
- संसाधन सीमित थे, हौसला आसमान जितना: अल्मोड़ा के रवि टम्टा ने बना डाला ‘हैपिडा स्काइनेक्स’
- अल्मोड़ा के युवा इनोवेटर ने तैयार किया सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल; डीएम ने देखा ट्रायल, सीएम धामी ने फोन पर बढ़ाया हौसला

हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम में आयोजित ट्रायल के दौरान रवि टम्टा ने अपने बनाए फ्लाइंग व्हीकल का प्रदर्शन किया। मौके पर जिलाधिकारी अंशुल सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर. घोड़के मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस प्रदर्शन ने रवि के वर्षों के प्रयास को सार्वजनिक पहचान दी।
पूरी तरह इलेक्ट्रिक पावर पर आधारित यह डिवाइस स्वच्छ और वैकल्पिक परिवहन की संभावनाओं की ओर संकेत करता है। हालांकि अभी यह एक प्रोटोटाइप है और इसे व्यावसायिक अथवा नियमित यात्री परिवहन के स्तर तक पहुंचाने के लिए आगे तकनीकी परीक्षण, प्रमाणन और नियामकीय प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी।
90 मिनट का सफर 10 मिनट में? पहाड़ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रयोग
रवि टम्टा के इस प्रयोग की सबसे बड़ी संभावनाओं में से एक पहाड़ी क्षेत्रों में तेज कनेक्टिविटी है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में उनके गांव से करीब 40 किलोमीटर की सड़क यात्रा, जिसमें लगभग डेढ़ घंटे लगते हैं, को भविष्य में हवाई मार्ग से करीब 10 मिनट में पूरा करने की संभावित क्षमता का उल्लेख किया गया है।
यही वजह है कि HAPIDA SKYNeX को केवल ‘उड़ने वाली कार’ के कौतूहल के रूप में देखने के बजाय पहाड़ी परिवहन, आपदा प्रबंधन, दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और भविष्य की व्यक्तिगत हवाई मोबिलिटी की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
सीएम धामी ने फोन पर की बात, बढ़ाया हौसला
रवि टम्टा की उपलब्धि की जानकारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक भी पहुंची। मुख्यमंत्री ने उनसे वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद कर उनके प्रयास की सराहना की और इसे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।
मुख्यमंत्री ने रवि के नवाचार को प्रोत्साहित करने और इसे आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। मुख्यमंत्री का यह प्रोत्साहन उस बड़े संदेश को सामने लाता है कि उत्तराखंड की प्रतिभाएं केवल नौकरी तलाशने वाली नहीं, बल्कि नई तकनीक और नए समाधान विकसित करने वाली भी हो सकती हैं।
DM अंशुल ने देखा उड़ता हुआ सपना
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने भी रवि टम्टा के इस नवाचार को जिले के लिए गौरव का विषय बताया। प्रशासन की ओर से ऐसे स्थानीय नवाचारों और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की बात कही गई है। दरअसल, उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्थानीय समस्याओं से निकलने वाले तकनीकी समाधान की अपनी अलग अहमियत है। यहां दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां परिवहन, स्वास्थ्य, आपदा राहत और आपूर्ति व्यवस्था के सामने लगातार चुनौती खड़ी करती हैं। ऐसे में स्थानीय युवा यदि इन्हीं समस्याओं को तकनीक के जरिए हल करने की कोशिश करते हैं तो यह सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि नवाचार की संस्कृति को मजबूत करने वाला कदम भी है।
रवि की कहानी सिर्फ उड़ने वाली कार की नहीं
रवि टम्टा के लिए यह पहला प्रयोग नहीं बताया जा रहा है। उनके पूर्व के तकनीकी प्रयोगों का भी उल्लेख मिलता है। कुछ वर्ष पहले उनके द्वारा बिना पानी के जंगल की आग बुझाने वाली मशीन विकसित करने की खबर भी सामने आई थी।
यानी HAPIDA SKYNeX को एक अचानक सामने आए प्रयोग के बजाय उस जिज्ञासा और प्रयोगधर्मिता की अगली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है, जिसने एक स्थानीय युवा को लगातार नई तकनीक आजमाने के लिए प्रेरित किया।
पहाड़ से निकला संदेश- संसाधन कम लेकिन सपने बड़े
रवि टम्टा की कहानी की असली ताकत उनकी मशीन से ज्यादा उस सोच में है, जिसने उन्हें इसे बनाने के लिए प्रेरित किया। बड़े शहरों की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं से दूर पहाड़ में बैठा एक युवा यदि उड़ान की तकनीक पर प्रयोग कर सकता है तो यह उत्तराखंड के हजारों युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है।
HAPIDA SKYNeX की यह उड़ान अभी मंजिल नहीं है। यह एक शुरुआत है। आगे तकनीकी दक्षता, सुरक्षा परीक्षण, नियामकीय मंजूरी और व्यावसायिक विकास के कई पड़ाव होंगे। लेकिन अल्मोड़ा की धरती से इसका उड़ान भरना यह जरूर दिखाता है कि पहाड़ की प्रतिभा अब सिर्फ पहाड़ तक सीमित नहीं रहना चाहती, वह आसमान की ओर भी देख रही है।




