
- अमित शाह ने देहरादून से फूंका मिशन 2027 का बिगुल
- शाह ने धामी पर जताया भरोसा, 2027 के लिए 65 पार का लक्ष्य; उत्तराखंड में तीसरी बार भाजपा सरकार का दावा
Adda Politics: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देहरादून से भाजपा के मिशन 2027 का शंखनाद कर दिया है। परेड ग्राउंड में आयोजित राज्योत्सव समारोह में शाह ने न केवल लगातार तीसरी बार उत्तराखंड में भाजपा सरकार बनने का दावा किया, बल्कि विधानसभा चुनाव के लिए 65 पार सीटों का लक्ष्य भी सामने रख दिया। उनके संबोधन का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक वाक्य था- ‘ऊपर मोदी जी और नीचे धामी जी मिलकर उत्तराखंड के विकास के लिए काम कर रहे हैं।’
धामी के नेतृत्व पर भरोसा, क्या नेतृत्व की बहस पर भी लगा विराम?
गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उत्तराखंड भाजपा में 2027 के चुनाव को लेकर नेतृत्व और चुनावी चेहरे के सवाल पर निगाहें टिकी हुई हैं। ऐसे समय में शाह का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक साथ रखकर विकास की बात करना महज औपचारिक प्रशंसा नहीं है बल्कि इसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं। यह स्पष्ट संदेश है कि भाजपा नेतृत्व ‘धुरंधर’ धामी के चेहरे को आगे रखते हुए जीत की हैट्रिक लगाने को ताक़त झोंकने जा रही है। निसंदेह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय स्तर से मोर्चा संभालेंगे और राज्य स्तर पर पूरी राजनीतिक बिसात सीएम धामी को केंद्र में रखकर बिछाई जाएगी।
दरअसल, ‘ऊपर मोदी जी और नीचे धामी जी’ की टिप्पणी के जरिये शाह ने एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार की उपलब्धियों को राज्य की धामी सरकार से जोड़ा, वहीं दूसरी तरफ यह संदेश भी दे दिया है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार के कामकाज और धामी के नेतृत्व को प्रमुख चुनावी आधार बनाएगी।

शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और वर्तमान मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए पिछले दस वर्षों में राज्य की विकास यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने जीएसडीपी में 50 प्रतिशत और प्रति व्यक्ति आय में 40 प्रतिशत वृद्धि का दावा भी किया। इसके अलावा निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने, यूसीसी, नकल विरोधी कानून और 35 हजार युवाओं को रोजगार देने जैसे मुद्दों को सरकार की उपलब्धियों के तौर पर गिनाया।
65 पार का लक्ष्य: भाजपा के सामने अपनी ही जीत का रिकॉर्ड तोड़ने की चुनौती
अमित शाह ने 65 पार का लक्ष्य देकर भाजपा के सामने एक बड़ा चुनावी मानक भी खड़ा कर दिया है। उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों में भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 57 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में उसकी सीटें घटकर 47 रह गई थीं। अब 65 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य पार्टी के पिछले प्रदर्शन से काफी आगे जाने की महत्वाकांक्षा दर्शाता है। इसके ज़रिए जहाँ शाह ने मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करते हुए संदेश देना चाहा है कि उत्तराखंड में भाजपा इस क़दर मज़बूत है कि वह केवल सत्ता में वापसी की तैयारी नहीं कर रही, बल्कि राज्य में अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ चुनावी सफलता ( 2017 की जीत) को भी पीछे छोड़ते हुए जीत का नया कीर्तिमान स्थापित करने वाली है।
अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से घर-घर संपर्क करने और जनता के बीच सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने का आह्वान किया। इससे स्पष्ट है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चुनाव को लेकर संगठनात्मक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ाना चाहता है।
कांग्रेस पर हमला, विकास और राष्ट्रवाद को बनाया चुनावी हथियार
अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की वोट बचाओ यात्रा को घुसपैठियों को बचाने की यात्रा करार दिया। शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल पर सवाल उठाए और कांग्रेस पर उत्तराखंड को मनीऑर्डर इकोनॉमी के भरोसे छोड़ने का आरोप लगाया।
इसके जवाब में उन्होंने भाजपा सरकार की उपलब्धियों में समान नागरिक संहिता, सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण कानून, रोजगार, निवेश और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को गिनाया। देवभूमि को देश की सांस्कृतिक राजधानी बनाने का संकल्प भी सामने रखा।
कुल मिलाकर गृह मंत्री शाह ने 2027 के चुनाव के लिए विकास, सुशासन, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को भाजपा के राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखने की कोशिश की।
धामी के लिए भरोसे का संदेश, लेकिन क्या 65 पार की राह आसान ?
अमित शाह के बयान का एक अहम पहलू यह भी है कि उन्होंने धामी सरकार के कामकाज को पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति से सीधे जोड़ दिया है। यह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए निश्चित रूप से राजनीतिक भरोसे का बड़ा संदेश है। मोदी और धामी की संयुक्त नेतृत्व वाली विकास यात्रा को जिस तरह शाह ने प्रस्तुत किया, उससे धामी की राजनीतिक भूमिका को लेकर एक मजबूत संकेत मिलता है।
इसी के साथ शाह के दिए 65 पार ke लक्ष्य को हासिल करने के लिए भाजपा को सत्ता विरोधी रुझान, स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन, बेरोजगारी, पलायन, क्षेत्रीय असंतुलन और विपक्ष के संभावित चुनावी गठजोड़ जैसी चुनौतियों का डटकर मुकाबला करना होगा।
गौर हो कि कांग्रेस भी न्याय यात्रा और सरकार के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जरिए अपनी चुनावी जमीन तैयार कर रही है। ऐसे में भाजपा के लिए केवल मोदी और धामी के नाम का सहारा पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसे अपने दावों को जनता के अनुभवों और धरातल पर किए गए काम से भी जोड़ना होगा।
फिलहाल अमित शाह ने उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में भाजपा का लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है कि सीएम धामी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार और 70 में से 65 से अधिक सीटें। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भाजपा इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक तैयारी को किस दिशा में आगे बढ़ाती है। आखिर मनोवैज्ञानिक बढ़त वाले संदेश से आगे चुनावी लड़ाई में इसे हासिल करने के लिए भाजपा को भारी मेहनत करनी होगी। कह सकते हैं कि भाजपाई ‘चाणक्य’ शाह ने उत्तराखंड में लगातार दो कार्यकाल के बाद सत्ता में तीसरी पारी को लेकर पार्टी के सामने आगामी राजनीतिक चुनौती को अवसर में बदलने की जोरदार पेशबंदी की है।



