
- जहां लगता था कूड़े का ढेर, वहां अब तालाब में बोटिंग और आइलैंड
- Dehradun में नया आकर्षण! मियांवाला के पुराने जौहड़ को मिला नया जीवन
- ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’…देहरादून के इस पार्क को देखकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कही बड़ी बात
- Miyanwala Jal Srishti Park: ₹8.64 करोड़ में बदला पुराना जौहड़, धामी ने किया लोकार्पण

इस परियोजना की खास बात यह है कि पुराने तालाब को खत्म करने के बजाय उसी जलस्रोत को पार्क के विकास का केंद्र बनाया गया है। तालाब के बीच आइलैंड, पेडल बोटिंग, जॉगिंग ट्रैक, योगा डेक, चिल्ड्रन पार्क और फ्लावर गार्डन जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
कूड़े और झाड़ियों से घिरी जमीन पर अब हरियाली
राजकीय इंटर कॉलेज मियांवाला के पास स्थित जौहड़ की भूमि लंबे समय से उपेक्षित थी। स्थानीय स्तर पर कूड़ा डाले जाने और जंगली झाड़ियों के कारण यह जगह उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित नहीं हो पा रही थी।
एमडीडीए के मुताबिक, ₹8 करोड़ 63 लाख 83 हजार 518 रुपये की परियोजना के तहत यहां विकास कार्य मार्च 2024 में शुरू हुए और मार्च 2026 में पार्क तैयार हुआ। परियोजना में पुराने जलस्रोत को संरक्षित रखते हुए उसके आसपास हरित क्षेत्र और नागरिक सुविधाएं विकसित की गईं।

तालाब के बीच आइलैंड और पेडल बोटिंग
जल सृष्टि पार्क का सबसे प्रमुख आकर्षण इसका तालाब और उसके बीच बनाया गया आइलैंड है। यहां पेडल बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री धामी ने पार्क को देहरादून में ही ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ देने वाला स्थल बताया। हालांकि यह मुख्यमंत्री द्वारा कार्यक्रम के दौरान किया गया वर्णन है; इसे किसी आधिकारिक पर्यटन तुलना या समानता के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
बच्चों से बुजुर्गों तक के लिए सुविधाएं
पार्क में सुबह-शाम घूमने और दौड़ने के लिए जॉगिंग ट्रैक बनाया गया है। योग के लिए अलग योगा डेक, बैठने के लिए बेंच और गजीबो, पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग शौचालय तथा जलपान गृह जैसी सुविधाएं भी हैं।
बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क बनाया गया है। वहीं फूलों और वनस्पतियों की जानकारी देने के लिए एजुकेशनल फ्लावर गार्डन तथा पक्षी और जैव विविधता से जुड़े क्षेत्र विकसित किए गए हैं।
यानी पार्क को केवल घूमने की जगह के तौर पर नहीं, बल्कि हरियाली, जल संरक्षण, स्वास्थ्य, मनोरंजन और प्रकृति से जुड़ाव को एक साथ जोड़ने वाले सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया गया है।

धामी बोले- विकास का मतलब सिर्फ कंक्रीट नहीं
लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुराने तालाब के पुनर्जीवन को पर्यावरण और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि जल स्रोतों को बचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का अर्थ केवल बड़ी इमारतें और कंक्रीट के ढांचे तैयार करना नहीं, बल्कि लोगों का जीवन आसान बनाना, शहर को सुंदर बनाना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना भी है। उन्होंने देहरादून में हरित क्षेत्रों और पार्कों के विकास को इसी व्यापक दृष्टिकोण से जोड़कर प्रस्तुत किया।

बंशीधर तिवारी के नेतृत्व में एमडीडीए का नया शहरी मॉडल
