
- हरिपुर कालसी में 2100 दीपों से जगमगाया यमुना तट, CM धामी ने किया मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण
- हरिघाट का लोकार्पण और मां यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास, ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

कालसी: उत्तराखंड के हरिपुर कालसी में गुरुवार को मां यमुना का पावन तट 2100 दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिपुर कालसी पहुंचकर मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण किया। इसके साथ ही उन्होंने हरिघाट का लोकार्पण और मां यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास भी किया।इस अवसर पर मां यमुना के तट पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री धामी के साथ साधु-संतों, श्रद्धालुओं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने दीप प्रज्वलित किए। इसके बाद मां यमुना की आरती की गई। 2100 दीपों की जगमगाहट के बीच यमुना तट का नजारा श्रद्धा और आध्यात्मिकता से भर गया।
मां यमुना की आरती में शामिल हुए CM धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साधु-संतों और श्रद्धालुओं के साथ मां यमुना की आरती में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कालसी की धरती इतिहास, आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि है। मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण और मां यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास क्षेत्र के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में जले 2100 दीप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर यमुना तट पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भी दीप प्रज्वलित किया। उनके साथ मौजूद साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने भी दीप जलाए। एक साथ 2100 दीप प्रज्वलित होने से पूरा यमुना तट रोशनी से नहा उठा। दीपों की रोशनी के बीच हुई यमुना आरती ने कार्यक्रम को

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर हरिपुर कालसी में माँ यमुना का तट आस्था, संस्कृति और विकास के रंग में नजर आया। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में 2100 दीपों से यमुना तट रोशन हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साधु-संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के साथ माँ यमुना की आरती में प्रतिभाग किया। इस दौरान माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण और हरिघाट का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा 7.52 करोड़ रुपये की लागत से विकसित स्नान घाट भी जनता को समर्पित किया। इसके साथ ही माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास किया गया।
यमुना नदी के दायीं ओर विकसित स्नान घाट 170 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है। करीब 7.52 करोड़ रुपये की लागत से एमडीडीए द्वारा तैयार इस परियोजना में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और तट के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। देहरादून-चकराता राष्ट्रीय राजमार्ग-507 पर देहरादून से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित हरिपुर कालसी जौनसार-भाबर का प्रमुख प्रवेश द्वार है। क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आसपास अशोक शिलालेख, देवस्थल मंदिर और अश्वमेघ यज्ञ स्थल जैसे महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं।घाट के नदी की ओर एमडीडीए द्वारा 170 मीटर लंबी और पांच मीटर ऊंची दो आरसीसी सुरक्षा दीवारें बनाई गई हैं। करीब 2000 वर्गमीटर क्षेत्र में आरसीसी और रेड सैंड स्टोन से दो प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं। नदी तक सुरक्षित पहुंच के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं, जबकि माँ यमुना की आरती के लिए चार आरसीसी आरती स्थल विकसित किए गए हैं।
सोलर लाइट और सुरक्षा इंतजाम
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा घाट पर रात में बेहतर प्रकाश व्यवस्था के लिए 25 सोलर लाइटें लगाई गई हैं। सौंदर्यीकरण के लिए प्लांटर्स और आगंतुकों के बैठने के लिए शेड के साथ 12 बेंच स्थापित की गई हैं। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शौचालय और चेंजिंग रूम का रेनोवेशन किया गया है। पेयजल के लिए वाटर स्पाउट की व्यवस्था की गई है। नदी किनारे सुरक्षा के लिए करीब 300 मीटर लंबी एसएस रेलिंग और एसएस चेन लगाई गई है। इससे स्नान और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण मिलेगा।

रोजाना आरती के लिए तैयार हुआ तट
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि हरिपुर कालसी का यमुना तट लंबे समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। यहां पहले साप्ताहिक रूप से माँ यमुना की आरती होती रही है। नए घाट के विकसित होने से अब प्रतिदिन आरती के आयोजन के लिए भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो गई हैं। घाट की सुरक्षा दीवारें यमुना के जलस्तर में वृद्धि के दौरान तटवर्ती क्षेत्र की सुरक्षा में भी सहायक होंगी।आस्था के साथ पर्यटन को भी मिलेगा विस्तार

