ADDA IN-DEPTH टाइमिंग का ‘खेल’! कांग्रेस को असल खतरा ‘अपनों’ से ही, सलमान ख़ुर्शीद के बाद मनीष तिवारी की किताब पर कोहराम, 26/11 हमले के बाद पाक को सबक न सिखाना मनमोहन सरकार की कमजोरी, कांग्रेस के काग़ज़ी शेर किसके लिए कर रहे बैटिंग?

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दिल्ली: वो कहते हैं ना हमें तो अपनों ने मारा ग़ैरों में कहां दम था..! इन दिनों कांग्रेस का सूरत ए हाल कुछ ऐसा ही है। पहले सलमान ख़ुर्शीद ने अयोध्या पर लिखी अपनी किताब में ‘ हिन्दुत्व’ की तुलना ISIS और बोके हराम जैसे कट्टरपंथी आतंकी संगठनों कर ठीक यूपी-उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को तस्करी में सजाकर मुद्दा थमाया और कांग्रेस को मुसीबत में फँसाया, अब मनीष तिवारी ने अपनी किताब में 26/11 हमले के बाद पाकिस्तान पर कड़ा एक्शन न कर पाने को मनमोहन सरकार की कमजोरी बताकर पंजाब विधासनभा चुनाव से पहले कांग्रेस पर अटैक कर दिया है।

दरअसल. तीन दिन बाद यानी 26 नवंबर को मुंबई अटैक की बरसी है और उससे ठीक पहले कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की किताब के मीडिया में आए अंश ने सियासी कुरुक्षेत्र मचा दिया है। जाहिर है जहां सलमान ख़ुर्शीद ने अपनी किताब में हिन्दुत्व की तुलना आईएसआईएस से करके उत्तरप्रदेश चुनाव से पहले भाजपा को ध्रुवीकरण का नया औजार थमाकर उनका काम आसान करने की कोशिश की, वहीं मनीष तिवारी ने 26/11 हमले के बाद जवाबी कार्रवाई न कर पाने को मनमोहन सरकार की कमजोरी बताकर न केवल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर अटैक किया है बल्कि असल और सीधा हमला कांग्रेस नेतृत्व यानी सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर ही किया है। यूपी और उत्तराखंड के साथ अगले साल पंजाब में भी चुनाव हैं और कैप्टन अमरिंदर वर्सेस नवजोत सिंह सिद्धू जंग से लहुलुहान कांग्रेस को अब मनीष तिवारी ने हमला कर और बेदम करने का ही काम किया है। यही वजह है कि पंजाब चुनाव से पहले आ रही मनीष तिवारी की किताब की टाइमिंग को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी तौर पर कुरुक्षेत्र छिड़ गया है।

जाहिर है मनीष तिवारी की किताब के मीडिया में आए अंश से जो धमाका हुआ है उसको लेकर हल्ला कांग्रेस के भीतर ही मचेगा। असल मौका तो भाजपा ने लपककर पा लिया है और अब सत्ताधारी पार्टी मनीष तिवारी के कथन को कांग्रेस का क़बूलनामा बताकर राहुल गांधी से चुप्पी तोड़ने का सवाल पूछ रही है। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ट्विट कर कहा है कि यह यूपीए सरकार की ही कमजोरी थी वरना इंडियन एयरफ़ोर्स हमले के लिए तैयार थी।

दरअसल मनीष तिवारी कांग्रेस नेतृत्व से नाराज चल रहे G-23 यानी असंतुष्ट नेताओं के समूह -23 का हिस्सा भी रहा है और पंजाब कांग्रेस में पिछले वक्त चले पचड़े पर लगातार मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी व्यक्त करते रहे हैं। मनीष तिवारी की ‘10 Flashpoints; 20 Years- National Security Situations that Impacted India’ नामक किताब गुज़रे दो दशकों में भारत के सामने आई राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों का ब्योरा देती है।

सवाल है कि ठीक किसी भी बड़े चुनाव ये पहले कभी सलमान ख़ुर्शीद, कभी मनीष तिवारी तो कभी मणिशंकर अय्यर या कोई और नेता अपने बयानों, संस्मरणों या किताब के बहाने ऐसा बम फोड़ता है कि उसकी सियासी क़ीमत कांग्रेस को चुनावी हार के तौर पर चुकानी पड़ती है। सवाल बड़ा यह भी है कि आखिर कांग्रेस नेतृत्व अपने इन तमाम असंतुष्ट नेताओं को समझाने-मनाने में क्यों नाकाम साबित हो रहा?


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