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7000 बीघा जमीन और 1320 MW थर्मल पावर पर उठे सवालों का सुंदरम ने दिया जवाब, बोले- ‘हमारे पास 7000 बीघा जमीन नहीं’

The Adda Uttarakhand Conclave 2026 में हुई इस बातचीत में 7000 बीघा जमीन से लेकर कोल ब्लॉक और 1320 MW थर्मल पावर तक के मुद्दों पर सुंदरम ने प्रशासनिक और नीतिगत पक्ष सामने रखा। खास बात यह रही कि दोनों मुद्दों पर उनसे सीधे सवाल किए गए और उन्होंने मंच से उनका जवाब दिया।

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  • The Adda Uttarakhand Conclave 2026 में प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं UIIDB एमडी डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा- अब तक UIIDB को करीब 45 एकड़ जमीन ही मिली, बाकी जमीन प्रक्रिया में या रिजेक्ट; THDC का मैंडेट बदलने के बाद बदली गई थर्मल पावर परियोजना की रणनीति
The Adda Uttarakhand Conclave 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम
The Adda Uttarakhand Conclave 2026, Dehradun। उत्तराखंड में 7000 बीघा जमीन निजी हाथों को दिए जाने और छत्तीसगढ़ के कोल ब्लॉक से 1320 मेगावाट थर्मल पावर परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) के एमडी डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने The Adda Uttarakhand Conclave 2026 में खुलकर जवाब दिया। मंच पर दोनों मुद्दों पर सीधे सवाल किए गए और सुंदरम ने आरोपों के जवाब में जमीन, निवेश प्रक्रिया, THDC के बदले मैंडेट और राज्य की बिजली जरूरतों का पूरा पक्ष रखा।

 

7000 बीघा जमीन हमारे पास नहीं: सुंदरम

UIIDB को लेकर सबसे बड़ा सवाल 7000 बीघा जमीन निजी हाथों में दिए जाने के आरोप का था। प्रमुख सचिव सुंदरम ने साफ कहा कि UIIDB के पास 7000 बीघा जमीन नहीं है।

उन्होंने बताया कि UIIDB अभी नया संगठन है और शुरुआती चरण में काम कर रहा है। सर्विस सेक्टर में निवेश लाने के लिए बोर्ड ने जमीन की मांग की थी, लेकिन अब तक मांगी गई जमीन का करीब 10 प्रतिशत ही उपलब्ध हो पाया है। सुंदरम के मुताबिक, करीब 45 एकड़ जमीन ही फिलहाल UIIDB को मिली है।

बाकी जमीन या तो प्रक्रिया में है अथवा प्रस्ताव खारिज हो चुके हैं।

सुंदरम ने सवाल उठाया कि यदि 7000 बीघा जमीन UIIDB को दिए जाने का दावा किया जा रहा है तो आरोप लगाने वालों को इसका पूरा ब्रेकअप भी सामने रखना चाहिए। उन्होंने उपलब्ध 45 एकड़ जमीन को लेकर भी कहा कि इससे जुड़ी कुछ प्रक्रियाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं।

उन्होंने इसे “प्रीमच्योर एलगेशन” बताते हुए यह संभावना भी जताई कि आरोपों के पीछे ऐसी मंशा हो सकती है जिससे इस काम को आगे बढ़ने से रोक दिया जाए।

आखिर क्यों बनाया गया UIIDB?

कॉनक्लेव में सुंदरम ने UIIDB के गठन की पृष्ठभूमि भी बताई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि प्रदेश के करीब 45 प्रतिशत वर्कफोर्स की निर्भरता प्राथमिक क्षेत्र पर है, जबकि GDP में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान करीब 8.5 से 9 प्रतिशत है।

ऐसे में अतिरिक्त कार्यबल को प्राथमिक क्षेत्र से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की ओर ले जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग की सीमाएं हैं, लेकिन सर्विस सेक्टर में उत्तराखंड के पास बड़ी संभावनाएं हैं।

उन्होंने हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक हाई डेंसिटी एप्पल फार्मिंग, कीवी, एरोमा, हॉर्टिकल्चर, फ्लोरीकल्चर और अन्य हाई-वैल्यू क्रॉप्स के जरिए कृषि क्षेत्र की आय बढ़ाई जा सकती है।

कोल ब्लॉक से थर्मल पावर तक कैसे बदली पूरी रणनीति?

