
- CM Dhami on 2027: धामी के तरकश में क्या है? 2027 चुनाव पर मुख्यमंत्री ने दिया बड़ा संकेत, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

Dehradun News: अड्डा उत्तराखंड कॉनक्लेव 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से लेकर राहुल गांधी की उत्तराखंड में सक्रियता, यूसीसी, युवाओं, 7000 बीघा जमीन के आरोप और बिजली खरीद तक कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। अड्डा इनसाइडर के संपादक पवन लालचंद ने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल-जवाब किए।
2027 के चुनाव में जाने से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि क्या उनके पास 2022 की तरह कोई बड़ा राजनीतिक दांव या मुद्दा तैयार है?
जब उनसे पूछा गया कि 2022 में यूसीसी के वादे ने भाजपा के चुनावी अभियान को नई धार दी थी, अब 2027 में उनके ‘तरकश’ में क्या बचा है, तो मुख्यमंत्री ने किसी नए फैसले या घोषणा का खुलासा नहीं किया। हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि उत्तराखंड के हित में जो भी जरूरी होगा, सरकार वह फैसला कभी भी और बिना देर किए ले सकती है।
2027 पर धामी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी भाजपा के संकल्पों में शामिल था और उत्तराखंड की जनता से किया गया वादा था, जिसे सरकार ने पूरा किया।
2027 के लिए किसी नए ‘सरप्राइज’ के सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्यहित में जरूरी निर्णय लेने के लिए किसी विशेष समय का इंतजार नहीं किया जाएगा। धामी के इस बयान को 2027 के चुनाव से पहले सरकार की ओर से संभावित नए फैसलों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर धामी का पलटवार
अड्डा उत्तराखंड कॉनक्लेव में मुख्यमंत्री से राहुल गांधी की बढ़ती सक्रियता और युवाओं के बीच कांग्रेस के अभियान को लेकर भी सवाल किया गया। धामी ने कहा कि उन्हें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड आने से कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता जागरूक और विवेकशील है तथा वह चुनाव के समय नेताओं के भाषणों के बजाय सरकार के कामकाज को देखेगी।
नकल कांड और सरकारी भर्तियों को लेकर विपक्ष के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई की है और 35 हजार से अधिक नियुक्तियां की गई हैं।
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर धामी ने कहा—
“यह छात्रों की गूंज नहीं, बल्कि झूठ की गूंज है।”
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकार का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने है।
7000 बीघा जमीन के आरोप पर धामी की चुनौती
उत्तराखंड में UIIDB के जरिए 7000 बीघा जमीन निजी हाथों में दिए जाने के कांग्रेस के आरोप पर भी मुख्यमंत्री ने जवाब दिया।
धामी ने कहा कि UIIDB निवेश, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए बनाया गया बोर्ड है। उनका कहना था कि अब तक कुल 45 एकड़ जमीन ही उपलब्ध हो पाई है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से कहा कि यदि 7000 बीघा जमीन दिए जाने का कोई तथ्य है तो रिकॉर्ड सामने रखा जाए, आरटीआई लगाई जाए या अदालत का दरवाजा खटखटाया जाए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जमीन के मामले में कोई भी काम निर्धारित प्रक्रिया और राज्यहित के अनुरूप ही होगा।
बिजली खरीद और अडानी पावर पर भी बोले मुख्यमंत्री
बिजली खरीद के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। अडानी पावर को लेकर पूछे गए सवाल पर धामी ने कहा कि प्रक्रिया के तहत कंपनियों से बोली आमंत्रित की गई और सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को काम मिला। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी और वित्तीय पहलुओं को संबंधित विभागों और विद्युत नियामक संस्थाओं ने देखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में जरूरत और बढ़ेगी। ऐसे में दीर्घकालिक बिजली व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पीक आवर में बाजार से बिजली खरीदना महंगा पड़ता है।
‘जेन जी’ नहीं, धामी बोले—‘नई पीढ़ी’
युवाओं के मूड को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ‘जेन जी’ की जगह उन्हें In-G इंडियन जनरेशन या ‘नई पीढ़ी’ कहना पसंद करते हैं। धामी के मुताबिक यह पीढ़ी बेहद जागरूक है, दुनिया से जुड़ी है और अपने भविष्य के साथ समाज के भविष्य को लेकर भी सवाल करती है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वह राज्य के 20 से अधिक स्थानों पर युवाओं और विद्यार्थियों से संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की सरकार से बुनियादी अपेक्षाएं अलग नहीं हैं, लेकिन वे बदलाव और परिणाम तेज गति से चाहते हैं।
एआई, रोजगार, आपदा प्रबंधन, ग्लोबल वार्मिंग, ट्रैफिक, सार्वजनिक परिवहन, पर्यटन और भ्रष्टाचार जैसे विषयों पर युवाओं के सवालों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके बीच जाकर उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
आपदा के सवाल पर बोले धामी- ‘पूरा उत्तराखंड मेरा परिवार’
मुख्यमंत्री के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पहुंचने को लेकर पूछे गए सवाल पर धामी ने कहा कि इसे किसी राजनीतिक छवि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इसी राज्य में पैदा हुए और पले-बढ़े हैं और पूरा उत्तराखंड उनके लिए परिवार जैसा है। परिवार में संकट हो तो उसके बीच खड़ा होना उनका दायित्व है। धराली आपदा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पूरी रात सो नहीं पाए और सुबह वहां पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। खराब मौसम के कारण कई प्रयासों के बाद वह मौके तक पहुंच सके। थराली में महिलाओं के विरोध के दौरान गाड़ी रोककर उनके बीच बैठने की घटना का भी उन्होंने जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट की घड़ी में लोगों के साथ खड़ा रहना जरूरी है।
2027 से पहले धामी का संदेश क्या है?
अड्डा उत्तराखंड कॉनक्लेव में मुख्यमंत्री के साथ बातचीत में 2027 का चुनाव स्वाभाविक रूप से सबसे बड़ा राजनीतिक संदर्भ रहा। धामी ने विपक्ष के आरोपों पर सरकार का पक्ष रखा, युवाओं के सवालों का जिक्र किया और अपनी सरकार के कामकाज को रिपोर्ट कार्ड के रूप में पेश किया। लेकिन जब सवाल आया कि 2027 के लिए उनके तरकश में कौन-सा नया तीर है, तो मुख्यमंत्री ने उसका खुलासा नहीं किया।
उन्होंने सिर्फ इतना कहा-
“उत्तराखंड की जनता के लिए जो भी जरूरी होगा, राज्य के हित में जो भी जरूरी होगा, वह निर्णय हम कभी भी और किसी भी समय बिना देर किए ले सकते हैं।”
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का यह बयान अब उत्तराखंड की सियासत में चर्चा का विषय बन सकता है।



