
- मोदी सरकार के 12 साल: स्मृति ईरानी से धर्मेंद्र प्रधान तक, किस शिक्षा मंत्री ने शिक्षा व्यवस्था को कैसे बदला?
नई दिल्ली/देहरादून। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल को लेकर देशभर में एक बार फिर बहस तेज है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद अब तक शिक्षा मंत्रालय की कमान किन नेताओं के हाथ में रही और उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियां तथा चुनौतियां क्या रहीं।
मोदी सरकार के दौरान शिक्षा मंत्रालय (पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय) में चार बड़े चेहरे रहे। इन्हीं के दौर में नई शिक्षा नीति बनी, मंत्रालय का नाम बदला, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिला और प्रवेश परीक्षाओं को लेकर कई बड़े विवाद भी सामने आए।

1. स्मृति ईरानी (कार्यकाल: 26 मई 2014 – 5 जुलाई 2016)
प्रमुख फैसले
* शिक्षा क्षेत्र में केंद्र सरकार के पहले बड़े सुधारों की शुरुआत।
* IIT, IIM और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विस्तार पर जोर।
* स्वच्छ विद्यालय अभियान।
* उच्च शिक्षा सुधारों की प्रारंभिक रूपरेखा।
प्रमुख विवाद-
रोहित वेमुला प्रकरण, जेएनयू विवाद और FTII विवाद जैसे कई प्रकरणों के चलते स्मृति ईरानी का कार्यकाल राजनीतिक बहसों में लगातार सुर्खियां बंटोरता रहा।

2. प्रकाश जावड़ेकर (कार्यकाल: 5 जुलाई 2016 – 30 मई 2019)
प्रमुख उपलब्धियां
* नई शिक्षा नीति के मसौदे पर तेजी।
* डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा।
* बोर्ड परीक्षाओं और स्कूली शिक्षा सुधार पर फोकस।
* स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार।
इनका कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत माना जाता है और नीति निर्माण पर अधिक ध्यान दिया गया।

3. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ (कार्यकाल: 30 मई 2019 – 7 जुलाई 2021)
सबसे बड़ी उपलब्धि
* राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू।
* मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया गया।
* कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा।
चुनौतियां
* कोरोना महामारी
* ऑनलाइन शिक्षा
* परीक्षाओं का संचालन
NEP-2020 को मोदी सरकार के सबसे बड़े शिक्षा सुधारों में गिना जाता है।

- 4. धर्मेंद्र प्रधान (कार्यकाल: 7 जुलाई 2021 –25 जुलाई 2026)
- प्रमुख पहल* NEP 2020 के क्रियान्वयन पर जोर।
* डिजिटल यूनिवर्सिटी की अवधारणा।
* स्किल एजुकेशन।
* भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा।
* नई पाठ्यचर्या पर काम।प्रमुख चुनौतियां- प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठने से लेकर NTA से जुड़े विवाद, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विपक्ष के आरोप और नीट परीक्षा पेपर लीक होने के बाद जंतर मंतर पर शुरू हुए युवाओं के आंदोलन का पटाक्षेप उनके इस्तीफे के साथ हुआ है।टाइमलाइन
| वर्ष | शिक्षा मंत्री | सबसे बड़ी पहचान |
| ——— | ————– | —————– |
| 2014–2016 | स्मृति ईरानी | सुधारों की शुरुआत, बड़े विवाद |
| 2016–2019 | प्रकाश जावड़ेकर | नई शिक्षा नीति का मसौदा |
| 2019–2021 | रमेश पोखरियाल निशंक | NEP-2020, मंत्रालय का नाम परिवर्तन |
| 2021–2026 | धर्मेंद्र प्रधान | NEP लागू करना, डिजिटल शिक्षा, परीक्षा सुधार की चुनौती |सबसे बड़ा बदलाव
इन 12 वर्षों में भारतीय शिक्षा व्यवस्था में तीन बड़े परिवर्तन हुए—
* राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
* मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय करना
* डिजिटल और कौशल आधारित शिक्षा पर बढ़ता जोरक्या आप जानते हैं?
* मोदी सरकार में अब तक चार नेताओं ने शिक्षा मंत्रालय संभाला।
* 2020 में 34 साल बाद नई शिक्षा नीति लागू हुई।
* इसी दौरान मंत्रालय का नाम HRD से बदलकर Education Ministry किया गया।
* पिछले कुछ वर्षों में नीट सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता राष्ट्रीय बहस का विषय बनी रही।