मियांवाला का जल सृष्टि पार्क एमडीडीए के उस कामकाजी मॉडल की झलक भी देता है, जिसमें उपेक्षित सरकारी भूमि को जनउपयोगी बनाने के साथ उसके पर्यावरणीय महत्व को भी बरकरार रखा जा रहा है। जौहड़ की भूमि को संरक्षित करते हुए स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए। छायादार वृक्षों के साथ जलधारण क्षमता बढ़ाने, मृदा कटाव रोकने और भूमि को स्थिर रखने के उपाय किए गए। इस तरह एक ऐसी भूमि, जो कभी कूड़े और अव्यवस्था की वजह से समस्या बनी हुई थी, आज हरित क्षेत्र, जल संरक्षण, जैव विविधता, स्वास्थ्य और मनोरंजन का संयुक्त केंद्र बन गई है। एमडीडीए की यह पहल मुख्यमंत्री धामी के पर्यावरण-अनुकूल विकास के विजन और प्राधिकरण के स्तर पर उसे धरातल पर उतारने की कोशिश को सामने लाती है। खास बात यह है कि परियोजना सिर्फ पार्क बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक पुराने जलस्रोत को केंद्र में रखकर पूरे क्षेत्र का स्वरूप बदला गया।

रायपुर क्षेत्र में सड़क, पानी और बाढ़ सुरक्षा के कामों का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान रायपुर क्षेत्र में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सीवर, पार्क और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सड़कों के डामरीकरण, नवीनीकरण और चौड़ीकरण के साथ सीवर व्यवस्था सुधारने तथा पेयजल के लिए नए ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंक बनाने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। बरसात के दौरान जलभराव और बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए नदियों और बरसाती नालों पर बाढ़ सुरक्षा एवं चैनलाइजेशन कार्यों का भी उल्लेख किया गया।
मुख्यमंत्री ने देहरादून की भविष्य की पेयजल जरूरतों के संदर्भ में सौंग डैम परियोजना का भी जिक्र किया।
‘सरकार पार्क बना सकती है, संभालना समाज की जिम्मेदारी’
पार्क के लोकार्पण के साथ मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से इसके रखरखाव में भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार पार्क बना सकती है और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों और युवाओं से पार्क का उपयोग खेल, दौड़ और योग जैसी गतिविधियों के लिए करने तथा पार्क और जलाशय की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
एमडीडीए ने पुराने जलस्रोत को बनाया परियोजना का केंद्र
जल सृष्टि पार्क की परियोजना में सबसे उल्लेखनीय पहल पुराने जौहड़ को संरक्षित रखना है। यानी विकास के लिए जलस्रोत को हटाने के बजाय उसे पार्क की पहचान का हिस्सा बनाया गया।
एमडीडीए के अनुसार स्थानीय प्रजातियों के पौधे, छायादार वृक्ष और हरित क्षेत्र विकसित किए गए हैं। इस तरह मियांवाला की उपेक्षित भूमि को जलस्रोत, हरियाली, नागरिक सुविधाओं और मनोरंजन से जुड़े सार्वजनिक स्थल में बदला गया है।
अब इस पार्क की असली परीक्षा इसके निर्माण से आगे शुरू होती है। क्या स्थानीय लोग और प्रशासन मिलकर इसकी स्वच्छता, हरियाली और जलस्रोत को लंबे समय तक बनाए रख पाते हैं।
क्या है खास
* स्थान: मियांवाला, देहरादून
* लागत: करीब ₹8.64 करोड़
* पुराने जौहड़ का पुनर्जीवन
* पेडल बोटिंग और तालाब के बीच आइलैंड
* जॉगिंग ट्रैक
* योगा डेक
* चिल्ड्रन पार्क
* एजुकेशनल फ्लावर गार्डन
* हरित क्षेत्र और लैंडस्केपिंग
* पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र
यहाँ पढ़िए एमडीडीए द्वारा जारी प्रेस बयान:-
कूड़े के ढेर से ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ तक, धामी विजन ने बदल दी मियांवाला के जौहड़ की तस्वीर
