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SIR पर BJP के मुख्यमंत्रियों का मोर्चा, धामी बोले- ‘हेडलाइन से नहीं, पूरी फाइल और तथ्यों से तय होते हैं सवालों के जवाब’

SIR विवाद पर धामी का कांग्रेस-राहुल पर पलटवार, बोले- संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश, चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मत

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देहरादून। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच चल रहे विवाद ने रविवार को राजनीतिक रूप से नया मोड़ ले लिया। भाजपा ने जहां देशभर में अपने मुख्यमंत्रियों को मैदान में उतारकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव किया, वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस, राहुल गांधी और विपक्ष के आरोपों पर तीखा पलटवार किया।

धामी ने SIR को चुनाव आयोग की सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ एक पार्टी और उसके नेताओं की ओर से लगातार नैरेटिव बनाने का प्रयास किया जा रहा है और पहले भी ऐसे नैरेटिव हर बार तथ्यों के सामने गलत साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती का आधार संवैधानिक संस्थाएं हैं और चुनाव आयोग से सवाल पूछे जा सकते हैं, लेकिन सवाल तथ्य और दस्तावेजों पर आधारित होने चाहिए।

यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति को लेकर द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के विभिन्न फैसलों को लेकर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।

SIR का फैसला सर्वसम्मति से हुआ, मतभेद के रूप में पेश करना ठीक नहीं: धामीसीएम धामी ने चुनाव आयोग की ओर से जारी हालिया स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि 24 जून 2025 को SIR शुरू करने का फैसला तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से हुआ था। आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद भी कहा कि SIR से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक स्तर पर दिए गए सुझावों या टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से अलग करके देखा जाना चाहिए।

धामी ने कहा कि किसी प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों या आयुक्तों की ओर से सुझाव या आपत्तियां आना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकता है, लेकिन उसे संस्थागत टूटन के तौर पर प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा “हेडलाइन से नहीं, पूरी फाइल और संस्थागत निर्णय से तथ्य तय होते हैं।” उनके मुताबिक किसी भी सवाल का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं बल्कि पूरी फाइल, दस्तावेज और अंतिम संस्थागत फैसले से मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

मुख्यमंत्री ने 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत ने SIR की वैधानिकता को स्वीकार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में किए गए SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए माना था कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण की शक्ति प्राप्त है। अदालत ने यह भी माना कि मतदाता सूची की शुद्धता स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव का महत्वपूर्ण आधार है।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। बिहार SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आधार को पहचान के लिए 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया था, जबकि नागरिकता सिद्ध करने के लिए उसकी सीमाओं को स्पष्ट रखा था।

Form-6 पर भी धामी ने रखा आयोग का पक्ष

SIR विवाद में Form-6 को लेकर उठे सवालों पर भी मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण का उल्लेख किया। आयोग का कहना है कि मूल Form-6 में बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि SIR से संबंधित घोषणा को अलग Annexure के रूप में जोड़ा गया है। यही मुद्दा उन 14 आपत्तियों में शामिल था जिनका उल्लेख इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में किया गया था।

आयोग ने अपनी स्थिति में यह भी कहा है कि SIR के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए Form-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था 24 जून 2025 के निर्देशों में ही की गई थी।

उद्देश्य पात्र मतदाता को हटाना नहीं, सूची को अपडेट करना: धामी

मुख्यमंत्री  ने कहा कि SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करना है। उन्होंने कहा कि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों और अन्य कमजोर वर्गों के लिए हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं ताकि पात्र लोगों को प्रक्रिया में कठिनाई न हो।

चुनाव आयोग की मौजूदा मतदाता सेवा व्यवस्था में भी SIR-2026 के लिए अलग सुविधा उपलब्ध है और मतदाता अपनी पिछली SIR सूची में नाम खोजने तथा नए पंजीकरण के लिए Form-6 जैसी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ECINET पर सवालों की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा

धामी ने चुनाव आयोग के तकनीकी प्लेटफॉर्म ECINET को लेकर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी विषयों की स्वतंत्र तकनीकी समिति से समीक्षा कराई जा रही है।

