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CM धामी का कांग्रेस पर पलटवार: UIIDB की 7 हजार बीघा जमीन से लेकर बिजली खरीद तक, बोले- हर आरोप का तथ्य से देंगे जवाब

मुख्यमंत्री ने कहा- मुद्दों के अभाव में झूठ और भ्रम का सहारा ले रही कांग्रेस, हल्द्वानी की घटना से लेकर ऊर्जा खरीद तक लगाए जा रहे आरोप तथ्यों की कसौटी पर नहीं टिकते

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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव-2027 का बिगुल बज चुका है और इसी के साथ सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस में सियासी आरोप-प्रत्यारोप  का दौर भी तेज हो गया है। इसी बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद, UIIDB द्वारा 7000 बीघा जमीन निजी हाथों में देने से लेकर बिजली खरीद मामले में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुद्दों के अभाव से जूझ रही कांग्रेस अब झूठ, भ्रम और बेबुनियाद आरोपों के सहारे राजनीतिक नैरेटिव खड़ा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक आरोप लगाती है और जब उसके सामने तथ्य रखे जाते हैं तो वही आरोप स्वतः कमजोर पड़ जाता है।

मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित पर्यटन विभाग के एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार कांग्रेस के हर आरोप का जवाब तथ्य, दस्तावेज और प्रमाण के साथ देने के लिए तैयार है। 

हल्द्वानी शुद्धिकरण: कांग्रेस के नैरेटिव पर सीएम ने उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी की कथित शुद्धिकरण की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़कर प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास किया। सीएम धामी के अनुसार, बाद में सामने आए तथ्यों से कांग्रेस के इस नैरेटिव पर सवाल खड़े हुए और घटना से जुड़े पांच लोग स्वयं अनुसूचित जाति समाज से थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील सामाजिक विषयों पर बिना तथ्यों की पूरी जानकारी के राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना था कि किसी भी घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया देने से पहले उसके सभी तथ्यों को सामने रखना जरूरी है।

UIIDB पर 7,000 बीघा जमीन का दावा, सरकार ने बताया क्या है तथ्य

UIIDB को लेकर चल रहे विवाद पर भी मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को घेरा। कांग्रेस की ओर से करीब 7,000 बीघा जमीन दिए जाने का आरोप लगाए जाने के संदर्भ में धामी ने कहा कि सरकार पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुकी है।

सरकार के अनुसार, UIIDB को अब तक कुल 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध कराई गई है। 7,000 बीघा भूमि दिए जाने की बात को सरकार ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि UIIDB का उद्देश्य पर्यटन और आधारभूत ढांचे के विकास के माध्यम से प्रदेश में निवेश, आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। ऐसे में विकास से जुड़े विषयों पर तथ्यों के बजाय भ्रम फैलाना प्रदेश के हित में नहीं है।

बिजली खरीद पर कांग्रेस के सवाल, धामी ने याद दिलाया पुराना गैस पावर करार

ऊर्जा खरीद को लेकर कांग्रेस के सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल में लिए गए फैसलों का भी हिसाब देना चाहिए। धामी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय किए गए गैस पावर करार के कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य को गैस आधारित बिजली के लिए 31.71 रुपये प्रति यूनिट तक भुगतान करना पड़ा। वहीं वर्तमान सरकार ने 1320 मेगावाट बिजली की दीर्घकालिक व्यवस्था लगभग 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दर से 25 वर्षों के लिए सुनिश्चित की है।

1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद के लिए 25 साल का समझौता और ₹5.746 प्रति यूनिट की दर कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बिजली की आपूर्ति 2029-30 से शुरू होने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीक ऑवर में कई बार राज्य को महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। ऐसे में दीर्घकालिक और अपेक्षाकृत कम दर वाली बिजली की उपलब्धता प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों के आधार पर होने चाहिए।

‘आरोप एक-एक कर तथ्यों की कसौटी पर कमजोर पड़ रहे’

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की समस्या यह है कि उसके आरोप एक-एक कर तथ्यों की कसौटी पर कमजोर पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा,“कभी एक विषय पर भ्रम फैलाया जाता है, कभी दूसरे पर। हमारी सरकार प्रत्येक सवाल का जवाब तथ्य, दस्तावेज और पारदर्शिता के साथ देने के लिए तैयार है।”

धामी ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम, चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर सवाल उठाती है और उत्तराखंड में भी अलग-अलग विषयों को लेकर सरकार पर आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को प्रश्न पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन जनता के बीच भ्रम फैलाने के बजाय बहस तथ्यात्मक होनी चाहिए।

 अंकिता भंडारी प्रकरण पर भी धामी का जवाब

मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने शुरुआत से ही मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई की है। उनके अनुसार, मामले में तीनों दोषियों को निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है और अगस्त 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता के माता-पिता की मांग पर राज्य सरकार ने प्रकरण की सीबीआई जांच की संस्तुति की थी और सीबीआई ने फरवरी 2026 में मामला दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली।

सीएम धामी ने कहा,“अंकिता हमारी बेटी थी। उसे न्याय दिलाने के लिए सरकार पहले दिन से पूरी दृढ़ता के साथ खड़ी रही है और आगे भी कानून के अनुसार हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।”

धामी ने कहा कि ऐसे संवेदनशील प्रकरणों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।

‘झूठ बार-बार बोलने से सच नहीं बन जाता’

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रत्येक निर्णय में पारदर्शिता, नियम और प्रदेशहित को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस जितने चाहे आरोप लगाए, सरकार हर आरोप का जवाब तथ्यों से देगी। झूठ बार-बार बोलने से सच नहीं बन जाता और उत्तराखंड की जनता तथ्य और राजनीतिक आरोप के बीच का अंतर अच्छी तरह समझती है।”

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