातार चुनाव होने से समय, धन और प्रशासनिक ऊर्जा का इस्तेमाल होता है, जबकि यही संसाधन विकास और जनसेवा में लगाए जा सकते हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने से संसाधनों की बचत के साथ प्रशासन को विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिल सकता है।

चौहान ने संत समाज से अपील की कि वह ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के पक्ष में जनता के बीच जागरूकता पैदा करे। उन्होंने इसे किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि देशहित का विषय बताते हुए कहा कि देश पहले है और राजनीतिक दल बाद में।

2029 की चर्चा ने बढ़ाई राजनीतिक अहमियत

‘One Nation One Election’ को लेकर अब तक 2034 को संभावित पूर्ण चुनावी चक्र माना जाता रहा है। मार्च 2026 में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने भी कहा था कि मौजूदा संवैधानिक ढांचे में 2034 सबसे शुरुआती व्यावहारिक चक्र हो सकता है। लेकिन जुलाई में तस्वीर बदलती दिखाई दी। JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि समिति 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव कराने की व्यवस्था पर काम कर रही है। उन्होंने इसे संवैधानिक और कानूनी संशोधनों पर निर्भर बताया।
अब 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 2029 में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने के विकल्प पर विचार की रिपोर्ट ने इस बहस को और गरमा दिया है। इस संभावित मॉडल में कुछ विधानसभाओं के कार्यकाल को समय से पहले समाप्त कर चुनावी चक्र को 2029 से जोड़ने की जरूरत पड़ सकती है।  यानी सवाल अब सिर्फ ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव कब?’ का नहीं रह गया है, बल्कि यह है कि क्या 2029 को ही इसकी पहली बड़ी परीक्षा बनाया जा सकता है?

हरिद्वार से शिवराज का ‘जनजागरण’ संदेश

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संत समाज से ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के लिए जनता के बीच जनजागरण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से देश के संसाधनों, समय और प्रशासनिक ऊर्जा का बड़ा हिस्सा चुनावी प्रक्रिया में चला जाता है। चुनाव ड्यूटी में प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती से विकास और जनसेवा प्रभावित होती है।

चौहान ने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ होते हैं तो संसाधनों की बचत होगी और प्रशासन का अधिक समय विकास कार्यों में लगाया जा सकेगा। उन्होंने संतों से अपने प्रवचनों के माध्यम से इस विचार को जनता तक पहुंचाने का आग्रह किया। चौहान ने इसे किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा न बताते हुए कहा कि देश पहले है, पार्टी बाद में।

धामी बोले- यह राजनीतिक नहीं, राष्ट्रहित का मुद्दा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा विषय बताया। धामी ने कहा कि लगातार चुनावों के कारण आदर्श आचार संहिता लागू होती है और बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारी, शिक्षक, पुलिस तथा सुरक्षा बल चुनावी दायित्वों में लग जाते हैं। इससे शासन और विकास कार्यों पर असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विकास की गति निरंतर बनी रहनी चाहिए। सरकार का अधिकतम समय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे से जुड़े कामों पर लगाया जाना चाहिए।

उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है 2029 का एंगल?

अगर 2029 को ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के लिए लक्ष्य बनाया जाता है तो उत्तराखंड समेत उन राज्यों की राजनीति सीधे प्रभावित होगी, जहां 2027-28 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने वाली विधानसभा के कार्यकाल को 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ समायोजित करना पड़ सकता है। इसलिए 2029 की चर्चा केवल दिल्ली की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर उत्तराखंड के अगले राजनीतिक समीकरण पर भी पड़ सकता है। अगर चर्चाओं ने हकीकत का रूप लिया तो उत्तराखंड में 2027 में बनने वाली सरकार के पास कामकाज के लिए बमुश्किल से दो साल का वक्त ही रहेगा।

यही कारण है कि हरिद्वार में मुख्यमंत्री धामी का इस मुद्दे पर खुलकर समर्थन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अभी अंतिम फैसला नहीं, संसद की प्रक्रिया सबसे अहम

हालांकि 2029 को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन इसे अभी अंतिम फैसला मानना जल्दबाजी होगी। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ से जुड़े विधेयकों पर संयुक्त संसदीय समिति विचार कर रही है और लोकसभा ने समिति की रिपोर्ट देने की समयसीमा शीतकालीन सत्र की अंतिम सप्ताह तक बढ़ा दी है।

केंद्र सरकार को आगे संवैधानिक संशोधनों, संसद में आवश्यक बहुमत और संबंधित राज्यों की संवैधानिक मंजूरियों जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसलिए फिलहाल सबसे सटीक तस्वीर यही है कि 2034 की पुरानी समय-सीमा के बीच 2029 को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक कवायद तेज हो चुकी है।

वंदे मातरम पर भी बोले शिवराज

हरिद्वार के संत समागम में शिवराज सिंह चौहान ने वंदे मातरम के पूर्ण स्वरूप का समर्थन करने की भी अपील की। उन्होंने इसे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया और संत समाज से इस विषय पर भी जनजागरण करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्माओं के साथ कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, मेयर किरण जैसल, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक आदेश चौहान सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

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