
- उत्तराखंड निगम कर्मचारियों को मिलेगा बोनस, धामी सरकार का फैसला
- उत्तराखंड में सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों के पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 का तदर्थ बोनस मिल सकेगा। जानिए 7 हजार रुपये की सीमा, पात्रता और भुगतान के नियम।
अब निगम खुद तय करेंगे, कर्मचारियों को बोनस देना है या नहीं
सरकार के इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों को बोनस भुगतान के मामले में निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई है। सचिव विनय शंकर पांडेय की ओर से जारी पत्र के अनुसार, जिन संस्थानों में बोनस की देयता बनती है और जो अपने संसाधनों से इसका वित्तीय भार उठाने में सक्षम हैं, वे निर्धारित शर्तों के तहत पात्र कर्मचारियों को तदर्थ बोनस दे सकते हैं।
इसके लिए वित्त विभाग की दोबारा सहमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित प्रशासनिक विभाग अपने अधीनस्थ संस्थानों की आर्थिक स्थिति का आकलन करेंगे और उसी आधार पर बोनस भुगतान की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक उद्यम विभाग को भी देनी होगी।
किस कर्मचारी को मिलेगा बोनस? अधिकतम 7,000 रुपये की गणना सीमा
वित्त विभाग के शासनादेश में तदर्थ बोनस के लिए कर्मचारियों की श्रेणी और वेतन सीमा निर्धारित की गई है।
* समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ के कर्मचारी पात्र होंगे।
* समूह ‘ख’ के अराजपत्रित कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा।
* अधिकतम ग्रेड वेतन सीमा 4,800 रुपये यानी पुनरीक्षित वेतनमान में लेवल-8 तक निर्धारित है।
* उत्पादकता आधारित बोनस योजना के अंतर्गत नहीं आने वाले कर्मचारी इस व्यवस्था के पात्र होंगे।
* अधिकतम 30 दिन की परिलब्धियों के आधार पर 7,000 रुपये की गणना सीमा तय की गई है।
इसका अर्थ यह है कि पात्रता और निर्धारित गणना के अनुसार बोनस मिलेगा। हर कर्मचारी को अनिवार्य रूप से 7,000 रुपये मिलना तय नहीं है।
छह महीने की नौकरी जरूरी, दैनिक वेतनभोगियों को भी मिलेगा लाभ
बोनस के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त सेवा अवधि को लेकर भी रखी गई है। कर्मचारी का 31 मार्च 2026 को सेवा में कार्यरत होना और उस तारीख तक कम से कम छह माह की निरंतर एवं संतोषजनक सेवा पूरी करना जरूरी है।
जिन कर्मचारियों ने एक वर्ष से कम लेकिन छह माह या उससे अधिक सेवा की है, उन्हें उनके सेवाकाल के अनुपात में बोनस दिया जाएगा।
दैनिक वेतनभोगी और कैजुअल कर्मचारियों के लिए भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत छह कार्यदिवस वाले कार्यालयों में पिछले तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन और पांच कार्यदिवस वाले कार्यालयों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 206 दिन काम करने वाले कर्मचारी निर्धारित शर्तों के अधीन पात्र होंगे।
ऐसे कर्मचारियों के लिए अधिकतम 1,200 रुपये मासिक परिलब्धि के आधार पर 30 दिन का तदर्थ बोनस 1,184 रुपये निर्धारित किया गया है।
किन कर्मचारियों का बोनस रोका जा सकता है?
शासनादेश में बोनस भुगतान को लेकर कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमा लंबित है, उनका बोनस मामले का अंतिम परिणाम आने तक स्थगित रहेगा। यदि कर्मचारी दोषमुक्त होता है तो नियमानुसार बोनस का लाभ मिल सकेगा।
वहीं वर्ष 2025-26 में विभागीय कार्रवाई या आपराधिक मुकदमे में दंडित कर्मचारियों को बोनस नहीं मिलेगा। अवैतनिक अवकाश को छोड़कर अन्य प्रकार के अवकाश की अवधि को पात्रता की गणना में शामिल किया जाएगा। निलंबित कर्मचारियों के मामले में भी निर्धारित शर्तें लागू होंगी।
घाटे वाले निगमों को नहीं मिलेगी सरकारी मदद
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकाय और विकास प्राधिकरण यदि लाभ की स्थिति में हैं तो वे अपने कर्मचारियों को बोनस देने का निर्णय ले सकते हैं। लेकिन बोनस का पूरा वित्तीय भार संबंधित संस्थान को अपने संसाधनों से उठाना होगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से कोई अतिरिक्त अनुदान नहीं दिया जाएगा।
बोनस की धनराशि कर्मचारियों को नकद भुगतान के रूप में दी जाएगी। इसका लेखांकन संबंधित संस्थान के वेतन व्यय वाले लेखाशीर्षक में मानक मद ‘वेतन’ के अंतर्गत किया जाएगा।
निगम कर्मचारी महासंघ ने जताया मुख्यमंत्री धामी का आभार
सरकार के इस फैसले का राज्य निगम कर्मचारी महासंघ ने स्वागत किया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रकाश रणाकोटी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार का आभार जताते हुए कहा कि निगम कर्मचारी लंबे समय से बोनस की उम्मीद लगाए बैठे थे।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों को अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर बोनस देने का अधिकार मिलना कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण कदम है। रणाकोटी ने सचिव विनय शंकर पांडेय का भी आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि सभी निगम एवं सार्वजनिक उपक्रम अपने वित्तीय संसाधनों का आकलन कर पात्र कर्मचारियों को जल्द बोनस का लाभ देंगे।
अब निगाहें निगमों के फैसले पर हैं। शासन स्तर से रास्ता खुलने के बाद वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन-कौन से सार्वजनिक उपक्रम अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर बोनस भुगतान का निर्णय लेते हैं।