दूसरा बड़ा सवाल छत्तीसगढ़ में उत्तराखंड को मिले कोल ब्लॉक से जुड़ा था। आरोप यह था कि पहले UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम के जरिए बिजली उत्पादन की योजना थी, लेकिन बाद में यह काम निजी कंपनी को दे दिया गया।

सुंदरम ने बताया कि शुरुआत में THDC के साथ संयुक्त उपक्रम के जरिए थर्मल पावर परियोजना विकसित करने की योजना थी। इसके लिए भारत सरकार से कोल ब्लॉक आवंटन भी कराया गया था।

लेकिन बाद में THDC का प्रबंधन NTPC के पास चला गया और NTPC ने अपनी सहायक कंपनियों के कार्यक्षेत्र तय किए। सुंदरम के अनुसार THDC को हाइड्रो पावर और पंप स्टोरेज परियोजनाओं के लिए मैंडेट दिया गया, जबकि थर्मल पावर का काम उसकी पैरेंट कंपनी NTPC के दायरे में रहा। इस बदलाव के कारण उत्तराखंड का प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम थर्मल परियोजना आगे नहीं बढ़ा सका।

कोल ब्लॉक बचाने के लिए अपनाया गया TBCB मॉडल

सुंदरम ने बताया कि कोल ब्लॉक आवंटन के साथ समयसीमा जुड़ी थी। तय समय में परियोजना शुरू नहीं होने पर आवंटन रद्द हो सकता था। इसके बाद परियोजना को कैटेगरी-4 में ले जाकर Tariff Based Competitive Bidding (TBCB) के माध्यम से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि इसमें नियामकीय, बोर्ड और अंततः कैबिनेट स्तर की मंजूरियां शामिल हैं। यही वह प्रक्रिया है जिसके पूरा होने के बाद निजी कंपनी के माध्यम से थर्मल पावर की खरीद का रास्ता बना।

25 साल में 1.16 लाख करोड़ खर्च होने के आरोप पर क्या बोले सुंदरम?

परियोजना को लेकर यह भी सवाल उठाया गया कि 25 साल की अवधि में करीब 1.16 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसका बोझ उत्तराखंड पर पड़ेगा। सुंदरम ने कहा कि 25 साल के पूरे खर्च को जोड़कर उसे नुकसान का आंकड़ा बताना उचित आकलन नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य जितनी बिजली की जरूरत होती है, उतनी ही खरीदता है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड अभी भी बिजली बाजार से बिजली खरीदता है और पीक आवर में करीब 10 से 15 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली खरीदनी पड़ती है।

‘थर्मल पावर 365 दिन और 24 घंटे उपलब्ध हो सकती है’

सुंदरम ने थर्मल पावर की जरूरत समझाते हुए कहा कि हाइड्रो पावर का उत्पादन सर्दियों में घटता है। उन्होंने बताया कि बारिश बंद होने और नदियों में फ्लो कम होने के कारण पिछले साल की तुलना में इस समय राज्य करीब 150 मेगावाट पीछे चल रहा है।

उन्होंने कहा कि थर्मल पावर की खासियत यह है कि यह 365 दिन और 24 घंटे उपलब्ध हो सकती है। सोलर पावर दिन में उपलब्ध होती है, जबकि बेस लोड और ग्रिड स्टेबिलिटी के लिए थर्मल पावर महत्वपूर्ण है।

CEA ने 1320 MW थर्मल पावर खरीदने की सलाह दी

सुंदरम के मुताबिक Central Electricity Authority (CEA) के Resource Adequacy Plan में उत्तराखंड के ऊर्जा मिश्रण में बेस-लोड पावर की कमी सामने आई थी। इसी आधार पर राज्य को लॉन्ग टर्म थर्मल पावर खरीदने की सलाह दी गई। उन्होंने कहा कि राज्य ने इसी जरूरत को देखते हुए 1320 MW थर्मल पावर की व्यवस्था की है।

लखवाड़ और किशाऊ के बाद पावर सरप्लस बनने की उम्मीद

उत्तराखंड के भविष्य के ऊर्जा परिदृश्य और पॉवर सेक्टर में सरप्लस स्टेट बनने की संभावनाओं पर सुंदरम ने कहा कि जब लखवाड़ और किशाऊ दोनों परियोजनाएं शुरू हो जाएंगी तो राज्य के पावर सरप्लस बनने की उम्मीद है।

हालांकि उन्होंने कहा कि केवल पावर सरप्लस राज्य बनना लक्ष्य नहीं होना चाहिए। राज्य की अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से आगे बढ़नी चाहिए कि पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली की खपत भी प्रदेश में हो।

सुंदरम ने कहा कि किसी राज्य में पावर कंजम्पशन आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है। बिजली की खपत बढ़ना इस बात का संकेत है कि आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

The Adda Uttarakhand Conclave 2026 में हुई इस बातचीत में 7000 बीघा जमीन से लेकर कोल ब्लॉक और 1320 MW थर्मल पावर तक के मुद्दों पर सुंदरम ने प्रशासनिक और नीतिगत पक्ष सामने रखा। खास बात यह रही कि दोनों मुद्दों पर उनसे सीधे सवाल किए गए और उन्होंने मंच से उनका जवाब दिया।

नोट: हमारे यूट्यूब चैनल The News Adda और इसी नाम से बने फेसबुक पेज पर आप प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम के साथ इन्हीं तमाम सवालों को लेकर संपादक डॉ. पवन लालचंद द्वारा की गई पूरी बातचीत आप देख सकते हैं।

 

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