उन्होंने आयोग की बैठकों को लेकर सामने आए विवाद के संदर्भ में कहा कि बैठकों का एजेंडा पहले से स्पष्ट और सर्कुलेशन में होना चाहिए। उनके मुताबिक संस्थाओं के भीतर पारदर्शिता और प्रक्रियागत स्पष्टता जरूरी है, लेकिन हर आंतरिक टिप्पणी को संस्थागत संकट के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

कभी सुप्रीम कोर्ट, कभी चुनाव आयोग पर सवाल: धामी

धामी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जब भी उसके राजनीतिक परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं आते, वह कभी EVM, कभी चुनाव आयोग और कभी दूसरी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती है। उन्होंने कहा कि सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उसका उत्तर तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होना चाहिए।

यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं। SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अदालतों में भी मामले चले हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में बिहार SIR की वैधता को बरकरार रखा था।

राहुल गांधी के आरोपों पर धामी का सीधा हमला

प्रेस कॉन्फ्रेंस में धामी ने राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे और कांग्रेस के आरोपों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी प्रदेश में नकल और भर्ती से जुड़े मामलों पर सरकार को घेरते हैं, जबकि उत्तराखंड सरकार ने नकल माफिया और भर्ती घोटालों के खिलाफ कार्रवाई की है।

धामी ने दावा किया कि 100 से अधिक नकल माफिया जेल भेजे गए और करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। उन्होंने राहुल गांधी पर संसदीय मर्यादा को तार-तार करने का आरोप भी लगाया।

हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर भी कांग्रेस को घेरा

सीएम धामी ने हल्द्वानी में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर जातीय और दलित नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हवन किसी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं था और वहां मौजूद लोगों में वाल्मीकि-शिल्पकार समाज के लोग भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर इस घटना को जातीय रंग देने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह के प्रयासों से सामाजिक विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई।

खटीमा-मसूरी से लेकर रामपुर तिराहा तक पुराने मुद्दे भी उठाए

प्रेस कॉन्फ्रेंस में धामी ने उत्तराखंड आंदोलन के पुराने घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा कांडों को याद करते हुए कांग्रेस पर उत्तराखंड के प्रति उसके पुराने राजनीतिक व्यवहार को लेकर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि उन घटनाओं के समय केंद्र में कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार थी और कांग्रेस को उत्तराखंड के लोगों को यह भी बताना चाहिए कि उस दौर में राज्य आंदोलनकारियों के साथ क्या हुआ।

अजीत डोभाल और जनरल बिपिन रावत का जिक्र

मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर विपक्षी नेताओं की कथित टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि डोभाल ने देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगाकर काम किया है।

उन्होंने पूर्व CDS जनरल बिपिन रावत को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का भी जिक्र किया और कहा कि उत्तराखंड के लोग ऐसी भाषा को नहीं भूलेंगे।

कांग्रेस का संगठन खत्म हो चुका: धामी

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के संगठन और उसके जनाधार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस झूठ और भ्रम का सहारा ले रही है क्योंकि उसका जनाधार कमजोर हो चुका है। राहुल गांधी पर व्यक्तिगत राजनीतिक हमला करते हुए उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अपने पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को लेकर कहा कि पार्टी को लगातार चुनावी हार का सामना करना पड़ेगा।

मोदी बनाम राहुल की तुलना 

धामी ने नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की राजनीतिक पृष्ठभूमि की तुलना करते हुए कहा कि राहुल गांधी का परिवार कई पीढ़ियों से सत्ता के केंद्र में रहा है, उनके नाना-दादी से लेकर पिता देश के प्रधानमंत्री रहे और उनकी माता सुपर प्रधानमंत्री तथा वे ख़ुद डिप्टी प्रधानमंत्री के रूप में रहे। जबकि प्रधानमंत्री मोदी सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर देश के प्रधानमंत्री बने। धामी ने हमला बोला कि एक ग़रीब माँ का बेटा देश कैसे चला सकता है, यही राहुल गांधी की हताशा का कारण बन गया है।

उन्होंने कहा कि देश 2014 से पहले की सरकारों, घोटालों और ‘रिमोट कंट्रोल’ वाली राजनीति को देख चुका है। उन्होंने बोफोर्स और कोयला घोटाले का भी उल्लेख किया। धामी का तर्क था कि भारत अब पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास और वैश्विक प्रभाव के साथ आगे बढ़ रहा है।

BJP ने एक साथ कई राज्यों में संभाला मोर्चाधामी की प्रेस कॉन्फ्रेंस अकेली घटना नहीं थी। रविवार को भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों ने चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया।

विवाद की असली वजह ?