धामी के ‘ग्रीन दून’ विजन को जमीन पर उतार रहे बंशीधर तिवारी, पुराने तालाब को एमडीडीए ने दिया नया जीवन, ‘जल सृष्टि पार्क’ 8.64 करोड़ में बना शहर का खूबसूरत पब्लिक स्पेस
देहरादून के मियांवाला में कभी जिस जगह पर गंदगी, कूड़े के ढेर और जंगली झाड़ियों का कब्जा था, आज वही जगह लोगों के लिए सुकून, सेहत और मनोरंजन का नया ठिकाना बन गई है। जिस पुराने जौहड़ की भूमि लंबे समय से उपेक्षित पड़ी थी, वहां अब करीब 8 करोड़ 64 लाख रुपये की लागत से विकसित ‘जल सृष्टि पार्क’ लोगों को आकर्षित कर रहा है। खास बात यह है कि विकास की दौड़ में पुराने जलस्रोत को मिटाने के बजाय उसके मूल स्वरूप को बचाते हुए उसके आसपास आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मियांवाला में इस महत्वाकांक्षी पार्क का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इसे स्वच्छ, स्वस्थ और हरित देहरादून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण केवल पर्यावरण बचाने का काम नहीं, बल्कि अपनी विरासत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी भी है। यह परियोजना मुख्यमंत्री के उस विजन को जमीन पर उतारती दिखाई देती है, जिसमें विकास का मतलब केवल कंक्रीट के ढांचे खड़े करना नहीं, बल्कि शहर में ऐसे सार्वजनिक स्थल तैयार करना है जहां हरियाली, जल, स्वास्थ्य, मनोरंजन और पर्यावरण संरक्षण एक साथ दिखाई दें।
जहां पहले गंदगी थी, वहां अब हरियाली और जल का संगम
राजकीय इंटर कॉलेज मियांवाला के समीप स्थित जौहड़ की भूमि लंबे समय से अव्यवस्था का शिकार थी। स्थानीय स्तर पर यहां कूड़ा फेंका जाता था। तालाब के आसपास जंगली झाड़ियां उगी थीं और जलभराव की स्थिति बनी रहती थी। खाली पड़ी भूमि पर अतिक्रमण की आशंका भी बनी हुई थी।मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने इस स्थिति को चुनौती के रूप में लिया और भूमि के विकास की योजना तैयार की। प्राधिकरण ने करीब 8 करोड़ 63 लाख 83 हजार 518 रुपये की लागत वाली परियोजना को धरातल पर उतारा। निर्माण कार्य मार्च 2024 में शुरू हुआ और करीब 02 वर्षों में मार्च 2026 में पार्क पूरी तरह तैयार हो गया।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की निगरानी में विकसित यह परियोजना इस मायने में भी अलग है कि इसमें जौहड़ के मूल जल स्वरूप को सुरक्षित रखा गया। यानी पुराने जलस्रोत को खत्म कर नया पार्क खड़ा करने के बजाय जलस्रोत को ही पार्क की पहचान का केंद्र बनाया गया।
तालाब के बीच आइलैंड, पेडल बोटिंग ने बढ़ाया आकर्षण
जल सृष्टि पार्क में प्रवेश करते ही सबसे ज्यादा ध्यान तालाब और उसके बीच बने खूबसूरत आइलैंड पर जाता है। यहां लोगों के लिए पेडल बोटिंग की सुविधा भी विकसित की गई है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री धामी ने इसे देहरादून में ही ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ देने वाला स्थल बताया।
पार्क में सुबह-शाम टहलने और दौड़ने के लिए जॉगिंग ट्रैक बनाया गया है। योग के लिए अलग योगा डेक, बैठने के लिए बेंच और गजीबो, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय तथा जलपान गृह जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।
बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क है तो फूलों और वनस्पतियों की जानकारी देने के लिए एजुकेशनल फ्लावर गार्डन तैयार किया गया है। पार्क में पक्षी और जैव विविधता उद्यान भी विकसित किया गया है, ताकि यह स्थान केवल मनोरंजन तक सीमित न रहे बल्कि लोगों को प्रकृति और स्थानीय जैव विविधता से जोड़ने का काम भी करे।