हरिपुर कालसी में गूंजा माँ यमुना का जयघोष, मुख्यमंत्री धामी ने किया माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण और हरिघाट का लोकार्पण
माँ जमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास, कालसी के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विकास को मिली नई दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर माँ यमुना के पावन तट पर हुआ ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम, श्रद्धा और आस्था से जगमगाया कालसी
“2100 दीपों से जगमगाया यमुना तट”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिपुर कालसी पहुंचकर क्षेत्र को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास की महत्वपूर्ण सौगातें दीं। मुख्यमंत्री ने माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण तथा माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास किया। इस अवसर पर माँ यमुना के पावन तट पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के साथ यमुना आरती का आयोजन भी किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी साधु-संतों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह के साथ यमुना आरती में श्रद्धापूर्वक प्रतिभाग किया। श्रद्धा और आस्था से ओतप्रोत इस आयोजन से कालसी का यमुना तट आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर नजर आया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कालसी की धरती इतिहास, आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि है। माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण और यमुना आरती जैसे आयोजन इस क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूती प्रदान करेंगे। माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास भी कालसी के धार्मिक एवं सांस्कृतिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
‘आशीर्वाद का दीया’ और यमुना आरती, 2100 दीपो से जगमगाया माँ यमुना का पावन तट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर माँ यमुना के पावन तट पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम एवं यमुना आरती श्रद्धा और आध्यात्मिक भाव के साथ संपन्न हुई। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी माँ यमुना के तट पर एक दीया प्रज्वलित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं जनकल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री के साथ साधु-संतों, श्रद्धालुओं और बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह ने दीप प्रज्ज्वलित किए। इस अवसर पर कुल 2100 दीपों से माँ यमुना का पावन तट जगमगा उठा।
एक साथ प्रज्ज्वलित 2100 दीपों की रोशनी ने यमुना तट को भव्य और दिव्य आभा से भर दिया। दीपों की जगमगाहट के बीच मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने साधु-संतों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं और स्थानीय जनसमूह के साथ माँ यमुना की आरती में श्रद्धापूर्वक प्रतिभाग किया। इस दौरान प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की गई। आस्था, प्रकाश और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर यह दृश्य कालसी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की जीवंत अभिव्यक्ति बन गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ ही प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हनोल मास्टर प्लान को ₹150 करोड़ की स्वीकृति
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जौनसार-बावर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हनोल मास्टर प्लान के लिए ₹150 करोड़ की स्वीकृति इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन से जुड़ी अवस्थापना सुविधाओं के विकास और श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि लाखामंडल सहित जौनसार क्षेत्र के अन्य ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण और विकास पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ ही पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिकी को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास केवल तीर्थ एवं पर्यटन स्थलों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इन विकास कार्यों का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाना भी प्राथमिकता है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से होमस्टे, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, परिवहन, खान-पान और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा क्षेत्र की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि जौनसार-बावर की विशिष्ट लोक संस्कृति, परंपराएं, वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य उत्तराखंड की अमूल्य धरोहर हैं। विकास के साथ इन परंपराओं और विरासत का संरक्षण सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
आस्था, विरासत और विकास का संगम बन रहा उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिली है। चारधाम के साथ ही प्रदेश के विभिन्न पौराणिक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में कालसी, हनोल, लाखामंडल और जौनसार-बावर क्षेत्र के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को नई पहचान देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य हो रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड की आस्था और आध्यात्मिक विरासत आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के साथ जुड़कर प्रदेश के विकास और स्थानीय रोजगार का आधार बने।
इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, सचिव रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि, अन्य जनप्रतिनिधि, विभिन्न साधु-संत तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।