मौजूदा विवाद के तीन प्रमुख स्तर हैं-

पहला- SIR की वैधानिकता
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए आयोग की शक्ति और प्रक्रिया की वैधानिकता को स्वीकार किया है।

दूसरा- आयोग के भीतर कथित असहमति
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने दो चुनाव आयुक्तों द्वारा 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का मुद्दा उठाया। चुनाव आयोग का जवाब है कि ये टिप्पणियां और सुझाव संस्थागत deliberation का हिस्सा थे और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

तीसरा- SIR का मतदाता पर प्रभाव
विपक्ष का मुख्य सवाल यह है कि दस्तावेजी प्रक्रिया और पिछले SIR से लिंक की शर्तों के कारण वास्तविक और पात्र मतदाताओं को परेशानी या उनके नाम हटने का जोखिम न हो। दूसरी ओर आयोग का कहना है कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना है तथा दावे-आपत्तियों और सुनवाई के रास्ते उपलब्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने बिहार फैसले में नोटिस और सुनवाई जैसी प्रक्रियात्मक सुरक्षा को महत्व दिया था।

यही वह बिंदु है जहां SIR अब सिर्फ मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता, मतदाता अधिकार और आगामी चुनावों की राजनीतिक लड़ाई का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

इस मुद्दे पर जारी प्रेस बयान यहाँ पढ़िए हुबहू –

संवैधानिक संस्थाओं पर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों पर बात करे कांग्रेस : मुख्यमंत्री धामी

चुनाव आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण का मुख्यमंत्री ने दिया हवाला, SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए

हेडलाइन नहीं, पूरी फाइल और संस्थागत अंतिम निर्णय से तय होते हैं तथ्य

नकल माफिया पर कार्रवाई, युवाओं को सरकारी नौकरी, हल्द्वानी प्रकरण और जमीन से जुड़े आरोपों पर भी कांग्रेस को दिया जवाब

देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि भारत के मजबूत लोकतंत्र का आधार देश की संवैधानिक संस्थाएं हैं और चुनाव आयोग भी देश की स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की पूर्ण आयोग की बैठक हुई। बैठक के बाद जारी नोट को पूरे आयोग की स्वीकृति प्राप्त है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 24 जून 2025 को जारी SIR का मूल आदेश पूरे आयोग की सर्वसम्मति से जारी हुआ था। इसके बाद 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों तथा फिर 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की SIR समय-सारिणी को भी आयोग की सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई। ऐसे में किसी आंतरिक टिप्पणी को आयोग के अंतिम निर्णय में मतभेद के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समाचार पत्र की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा विभिन्न विषयों पर कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज करने की बात कही गई है, लेकिन आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि SIR से जुड़े अंतिम आदेश सर्वसम्मति से लिए गए। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के निर्णय में SIR करने की चुनाव आयोग की वैधानिक शक्ति को स्वीकार किया और बिहार में अपनाई गई SIR प्रक्रिया को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम तथा संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुरूप माना।

SIR से जुड़े प्रत्येक विषय पर आयोग ने स्पष्ट की स्थिति

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग ने कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के अनुसार वह पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से जुड़ा प्रशासनिक विषय था।

उन्होंने कहा कि Form-6 के विषय में भी आयोग ने 26 सितंबर के नोट में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि SIR के लिए Form-6 से जुड़े declaration को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का आधार प्राप्त है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग के अनुसार non-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के अंतर्गत निर्धारित सामान्य फॉर्म ही लागू रहेंगे।

उन्होंने कहा कि आयोग ने यह व्यवस्था भी की है कि unmapped अथवा logical discrepancy वाले मतदाताओं के दस्तावेज BLO घर जाकर प्राप्त करेंगे और सामान्यतः उन्हें कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीब और बेघर नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाने का भी निर्णय लिया गया है।