विकास ऐसा जो प्रकृति को बचाए, यही धामी विजन का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकार्पण के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में जल और जंगल को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है। इसलिए पुराने तालाबों और जलस्रोतों का पुनर्जीवन केवल सौंदर्यीकरण नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को बचाने का प्रयास भी है।मुख्यमंत्री के मुताबिक वास्तविक विकास वही है, जिससे लोगों का जीवन सुगम हो, शहर सुंदर बने, पर्यावरण सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य मिले। जल सृष्टि पार्क को इसी सोच का उदाहरण माना जा रहा है।
देहरादून में डिफेंस कॉलोनी, सिंयावाला और नेहरू कॉलोनी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में पार्कों के निर्माण और सौंदर्यीकरण के कार्यों को भी इसी व्यापक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। यानी शहर के विकास में अब सिर्फ सड़क और भवन नहीं, बल्कि ग्रीन स्पेस और नागरिक सुविधाएं भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं।
बंशीधर तिवारी के नेतृत्व में एमडीडीए का नया शहरी मॉडल
मियांवाला का जल सृष्टि पार्क एमडीडीए के उस कामकाजी मॉडल की झलक भी देता है, जिसमें उपेक्षित सरकारी भूमि को जनउपयोगी बनाने के साथ उसके पर्यावरणीय महत्व को भी बरकरार रखा जा रहा है। जौहड़ की भूमि को संरक्षित करते हुए स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए। छायादार वृक्षों के साथ जलधारण क्षमता बढ़ाने, मृदा कटाव रोकने और भूमि को स्थिर रखने के उपाय किए गए। इस तरह एक ऐसी भूमि, जो कभी कूड़े और अव्यवस्था की वजह से समस्या बनी हुई थी, आज हरित क्षेत्र, जल संरक्षण, जैव विविधता, स्वास्थ्य और मनोरंजन का संयुक्त केंद्र बन गई है। एमडीडीए की यह पहल मुख्यमंत्री धामी के पर्यावरण-अनुकूल विकास के विजन और प्राधिकरण के स्तर पर उसे धरातल पर उतारने की कोशिश को सामने लाती है। खास बात यह है कि परियोजना सिर्फ पार्क बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक पुराने जलस्रोत को केंद्र में रखकर पूरे क्षेत्र का स्वरूप बदला गया।
सरकार ने पार्क बनाया, अब समाज को संभालना होगा
मुख्यमंत्री धामी ने पार्क के लोकार्पण के साथ स्थानीय लोगों को इसकी जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि सरकार पार्क बना सकती है, उसे सुंदर बना सकती है और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना समाज की साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इसे सरकारी संपत्ति समझने के बजाय अपने पार्क के रूप में देखें। बच्चों और युवाओं से उन्होंने पार्क का अधिक से अधिक उपयोग करने, खेल, दौड़ और योग जैसी गतिविधियों से जुड़ने के साथ इसकी स्वच्छता और जलाशय की देखभाल में भी भागीदारी करने का आह्वान किया।
मियांवाला का जल सृष्टि पार्क अब सिर्फ एक नया पार्क नहीं, बल्कि यह दिखाने वाला उदाहरण बन रहा है कि पुराने जलस्रोत को बचाकर भी आधुनिक शहर की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। मुख्यमंत्री धामी के हरित और पर्यावरण-अनुकूल विकास के विजन के साथ एमडीडीए ने जिस जौहड़ को नई पहचान दी है, वह आने वाले समय में देहरादून के प्रमुख सार्वजनिक आकर्षणों में शामिल हो होगा।
कार्यक्रम में विधायक उमेश शर्मा काऊ, मेयर सौरभ थपलियाल, एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी सहित अन्य अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।