छूटे हुए तथा पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात भी आयोग ने कही है।

ECINet की होगी स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि ECINet को लेकर उठे प्रश्नों पर आयोग ने स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा की व्यवस्था की है। सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में IIT/IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल करते हुए समिति यह देखेगी कि ECINet कानून और नियमों के अनुरूप कार्य कर रहा है या नहीं।

उन्होंने कहा कि आयोग ने भविष्य में कमीशन की बैठकों का एजेंडा पहले सर्कुलेट करने और बैठकों के मिनट्स जारी करने का भी निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “लोकतंत्र में प्रश्न अवश्य पूछे जाने चाहिए, लेकिन किसी इंटरनल नोट को अंतिम फैसला और किसी ऑब्जेक्शन को इंस्टीट्यूशनल ब्रेकडाउन के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। तथ्य हेडलाइन से नहीं, पूरी फाइल और अंतिम संस्थागत निर्णय से तय होने चाहिए।”

कांग्रेस अपनी राजनीतिक कमजोरी छिपाने के लिए संस्थाओं को ढाल न बनाए : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक एवं संवैधानिक विषयों को राजनीतिक ढाल बनाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने से कांग्रेस की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी जागरूक है और वह तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय करना जानती है।

राहुल गांधी के नकल माफिया वाले आरोप पर मुख्यमंत्री का पलटवार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने देहरादून में दावा किया कि भाजपा सरकार ने नकल के मामलों में किसी माफिया को जेल नहीं भेजा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नकल माफिया के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई है और सरकार के अनुसार 100 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सरकार की प्राथमिकता रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “युवाओं के भविष्य जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीतिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों को देखना चाहिए। केवल आरोप लगाने से जमीनी सच्चाई नहीं बदलती।”

उत्तराखंड को जाति और वर्ग में बांटने की राजनीति नहीं होनी चाहिए

हल्द्वानी प्रकरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी घटना को जातीय दृष्टिकोण से देखने से पहले उससे जुड़े तथ्यों की जांच आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान सामाजिक समरसता, भाईचारे और सभी वर्गों के परस्पर सम्मान की रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “उत्तराखंड को जाति और वर्ग के आधार पर बांटने की राजनीति नहीं होनी चाहिए। देवभूमि की सामाजिक एकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और इसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।”

जमीन के आरोपों पर कांग्रेस प्रमाण सार्वजनिक करे

मुख्यमंत्री ने जमीन से जुड़े कांग्रेस के आरोपों पर कहा कि यदि विपक्ष के पास सरकार अथवा किसी सरकारी संस्था द्वारा नियमों के विरुद्ध जमीन बेचे जाने या दिए जाने का कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

उन्होंने कहा कि केवल किसी आरोप को बार-बार दोहराने से वह तथ्य नहीं बन जाता। विपक्ष तथ्य सामने रखे, सरकार प्रत्येक तथ्यात्मक सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।

राजनीतिक विरोध में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाए

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माता से जुड़े हालिया राजनीतिक विवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल को लेकर की गई टिप्पणी तथा देश के प्रथम CDS जनरल बिपिन रावत से जुड़े राजनीतिक बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों और दिवंगत लोगों को लेकर राजनीतिक विमर्श में सम्मान और संवेदनशीलता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

हार का ठीकरा कभी EVM तो कभी संस्थाओं पर फोड़ना उचित नहीं : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व पर बैठे व्यक्ति से सार्वजनिक विमर्श में तथ्यों और गंभीरता की अपेक्षा रहती है।

उन्होंने कांग्रेस के पूर्व शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में विभिन्न घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर लंबे समय तक राजनीतिक विवाद रहे और वे आज भी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “अपनी चुनावी पराजय का कारण कभी EVM और कभी संवैधानिक संस्थाओं को बताने के बजाय कांग्रेस को अपने राजनीतिक और संगठनात्मक प्रदर्शन का आत्ममंथन करना चाहिए। लोकतंत्र में अंततः जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी कसौटी है।

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